धान घोटाला: फिर रिश्वत जुटा खुद को बचाने की कोशिश में जुटे गड़बड़ी करने वाले मिलर्स
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के धान खरीद घोटाले पर उठाए गए कड़े कदमों पर पलीता लगाने के लिए करनाल के कई मिल संचालक सक्रिय हो गए हैं। ऐसे संचालकों ने दो तरफा काम करना शुरू कर दिया है। एक तो सरकार पर आरोप लगाना शुरू किया कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है, दूसरा हर मिल संचालक से एक लाख से दो लाख रुपए फंड लिया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस फंड से फिजिकल वैरिफिकेशन के लिए आई टीम का मुंह बंद किया जाएगा। दूसरी ओर कई मिल परिसर में अभी भी पुलिस बल तैनात है। लेकिन करनाल में मिल एसोसिएशन के प्रधान विनोद गोयल के मिल के प्रति पुलिस और सरकार कुछ ज्यादा मेहरबानी दिखा रहे हैं। इसी तरह से मेयर के परिवार के मिल पर भी खासी मेहरबानी नजर आ रही है।
विनोद गोयल का बयान, हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है
दूसरी ओर विनोद गोयल ने बयान जारी कर दावा किया कि पुलिस की मिलों में तैनाती से वह काम नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की इससे चावल की आपूर्ति करने में देरी होगी। उन्होंने तुरंत ही सरकार से आग्रह किया कि इस कार्यवाही को रोक दिया जाना चाहिए।
गोयल सही है तो चिंता क्यों ?
इधर यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी से मिल संचालक परेशान क्यों है? यदि उन्होंने गड़बड़ी नहीं की तो फिर उन्हें डरने की जरूरत ही नहीं है। पुलिस अपना काम कर रही है, मिल संचालक को चाहिए कि वह अपना काम करते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की तैनाती और ज्यादा पुख्ता होनी चाहिए।
विजिलेंस टीम से होनी चाहिए फिजिकल वैरिफिकेशन
दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि पीवी के लिए विजिलेंस या स्वतंत्र एजेंसी होनी चाहिए। क्योंकि हर बार पीवी होती है, लेकिन निकलता कुछ नहीं है। इस बार पीवी यदि सही हो गयी तो अकेले करनाल में ही कम से कम 70 राइस मिलर्स के खिलाफ पर्चा दर्ज हो सकता है।
अधिकारियों के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है
दूसरी ओर अभी तक करनाल मंडी के इंस्पेक्टर समीर के के खिलाफ मिल संचालकों को तय कोटे से ज्यादा मात्रा में धान अलॉट करने के मामले में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। जबकि होना तो यह चाहिए कि सबसे पहले धान ज्यादा अलॉट करने वाले इंस्पेक्टर के खिलाफ उचित कदम उठाया जाना चाहिए। क्योंकि यदि उनकी मिलीभगत न होती तो इतना बड़ा स्कैम अंजाम नहीं दिया जा सकता था।
करनाल की हर मंडी की होनी चाहिए जांच
यूथ फॉर चेंज के प्रवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि करनाल की हर मंडी में धान की फर्जी खरीद को अंजाम दिया गया है। इसलिए हर मंडी की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसान और सरकार के साथ बड़ा घोटाला है। जिसे अधिकारियों ने मिलर्स, आढ़ती, मंडी कमेटी के साथ मिल कर अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि धान खरीद में जितने भी इंस्पेक्टर लगे थे, उनकी जांच होनी चाहिए।
इस घोटाले को यूं समझे
धान के समर्थन मूल्य का लाभ तो किसान को मिलना चाहिए, लेकिन हो यह रहा है कि खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी , मंडी कमेटी और आढ़ती मिल कर धान की फर्जी खरीद दिखा कर मिलर्स को अलॉट कर देते हैं। इससे जो लाभ किसानों को मिलना चाहिए वह मिलर्स की जेब में चला जाता है। दूसरी ओर मिलर्स यूपी और बिहार से चावल लाकर एफसीआइ को सप्लाई कर देता है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में यह घोटाला कई सालों से चल रहा है। इस बार तो करनाल में इस गड़बड़ी ने सारे रिकार्ड ही तोड़ दिए। इस वजह से किसानों को धान बेचने में भारी दिक्कत आई। द न्यूज इंसाइडर ने यह मामला उठाया, इस पर संज्ञान लेते हुए विपक्ष ने विधानसभा में इस मामले को उठाया था। इसके बाद ही उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सदन में आश्वासन दिया था कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। केबिनेट मीटिंग में भी इस मामले को लेकर चर्चा हुई थी। तब निर्णय लिया गया था कि राइस मिलों की पीवी कराई जाएगी।
धान घोटाला 1
https://thenewsinsider1.blogspot.com/2019/10/blog-post.html
हर मिल संचालक से लिया जा रहा है पैसा, ताकि फिजिकल वैरिफिकेशन के लिए आने वाली टीम को किया जाए मुंह बंदद न्यूज इंसाइडर रिसर्च टीम , चंडीगढ़
घोटालेबाज मिल संचालक खुद की गड़बड़ी को छुपाने के लिए सरकार पर लगा रहे तंग करने आरोप
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के धान खरीद घोटाले पर उठाए गए कड़े कदमों पर पलीता लगाने के लिए करनाल के कई मिल संचालक सक्रिय हो गए हैं। ऐसे संचालकों ने दो तरफा काम करना शुरू कर दिया है। एक तो सरकार पर आरोप लगाना शुरू किया कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है, दूसरा हर मिल संचालक से एक लाख से दो लाख रुपए फंड लिया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस फंड से फिजिकल वैरिफिकेशन के लिए आई टीम का मुंह बंद किया जाएगा। दूसरी ओर कई मिल परिसर में अभी भी पुलिस बल तैनात है। लेकिन करनाल में मिल एसोसिएशन के प्रधान विनोद गोयल के मिल के प्रति पुलिस और सरकार कुछ ज्यादा मेहरबानी दिखा रहे हैं। इसी तरह से मेयर के परिवार के मिल पर भी खासी मेहरबानी नजर आ रही है।
विनोद गोयल का बयान, हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है
दूसरी ओर विनोद गोयल ने बयान जारी कर दावा किया कि पुलिस की मिलों में तैनाती से वह काम नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की इससे चावल की आपूर्ति करने में देरी होगी। उन्होंने तुरंत ही सरकार से आग्रह किया कि इस कार्यवाही को रोक दिया जाना चाहिए।
गोयल सही है तो चिंता क्यों ?
इधर यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी से मिल संचालक परेशान क्यों है? यदि उन्होंने गड़बड़ी नहीं की तो फिर उन्हें डरने की जरूरत ही नहीं है। पुलिस अपना काम कर रही है, मिल संचालक को चाहिए कि वह अपना काम करते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की तैनाती और ज्यादा पुख्ता होनी चाहिए।
विजिलेंस टीम से होनी चाहिए फिजिकल वैरिफिकेशन
दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि पीवी के लिए विजिलेंस या स्वतंत्र एजेंसी होनी चाहिए। क्योंकि हर बार पीवी होती है, लेकिन निकलता कुछ नहीं है। इस बार पीवी यदि सही हो गयी तो अकेले करनाल में ही कम से कम 70 राइस मिलर्स के खिलाफ पर्चा दर्ज हो सकता है।
अधिकारियों के खिलाफ कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा है
दूसरी ओर अभी तक करनाल मंडी के इंस्पेक्टर समीर के के खिलाफ मिल संचालकों को तय कोटे से ज्यादा मात्रा में धान अलॉट करने के मामले में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। जबकि होना तो यह चाहिए कि सबसे पहले धान ज्यादा अलॉट करने वाले इंस्पेक्टर के खिलाफ उचित कदम उठाया जाना चाहिए। क्योंकि यदि उनकी मिलीभगत न होती तो इतना बड़ा स्कैम अंजाम नहीं दिया जा सकता था।
करनाल की हर मंडी की होनी चाहिए जांच
यूथ फॉर चेंज के प्रवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि करनाल की हर मंडी में धान की फर्जी खरीद को अंजाम दिया गया है। इसलिए हर मंडी की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसान और सरकार के साथ बड़ा घोटाला है। जिसे अधिकारियों ने मिलर्स, आढ़ती, मंडी कमेटी के साथ मिल कर अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि धान खरीद में जितने भी इंस्पेक्टर लगे थे, उनकी जांच होनी चाहिए।
इस घोटाले को यूं समझे
धान के समर्थन मूल्य का लाभ तो किसान को मिलना चाहिए, लेकिन हो यह रहा है कि खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी , मंडी कमेटी और आढ़ती मिल कर धान की फर्जी खरीद दिखा कर मिलर्स को अलॉट कर देते हैं। इससे जो लाभ किसानों को मिलना चाहिए वह मिलर्स की जेब में चला जाता है। दूसरी ओर मिलर्स यूपी और बिहार से चावल लाकर एफसीआइ को सप्लाई कर देता है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में यह घोटाला कई सालों से चल रहा है। इस बार तो करनाल में इस गड़बड़ी ने सारे रिकार्ड ही तोड़ दिए। इस वजह से किसानों को धान बेचने में भारी दिक्कत आई। द न्यूज इंसाइडर ने यह मामला उठाया, इस पर संज्ञान लेते हुए विपक्ष ने विधानसभा में इस मामले को उठाया था। इसके बाद ही उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सदन में आश्वासन दिया था कि गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। केबिनेट मीटिंग में भी इस मामले को लेकर चर्चा हुई थी। तब निर्णय लिया गया था कि राइस मिलों की पीवी कराई जाएगी।
एडिटर नोट: धान घोटाला हरियाणा का सबसे बड़ा घोटाला है। क्योंकि यह सरकारी फंड में हेरोफरी कर किसानों के हक पर सीधा डाका डाला जा रहा है। द न्यूज इंसाइडर टीम इस घोटाले की तह में गयी है। इसी को लेकर लगातार एक सीरिज चलाई जा रही है।
धान घोटाला 1
https://thenewsinsider1.blogspot.com/2019/10/blog-post.html
धान घोटाला 2
धान घोटाला 3
एडिटर नोट: द न्यूज इंसाइडर जनहित के मुद्दों को उठाने वाला एक पोर्टल है। जिसकी कोशिश है कि मेन स्ट्रिम मीडिया जिन मुद्दों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लेकिन वह जनहित में हैं, उन्हें हम इस प्लेटफार्म से उठाएंगे। यह गैर लाभकारी संस्था द रुट के तत्वाधान में चलाया जा रहा है। पोर्टल को चलाने के लिए हमें आपकी मदद की सख्त जरूरत है। क्योंकि तभी हम बाजार, सरकार और विज्ञापनों के दबाव से बचते हुए स्वतंत्र तौर पर पत्रकारिता करने में सक्ष्म होंगे।
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