करनाल में भूमाफिया का कमाल : एनओसी के बिना प्लॉटिंग, ‘फ्री जोन’ का झांसा देकर खुली ठगी



करनाल 

रनाल–इंद्री रोड स्थित स्टेट हाईवे-7 पर गांव रंबा और समौरा के बीच काटी जा रही अवैध कॉलोनी प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित खेल का संकेत दे रही है। बिना किसी विभागीय एनओसी और स्वीकृत लेआउट प्लान के कॉलोनी विकसित की जा रही है, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीपी) विभाग को पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही चुप्पी अब विभाग की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर रही है।

नियमानुसार स्टेट हाईवे से सटे क्षेत्र में बिना डीटीपी की अनुमति न तो प्लॉटिंग संभव है और न ही व्यावसायिक निर्माण, इसके बावजूद यहां फार्म हाउस, शोरूम और रिहायशी प्लॉट खुलेआम बेचे जा रहे हैं। कॉलोनाइज़र ‘फ्री जोन’ का झांसा देकर भोले-भाले लोगों को गुमराह कर रहे हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि यह पूरी कॉलोनी अवैध है और कभी भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है। 


                                              ठगी के दो मुख्य किरदार 


डीटीपी अधिकारी की भूमिका पर सीधा सवाल

सूत्र बताते हैं कि डीटीपी विभाग के संबंधित अधिकारी को इस अवैध कॉलोनी की पूरी जानकारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन न तो कोई नोटिस जारी हुआ और न ही साइट पर निरीक्षण कर कोई ठोस कदम उठाया गया। सवाल यह है कि जब छोटी-सी अवैध निर्माण पर तुरंत कार्रवाई हो जाती है, तो इतनी बड़ी कॉलोनी पर विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ रही?

कॉलोनी में आंतरिक सड़कें बन चुकी हैं, प्लॉटों की बुकिंग जोरों पर है और खुलेआम सौदे किए जा रहे हैं। यह सब महीनों से चल रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि या तो अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं या फिर भू-माफिया को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।


लोगों की जमा-पूंजी दांव पर

सबसे बड़ा नुकसान उन आम लोगों को हो रहा है, जिन्होंने जीवन भर की कमाई लगाकर यहां प्लॉट खरीदे हैं। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि सब कुछ कानूनी है, लेकिन अब उन्हें डर सता रहा है कि कहीं भविष्य में बुलडोजर न चल जाए। यदि कॉलोनी अवैध घोषित होती है तो ठगी का शिकार हुए लोगों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।

जांच नहीं हुई तो बढ़ेगा अवैध धंधा

डीटीपी विभाग की निष्क्रियता ने भू-माफिया और अधिकारियों के गठजोड़ की आशंका को और मजबूत कर दिया है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी डीटीपी अधिकारी, पूर्व रेवेन्यू अधिकारी और राजनीतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।


अब सवाल यह नहीं है कि कॉलोनी अवैध है या नहीं, सवाल यह है कि डीटीपी कब तक खामोश रहेगा — और क्या प्रशासन इस अवैध धंधे पर सख़्त वार करेगा या फिर यह चुप्पी किसी बड़े घोटाले की बुनियाद बन जाएगी।


                                              कौन अधिकारी जिम्मेदार?



  •                                       डीटीपी विभाग 

  •                          रेवेन्यू विभाग                                      








  •                                                     


  •                                           प्रशासन



सवाल साफ है:

 

जब आम नागरिक के छोटे निर्माण पर तुरंत कार्रवाई होती है, तो स्टेट हाईवे पर चल रहे इस बड़े अवैध खेल पर अब तक किसके इशारे पर चुप्पी साधी गई?


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