पत्रकार देवेंद्र गांधी ने किया डीटीपी विभाग में करोड़ों की रिश्वत के खेल का भंडाफोड़
मनोज ठाकुर
करनाल के महंगे सेक्टर में शामिल 32 सेक्टर में नूर महल होटल के पीछे डीटीपी विभाग की अवैध निर्माण पर कार्यवाही हुई। यह कार्यवाही कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस कार्यवाही से डीटीपी विभगा के काम करने के तरीके को भी समझा जा सकता है। इतना ही नहीं किस तरह से अवैध निर्माण को डीटीपी विभाग जस्टिफायी करता है, कार्यवाही से यह भी पता चल रहा है।
यह भवन अवैध है, न तो इसका नक्शा पास है, न ही अन्य औपचारिकता पूरी की है। दावा किया जा रहा है कि मकान का निर्माण करने वालों ने एक एनओसी ले रखी है। अब एनओसी पर इस तरह की बिल्डिंग कैसे बन रही है? इस सवाल का जवाब तो डीटीपी विभाग और डीटीपी ही दे सकती है। हालांकि इस भवन के निर्माण कर रहे विकास बंसल ने दावा किया कि उनके पास एनओसी है। लेकिन वह मौके पर एनओसी दिखा नहीं पाए।
करनाल में अवैध कालोनी काटने वाले लैंड माफिय के साथ डीटीपी विभाग के सीनियर अधिकारियों की मिलीभगत की परंपरा लंबे अर्से से चल रही है। 11 मार्च 2022 में करनला के तत्कालीन डीटीपी बिक्रम सिंह को विजिलेंस ने सेक्टर-6 स्थित उनके निवास स्थान से गिरफ्तार किया था। जब विजिलेंस की जांच टीम ने दावा किया था कि बिक्रम सिंह अवैध कॉलोनियों के विकास की एवज में रिश्वत ले रहे थे। ओपीएस के इस निर्माण को देखते हुए एक बार फिर से रिश्वत खोरी की वहीं परंपरा यकायक याद आ रही है।
इतना ही नहीं करनाल में अवैध कालोनी काटने वाले कई लैंड माफिया का दावा है कि उन्होंने अवैध कालोनी के लिए डीटीपी विभाग में मोटी रिश्वत दी है। इन लैंड माफिया में अब छटपटाहट इस बात की है कि रिश्वत लेने के बाद भी डीटीपी ने उनकी अवैध कालोनी में तोड़फोड़ की है।
ओपीएस की बन रही यह बिल्डिंग तस्दीक कर रही है कि डीटीपी विभाग की कार्यप्रणाली भेदभाव पूर्ण है। विभाग पैसे वालों व रसूखदारों को संरक्षण दे रहा है। दिखावे के लिए उन लोगों के निर्माण ढहाए जा रहे हैं, जो मोटी रिश्वत नहीं दे पाते।

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