कोई टाइटल नहीं

... तो क्या सीएम मनोहर लाल अपने मंत्रियों के विभागों में हस्ताक्षेप कर रहे हैं ?
अनिल विज ने आईपीएस के तबादले पर सवाल उठाए, दूसरी ओर करनाल में सीएम ने तहसीलदार और नायब तहसलीदार को सस्पेंड किया था, जबकि यह विभाग उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास हैं 

द न्यूज इनसाइडर ब्यूरो, चंडीगढ़
16 दिसंबर सीएम मनोहर लाल ने अपने विधानसभा क्षेत्र करनाल तहसील के  तहसीलदार रविंद्र, नायब तहसीलदार हवासिंह, रजिस्ट्री क्लर्क राजबीर और पटवारी सलमा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। सीएम ने बताया कि एक रजिस्ट्री पेंडिंग होने की वजह से यह कदम उठाया है।

                                                  हस्तक्षेप क्यों माना जा रहा है?
क्योंकि यह विभाग उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का है। क्योंकि वह सरकार के सहयोगी पार्टी के नेता भी है। इसलिए इतना बड़ा कदम यदि उठाया जाना था तो उनसे बातचीत होनी चाहिए थी। सियासी हलको में इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या सीएम डिप्टी सीएम के विभाग में सीधा हस्ताक्षेप कर सकता है?
                                                 सस्पेंशन पर विवाद क्यों है
बताया जा रहा है जिस रजिस्ट्री के लिए तहसीलदार को सस्पेंड किया गया, उस रजिस्ट्री का मालिक उसे लेने ही नहीं आया। तहसीलदार ने सीएम को भी मौके पर यह जानकारी दी थी। लेकिन उनकी बात को सुना नहीं गया। दूसरी ओर रजिस्ट्री को रोक कर रखने के पीछे जिम्मेदार कौन? यह भी तय नहीं किया गया। यदि तहसीलदार ने रजिस्ट्री को रोक रखा तो फिर नायब तहसीलदार सस्पेंड क्यों किया गया। यदि नायब तहसीलदार जिम्मेदार है तो फिर तहसीलदार को सस्पेंड क्यों किया गया।
                                     आईपीएस के तबादले पर विज ने जताया रोष



सरकार ने 29 दिसंबर को नौ आईपीएस अधिकारियों के तबादले किया। विज ने कहा कि उन्होंने तबादले की लिस्ट पर आब्जेक्शन लगाया था। लेकिन उनके आब्जेक्शन को दरकिनार कर दिया गया। विज ने सीएम को पत्र भी लिखा,लेकिन इसके बाद भी इस दिशा में अभी तक कुछ नहीं हुअा है। विज अभी तक सरकार से नाराज है।
                                      क्यों है यह हस्ताक्षेप 
क्योंकि पुलिस होम मिनिस्ट्री के अंडर आती है। इसके मंत्री अनिल विज है। आईपीएस के तबादले की लिस्ट उनके पास पहुंची।  विज खेमे का मानना है कि सीएम को तबादले से पहले मंत्री की राय लेनी चाहिए थी। यदि मंत्री ने लिस्ट पर आब्जेक्शन लगाया तो इसे माना जाना चाहिए   था, या कोई सहमति बनाकर ही तबादले करने चाहिए थे।
                               विज मुखर तो  दुष्यंत की चुप क्यों? 
विज की छवि स्पष्ट बोलने वाले नेता की है। उन्हें जो भी गलत लगता है वह उस पर अपनी राय खुल कर रखते हैं। उन्हें यदि सीएम की कोई बात सही नहीं लगती तो इस पर भी वह खुल कर आपत्ति जता देते हैं। वह भाजपा के सीनियर नेता है।  वह पहले भी सरकार के कामकाज को लेकर अपनी राय खुले तौर पर रखते रहे हैं। तो दुष्यंत चौटाला चुप क्यों है? इसकी वजह यह मानी जा रही है कि उनकी अपनी पार्टी में ही अभी टकराव चल रहा है। नारनौद के विधायक रामकुमार गौतम ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। दुष्यंत यदि इस मौके पर सीएम पर सवाल खड़ा करते हैं तो वह हालात को काबू में रखने की स्थिति में नहीं है। यहीं वजह है कि वह तहसीलदारों के सस्पेंशन पर चुप है।
                          तो क्या इस तरह से सीएम हस्ताक्षेप कर सकते हैं 
राजनीतिक समीक्ष डाक्टर सतपाल सिंह ने बताया कि सीएम का अधिकार है कि वह तबादला कर सकते हैं।  यूं भी जो भी तबादले होते हैं, उनकी फाइल सीएम के पास जाती है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही तबादला लिस्ट जारी होती है। हरियाणा में लंबे समय से यहीं चल रहा है।  पिछली सरकार में भी ऐसा ही होता आया है। मंत्रियों को कुछ समय के लिए अपने अपने विभाग में तबादला करने के अधिकार मिलते हैं।  डाक्टर सिंह ने कहा कि यह सही है कि यदि सीएम संबंधित मंत्री से सलाह कर लें तो हालात सामान्य रहते हैं। जिस तरह अब विवाद उठ रहे हैं, इन्हें टाला जा सकता है।
                           जल्दबाजी में उठाए गए कदम लग रहे हैं
राजनीतिक समीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि सीएम कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में नजर आ रहे है। जिस तरह से पिछले दिनों दुष्यंत चौटाला और मंत्री अनिल विज ने लगातार छापेमारी की, इससे सीएम को भी इस तरह का कदम उठाने के लिए प्रेरित किया हो, लेकिन उन्होंने थोड़ी जल्दबाजी की है। दीपक कुमार ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि सीएम अपनी मुखर छवि बनाना चाह रहे हैं।



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