धान की फर्जी खरीद: सरकार ने प्रदेश भर के राइस मिल पर तैनात की पुलिस
द न्यूज इंसाइडर रिसर्च टीम, चंडीगढ़
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए सरकारी धान से चावल तैयार कराने वाले मिल पर सरकार ने पुलिस बल तैनात कर दिया है। देर रात पुलिस ने प्रदेश के सभी राइस मिल की जांच की। पुलिस ने मिल में धान व चावल की मात्रा का डाटा तैयार किया। द न्यूज इंसाइडर ने धान की फर्जी खरीद मामले को प्रमुखता से उठाया था। वेबसाइड के रिसर्च टीम ने अपनी छानबीन में पाया था कि हरियाणा में लगभग हर राइस मिल संचालक ने खाद्य आपूर्ति विभाग, मंडी कमेटी, आढ़ती ने मिल कर धान की फर्जी खरीद की है। यहीं वजह रही कि प्रदेश में धान की रिकार्ड पैदावार दिखायी गयी। दूसरी ओर धान उत्पादक किसानों की फसल नहीं बिक रही थी। कई जगह किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वेबसाइड ने एक टीम गठित कर गड़बड़ी का स्पेशल ऑडिट किया। इसमें सामने आया कि लगभग 500 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी करनाल में
टीम ने पाया कि सबसे ज्यादा गड़बड़ी तो करनाल जिले में हुई है। करनाल अनाज मंडी में राइस मिलर्स ने इस बार धान की फर्जी खरीद के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बताया जा रहा है कि इंस्पेटर समीर वशिष्ठ ने मिलर्स के साथ मिल कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है। यूथ फॉर चेंज के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि धान खरीद सीजन में समीर की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि समीर की आला अधिकारियों से भी मिलीभगत है, यहीं वजह है कि इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने के बाद भी उन्हें बचाया जा रहा है। एडवोकेट ढुल ने बताया कि करनाल में इंस्पेटर से जवाब मांगा गया था कि उन्होंने तय मात्रा से ज्यादा धान कैसे मिलर्स को अलॉट की। लेकिन इस पत्र का भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया है।
सबसे ज्यादा धान भाजपा समर्थक मिलर्स को
बताया जा रहा है कि ज्यादा धान लेने वालों में ज्यादातर मिलर्स सरकार समर्थित है। मेयर के परिवार के राइस मिल को भी तय मात्रा से ज्यादा धान दी गयी है। इसी तरह से राइस मिल एसोसिएसन के प्रधान विनोद गोयल के प्रति भी खाद्य आपूर्ति विभाग ने खूब दरियादिली दिखायी है। उन्हें भी तय कोटे से ज्यादा धान अलॉट की गयी है। इसके अलावा 40 के आस पास ऐसे राइस मिलर्स है जिन्हें उनके तय कोटे से ज्यादा धान अलॉट की गयी है। एडवोकेट ढुल का कहना है कि धान अलॉट नहीं हुई बल्कि यह सीधी सीधी धान की फर्जी खरीद है। यह धान कागजों में ही बिकी है। इससे किसान को धान बेचने में भारी दिक्क्तों का सामना करना पड़ा।
सरकार तक पहुंचे गड़बड़ी करने वाले
इधर जानकारी मिली है कि पहुंच वाले कुछ मिलर्स सीएम तक पहुंच गए हैं। करनाल भाजपा का एक नेता उनकी मदद कर रहा है। यहीं वजह रही कि जहां पहले दिन पुलिस ने खासी सख्ती दिखायी, वहीं दूसरे दिन यह सख्ती कम कर दी गयी। जिससे धान की फर्जी खरीद करने वाले राइस मिलर्स ने राहत की सांस ली है। सरकार ने भी अब उन्हें राहत देने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस को वापस बुला लिया गया है। जबकि होना तो यह चाहिए था कि फाइनल जांच होने तक पुलिस मिल परिसर में ही रहती। इससे राइस मिलर्स न तो चावल ला सकते थे और न धान। जिससे उनके घोटाले का आसानी से पता चल सकता था।
तो क्यां उन्हें बचाया जा रहा है
अब बताया जा रहा है कि धान की फिजिकल वैरिफिकेशन के लिए एक कमेटी गठित की जा रही है। जानकारों का कहना है कि इस कमेटी की आड़ में ही राइस मिलर्स को बचाने की कोशिश होती है। यह कमेटी तो हर साल गठित होत है। इसके बाद भी धान की फर्जी खरीद हर साल बढ़ रही है। इसलिए होना तो यह चाहिए कि धान की फिजिकल वैरिफिकेशन विजिलेंस से करायी जानी चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो कमेटी के साथ स्वतंत्र पर्यवेक्षक भी होने चाहिए। य दि ऐसा नहीं होता तो कमेटी में शामिल कुछ अधिकारी मिलर्स से मिलीभगत कर उनके पक्ष में ही रिपोर्ट तैयार कर देंगे।
हमें तो पहले ही पता है सरकार किसान हितैषी नहीं है
इधर विपक्ष के नेता चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने विधानसभा में आश्वासन दिया था कि धान की फर्जी खरीद करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। केबिनेट में भी यह मामला उठा था। लेकिन जब जिस तरह से सख्ती के बाद नर्मी हो रही है, इससे तो यहीं लग रहा है कि सरकार की करनी और कथनी में अंतर है। उन्होंने कहा कि यह सरकार गड़बड़ करने वालों को समर्थन दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो मिलों की फिजिकल वैरिफिकेशन सही तरह से होती। लेकिन एक बार सख्ती कर नरमी करना बता रहा है कि किसी ने किसी स्तर पर गड़बड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले पर विधानसभा में जवाब मांगा जाएगा।
और इन्हें दी तय कोटे से ज्यादा धान
1
आत्माराम जगदीश चंद यह सी कैटागिरी की मिलर्स है। इन्हें 40 हजार क्विंटल धान दिया जाना चाहिए था। लेकिन दस्तावेज में इन्हें80 हजार दिया गय है। यानी सीधे सीधे डबल।
2
एमएम ओवरसीज को 70 हजार दिया जाना चाहिए था दिया गया 100 हजार क्विंटल।
3
श्रीश्याम यह लीज का मिल है, इन्हें 40 हजा दिया जाना चाहिए था दिया गया है डबल से भी ज्यादा 90 हजार क्विंटल।
4
रिदी सिद्धी को 40 हजार की जगह 70 हजार क्विंटल
5
एसएस ओवरसीज को 70 की जगह 100 हजार क्विंटल
इसी तरह से रामा इंडस्ट्रीज को 56 की जगह 86 क्विंटल, शिव राइस मिल को डीएमसी ने 49 क्विंटल धान देना तय किया था, दिया गया 85 हजार क्विंटल। श्री कृष्णम को 40 की जगह 65, सोना फूड को 70 की जगह 80, हजार क्विंटल दिया गया है। इसके अलावा कम से कम 15 ऐसे राइस मिलर्स है,जिन्हें उनके तय कोटे से ज्यादा धान दिया गया है।
धान घोटाला 1
https://thenewsinsider1.blogspot.com/2019/10/blog-post.html
द न्यूज इंसाइडर ने उठाया था मामला, सरकार ने लिया संज्ञान, उप मुख्य मंत्री ने सदन में दिया था आश्वासन
कई राइसमिलर्स को क्षमता से डबल धान दिया गया, कागजों में उगा धान, इसलिए किसान हो रहे बदहाल
द न्यूज इंसाइडर रिसर्च टीम, चंडीगढ़
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए सरकारी धान से चावल तैयार कराने वाले मिल पर सरकार ने पुलिस बल तैनात कर दिया है। देर रात पुलिस ने प्रदेश के सभी राइस मिल की जांच की। पुलिस ने मिल में धान व चावल की मात्रा का डाटा तैयार किया। द न्यूज इंसाइडर ने धान की फर्जी खरीद मामले को प्रमुखता से उठाया था। वेबसाइड के रिसर्च टीम ने अपनी छानबीन में पाया था कि हरियाणा में लगभग हर राइस मिल संचालक ने खाद्य आपूर्ति विभाग, मंडी कमेटी, आढ़ती ने मिल कर धान की फर्जी खरीद की है। यहीं वजह रही कि प्रदेश में धान की रिकार्ड पैदावार दिखायी गयी। दूसरी ओर धान उत्पादक किसानों की फसल नहीं बिक रही थी। कई जगह किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वेबसाइड ने एक टीम गठित कर गड़बड़ी का स्पेशल ऑडिट किया। इसमें सामने आया कि लगभग 500 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है।
सबसे ज्यादा गड़बड़ी करनाल में
टीम ने पाया कि सबसे ज्यादा गड़बड़ी तो करनाल जिले में हुई है। करनाल अनाज मंडी में राइस मिलर्स ने इस बार धान की फर्जी खरीद के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बताया जा रहा है कि इंस्पेटर समीर वशिष्ठ ने मिलर्स के साथ मिल कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है। यूथ फॉर चेंज के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि धान खरीद सीजन में समीर की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि समीर की आला अधिकारियों से भी मिलीभगत है, यहीं वजह है कि इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने के बाद भी उन्हें बचाया जा रहा है। एडवोकेट ढुल ने बताया कि करनाल में इंस्पेटर से जवाब मांगा गया था कि उन्होंने तय मात्रा से ज्यादा धान कैसे मिलर्स को अलॉट की। लेकिन इस पत्र का भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया है।
सबसे ज्यादा धान भाजपा समर्थक मिलर्स को
बताया जा रहा है कि ज्यादा धान लेने वालों में ज्यादातर मिलर्स सरकार समर्थित है। मेयर के परिवार के राइस मिल को भी तय मात्रा से ज्यादा धान दी गयी है। इसी तरह से राइस मिल एसोसिएसन के प्रधान विनोद गोयल के प्रति भी खाद्य आपूर्ति विभाग ने खूब दरियादिली दिखायी है। उन्हें भी तय कोटे से ज्यादा धान अलॉट की गयी है। इसके अलावा 40 के आस पास ऐसे राइस मिलर्स है जिन्हें उनके तय कोटे से ज्यादा धान अलॉट की गयी है। एडवोकेट ढुल का कहना है कि धान अलॉट नहीं हुई बल्कि यह सीधी सीधी धान की फर्जी खरीद है। यह धान कागजों में ही बिकी है। इससे किसान को धान बेचने में भारी दिक्क्तों का सामना करना पड़ा।
सरकार तक पहुंचे गड़बड़ी करने वाले
इधर जानकारी मिली है कि पहुंच वाले कुछ मिलर्स सीएम तक पहुंच गए हैं। करनाल भाजपा का एक नेता उनकी मदद कर रहा है। यहीं वजह रही कि जहां पहले दिन पुलिस ने खासी सख्ती दिखायी, वहीं दूसरे दिन यह सख्ती कम कर दी गयी। जिससे धान की फर्जी खरीद करने वाले राइस मिलर्स ने राहत की सांस ली है। सरकार ने भी अब उन्हें राहत देने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस को वापस बुला लिया गया है। जबकि होना तो यह चाहिए था कि फाइनल जांच होने तक पुलिस मिल परिसर में ही रहती। इससे राइस मिलर्स न तो चावल ला सकते थे और न धान। जिससे उनके घोटाले का आसानी से पता चल सकता था।
तो क्यां उन्हें बचाया जा रहा है
अब बताया जा रहा है कि धान की फिजिकल वैरिफिकेशन के लिए एक कमेटी गठित की जा रही है। जानकारों का कहना है कि इस कमेटी की आड़ में ही राइस मिलर्स को बचाने की कोशिश होती है। यह कमेटी तो हर साल गठित होत है। इसके बाद भी धान की फर्जी खरीद हर साल बढ़ रही है। इसलिए होना तो यह चाहिए कि धान की फिजिकल वैरिफिकेशन विजिलेंस से करायी जानी चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो कमेटी के साथ स्वतंत्र पर्यवेक्षक भी होने चाहिए। य दि ऐसा नहीं होता तो कमेटी में शामिल कुछ अधिकारी मिलर्स से मिलीभगत कर उनके पक्ष में ही रिपोर्ट तैयार कर देंगे।
हमें तो पहले ही पता है सरकार किसान हितैषी नहीं है
इधर विपक्ष के नेता चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने विधानसभा में आश्वासन दिया था कि धान की फर्जी खरीद करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। केबिनेट में भी यह मामला उठा था। लेकिन जब जिस तरह से सख्ती के बाद नर्मी हो रही है, इससे तो यहीं लग रहा है कि सरकार की करनी और कथनी में अंतर है। उन्होंने कहा कि यह सरकार गड़बड़ करने वालों को समर्थन दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो मिलों की फिजिकल वैरिफिकेशन सही तरह से होती। लेकिन एक बार सख्ती कर नरमी करना बता रहा है कि किसी ने किसी स्तर पर गड़बड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले पर विधानसभा में जवाब मांगा जाएगा।
और इन्हें दी तय कोटे से ज्यादा धान
1
आत्माराम जगदीश चंद यह सी कैटागिरी की मिलर्स है। इन्हें 40 हजार क्विंटल धान दिया जाना चाहिए था। लेकिन दस्तावेज में इन्हें80 हजार दिया गय है। यानी सीधे सीधे डबल।
2
एमएम ओवरसीज को 70 हजार दिया जाना चाहिए था दिया गया 100 हजार क्विंटल।
3
श्रीश्याम यह लीज का मिल है, इन्हें 40 हजा दिया जाना चाहिए था दिया गया है डबल से भी ज्यादा 90 हजार क्विंटल।
4
रिदी सिद्धी को 40 हजार की जगह 70 हजार क्विंटल
5
एसएस ओवरसीज को 70 की जगह 100 हजार क्विंटल
इसी तरह से रामा इंडस्ट्रीज को 56 की जगह 86 क्विंटल, शिव राइस मिल को डीएमसी ने 49 क्विंटल धान देना तय किया था, दिया गया 85 हजार क्विंटल। श्री कृष्णम को 40 की जगह 65, सोना फूड को 70 की जगह 80, हजार क्विंटल दिया गया है। इसके अलावा कम से कम 15 ऐसे राइस मिलर्स है,जिन्हें उनके तय कोटे से ज्यादा धान दिया गया है।
एडिटर नोट: धान घोटाला हरियाणा का सबसे बड़ा घोटाला है। क्योंकि यह सरकारी फंड में हेरोफरी कर किसानों के हक पर सीधा डाका डाला जा रहा है। द न्यूज इंसाइडर टीम इस घोटाले की तह में गयी है। इसी को लेकर लगातार एक सीरिज चलाई जा रही है।
धान घोटाला 1
https://thenewsinsider1.blogspot.com/2019/10/blog-post.html
धान घोटाला 2
धान घोटाला 3
एडिटर नोट: द न्यूज इंसाइडर जनहित के मुद्दों को उठाने वाला एक पोर्टल है। जिसकी कोशिश है कि मेन स्ट्रिम मीडिया जिन मुद्दों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लेकिन वह जनहित में हैं, उन्हें हम इस प्लेटफार्म से उठाएंगे। यह गैर लाभकारी संस्था द रुट के तत्वाधान में चलाया जा रहा है। पोर्टल को चलाने के लिए हमें आपकी मदद की सख्त जरूरत है। क्योंकि तभी हम बाजार, सरकार और विज्ञापनों के दबाव से बचते हुए स्वतंत्र तौर पर पत्रकारिता करने में सक्ष्म होंगे।
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