धान घोटाला 5 : करतूत अधिकारियों की, किसान रोषजदा सरकार के प्रति
डीएफएससी कुशल बुरा का तबादला क्यों? पहले भी आटा गड़बड़ी कांड के बाद हुआ थी बदली
आटा कांड हो गया था रफादफा, अब मंडियों में धान खरीद को लेकर उठ रहे सवाल
द न्यूज इंसाइडर, चंडीगढ़
डीएफएससी कुशल बुरा का तबादला क्यों हुआ? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि इससे पहले भी उनका तबादला तब हुआ था जब बीएपीएल को दिए जाने वाले फोर्टिफाइड आटे में गड़बड़ी का मामला सामने आया था। हालांकि इस मामले की जांच अभी तक सही तरह से नहीं हुई। इसके बाद अब क्योंकि मंडियों में किसानों का धान पड़ा है, जिसे सरकारी एजेंसी खरीद नहीं रही है। खरीद एजेंसियों का कहना है कि जितना धान खरीदा जाना था खरीद लिया गया। आरोप लग रहे हैं कि मिलर्स और खरीद एजेंसियों के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर धान की फर्जी खरीद दिखा दी है। इस तरह से जो फंड किसानों की पीआर धान खरीद के लिए आया था, इससे कुछ अधिकारियों ने मिलर्स के साथ मिल कर बारीक धान खरीद दी।
यूं समझे इस एमएसपी का सिस्टम
सरकार मोटी धान का एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। इसके पीछे दो कारण होते हैं। एक तो ऐसा कर सरकार किसानों को सपोर्ट करती है। क्योंकि एमएसपी गारंटी है कि यदि किसान का मोटा धान तय मूल्य से कम कीमत पर बाजार में बिकता है तो तय भाव पर सरकार खरीद एजेंसियों के माध्मय से इसे खरीद लेती है। खरीद एजेंसी इस धान का चावल बनवा कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण कर देती है। सरकार मोटा धान खरीदने के लिए एक फंड केंद्र से आता है। स्टेट एजेंसियां सिर्फ इसमें खरीददार की भूमिका निभाती है।
तो गड़बड़ी क्या हुई
अब फंड से खरीदना तो मोटा धान था। अधिकारियों ने मिलर्स के साथ मिल इस फंड से बारीक धान खरीद लिया। यह धान मिलर्स को खुद के पैसे से खरीदना था। ऐसा कर अधिकारियों ने किसानों के साथ जहां धोखाधड़ी की, वहीं सरकारी फंड में हेराफेरी की। पहले चरण में मंडी के गेट पास फर्जी बनवाए गए। इस काम में मार्केट कमेटी के कुछ अधिकारी संलिप्त रहे। इसके बाद फर्जी जे फार्म काटे गए। इसमें सरकारी खरीद दिखा मोटा धान खरीदा गया, लेकिन खरीद हुई बासमती चावल की। इस तरह से सरकारी दस्तावेज में रिकार्ड धान खरीदा गया।
अब किसानों को क्या नुकसान हो रहा है
किसानों का धान अभी खेत में हैं। अब जो धान मंडी में आ रहा है, इसे खरीदा नहीं जा रहा है। खरीद एजेंसियों का तर्क है कि उनके पास फंड नहीं है। अब मंडियों में दूसरा खेल हो रहा है। फर्जी खरीद के जो पर्चे कट गए, वह मिलर्स अब मंडी में आ रहे धान को सस्ते दाम पर खरीदने की कोशिश में जुट गए हैं। क्योंकि उनके पास तो पहले ही पैसा न्यूनतम समर्थन मूल्य का आ गया है। ऐसे में यदि वह अब धान खरीदते है ंतो प्रति क्विंटल सीधी बचत कर लेंगे। इधर किसानों के पास धान को सस्ते दाम पर बेचने के सिवाय कोई चारा नहीं है। क्योंकि इतने धान को व न तो घर पर रख सकता न ही इसे स्टोर कर सकता। उसे पैसा चाहिए, क्योंकि इस पैसे से गेहूं की बिजायी करनी है। इसलिए किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है।करतूत अधिकारियों की, रोष सरकार के प्रति
अब यह सारी गड़बड़ कुछ अधिकारियों ने मिल कर की है। लेकिन किसानों का गुस्सा सरकार के प्रति है। किसान समझ रहे हैं कि सरकार उनका धान जानबूझ खरीद नही रही है। जबकि हकीकत यह है कि धान खरीद के लिए आया फँड तो अधिकारियों ने बारीक धान खरीदने में खर्च कर दिया है। सरकार के स्तर पर दिक्कत यह है कि उन्हें इस खेल की समझ नहीं आ रही है।
दूसरी ओर खाद्य आपूर्ति निदेशालय भी इस खेल को समझ नहीं पा रहा है। विवाद दबाने के लिए डीएफएससी का तबादला तो कर दिया। लेकिन इससे हालात में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि फंड तो बहुत पहले ही खर्च किया जा चूका था।
आटा घोटाला क्या था?
इसी साल मार्च में सरकार पायलेट प्राजेक्ट गरीबों को फोर्टिफाइड आटा दिया जाना था, ताकि उनकी सेहत ठीक रहे, यह पहले ही चरण में यह प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए मामले में विवादों में आए डीएफएससी कुशल बूरा को सस्पेंड कर दिया है। फिर भी अभी न तो आटा मिल संचालक और न ही इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि गड़बड़ी के बाकी जिम्मेदारों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही है। यूथ फॉर चेंज के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि पायलेट प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार होना गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार की कड़ियां खुलनी चाहिए। इसके लिए मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।इसलिए जांच जरूरी है
यह आटा समालखा की एक मिल से आता था। अब सवाल यह है कि समालखा को ही इसका टैंडर क्यों दिया गया? इसकी प्रक्रिया क्या है? इसके साथ ही आटा करनाल खंड में आधे पात्रों को क्यों नहीं मिला। यहीं नहीं इधर डिपो होल्डर से कैसे सभी पात्रों का अंगूठा लगवाया। एक साथ ही डिपो होल्डर ऐसा कैसे कर सकते हैं? इसकी भी जांच होनी चाहिए।
एडिटर नोट: धान घोटाला हरियाणा का सबसे बड़ा घोटाला है। क्योंकि यह सरकारी फंड में हेरोफरी कर किसानों के हक पर सीधा डाका डाला जा रहा है। द न्यूज इंसाइडर टीम इस घोटाले की तह में गयी है। इसी को लेकर लगातार एक सीरिज चलाई जा रही है।
धान घोटाला 1
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धान घोटाला 2
धान घोटाला 3