तो क्या यह मान लिया कांग्रेस में अभी भी सब कुछ ठीक नहीं है




तो क्या यह मान लिया कांग्रेस में अभी भी सब कुछ ठीक नहीं है 

विधायक दल का नेता पर क्यों कांग्रेस में सहमति नहीं बनी, सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर निर्णय सोनिया गांधी पर छोड़ा 


द न्यूज इंसाइडर ब्यूरो, चंडीगढ़ 
एक लंबे समय से कांग्रेस गुटबाजी का शिकार है। लोकसभा की सीट गंवा चुकी कांग्रेस की यह गुटबाजी विधानसभा चुनाव में भी यदाकदा नजर आती रही। इसके बाद भी मतदाता ने कांग्रेस को काफी तवज्जो दी। भले ही कांग्रेस ने यह चुनाव पूरे मन से नहीं लड़ा हो, लेकिन मतदाता इस बार कांग्रेस के साथ खड़ा था। परिणाम कांग्रेस को इस बार 31 सीट मिली। यह अलग बात है कि रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत कई दिग्गज चुनाव हार गए। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे परेशानी वाली बात यह रही कि  प्रदेशाध्यक्ष पद से हटते ही अशोक तंवर बगावती तेवर में आ गया। उन्होंने कांग्रेस की जम कर बगावत की। ऐसा लग रहा है कि इतना कुछ होने के बाद भी कांग्रेस गुटबाजी से उभर नहीं पा रही है। इसका बड़ा उदाहरण आज देखने को मिला। होना तो यह चाहिए था कि एक लाइन का प्रस्ताव पास होता, इसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुन लिया जाता।  हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा एवं सांसद कुमारी सैलजा की अध्यक्षता में  बैठक हुई। इसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके विधायक दल के नेता का चुनाव का निर्णय माननीया कांग्रेस अध्यक्षा  सोनिया गांधी पर छोड़ दिया है। दरअसल कांग्रेस विधायक पार्टी अध्यक्षता का विरोध तो कर नहीं सकते, इसलिए जैसे ही विधायक दल का नेता चुनने का समय आया, उन्होंने यह प्रस्ताव पास कर दिया। बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं हरियाणा में पार्टी मामलों के प्रभारी गुलाम नबी आज़ाद, सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक एवं सांसद  मधु सुदन मिस्त्री विशेष रूप से शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक चौ. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सहित पार्टी के अन्य विधायक बैठक में उपस्थित थे। पर्यवेक्षक श्री मुधु सुदन मिस्त्री ने सभी विधायकों से व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग बातचीत की।

क्यों हुड्डा बनने चाहिए विधायक दल के नेता 

इसकी कई वजह है। भले ही कांग्रेस के दिग्गज माने या न माने, लेकिन हकीकत यह है कि कांग्रेस ने इस बार जो प्रदर्शन किया, इसका श्रेय भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जाता है। उन्हें काम करने के लिए इतना कम समय मिला। हालात उनके विपरीत थे। टिकट वितरण में दिक्कत थी। फिर भी कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया। यह हुड्डा की वजह से संंभव हुआ। दूसरी वजह यह है कि उनमें सत्ता का विरोध करने का जज्बा है। सरकार के खिलाफ वह मुखर तरीके से आवाज उठा सकते हैं। प्रदेश में उनकी पकड़ अच्छी है। इस नाते भी नेता बनने के लिए वह सबसे उपयुक्त है।


क्यों आज ही होना चाहिए था फैसला 
यह इसलिए इससे हुड्डा को मजबूती मिलती। हुड्डा का विरोध करने वालो को एक नसीहत भी मिलती। निश्चित तौर पर इस वक्त हुड्डा को मजबूत करना चाहिए। क्योंकि प्रदेश में जिस तरह से जेजेपी सरकार के साथ है। इनेलो अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। एक ही विपक्षी दल बचा है, और वह है कांग्रेस। कांग्रेसी पांच साल तक कमरो की राजनीति करते रहे। एक बार भी सड़क पर नहीं आए। हुड्डा उन्हें सड़क पर ला सकते हैं।

तो क्या हुड्डा के सिवाय कोई नेता नहीं 
निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है। भाजपा के पांच साल का राज बताता है कि कांग्रेस विरोध के हर मोर्चे पर फेल नजर नहीं आयी है। नेता खुद को मजबूत करने के चक्कर में लगे रहे। इसलिए अशोक तंवर प्रदेश कमेटियां तक नहीं बना पाए। दूसरे नेता भी कहीं भी नजर नहीं आ रहे थे। हालांकि यह बात भी सही है कि हुड्डा भी इस दौरान चुप्पी के खोल में घुसे रहे, लेकिन इसके पीछे यह तर्क दिया जा सकता है कि तब उनके पास पार्टी में कोई पद ही नहीं था। बहरहाल यह कहना कई मायनों में सही ही होगा कि कांग्रेस में फिलहाल कोई ऐसा नेता नजर नहीं आ रहा जो हुड्डा की बराबरी कर सके।

तो हुड्डा बन सकते हैं विधायक दल के नेता 
इसकी संभावना बहुत ज्यादा है। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्षा को पता है कि हुड्डा ही विधानसभा में पार्टी की दमदार उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। इसलिए आज जो प्रस्ताव भेजा गया, वह एक औपचारिकता भर साबित हो सकता है। यहीं वजह है कि बेहतर होता पार्टी  यहीं पर अपने विधायक दल के नेता का चयन कर लेती। इससे यह भी संदेश जाता कि कांग्रेस के नेता अपने कुछ निर्णय तो अपने स्तर पर ले सकते हैं। लेकिन आज की बैठक में एेसा न कर पार्टी  यह चूक कर गयी।





सात से 14 नवंबर तक चलेगा विरोध प्रदर्शन 

कांग्रेस ने निर्णय लियाकि सरकारों की नीतियों के विरोध में 7 से 14 नवम्बर तक एक सप्ताह का रोष प्रदर्शन  किया गया। इस बैठक को  गुलाम नबी आज़ाद, रोष प्रदर्शन कार्यक्रम के लिए नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक डॉ. योगानंद शास्त्री ने भी संबोधित किया।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षा कुमारी सैलजा ने पार्टी के नव-निर्वाचित विधायकों तथा अन्य सभी नेताओं तथा कार्यकत्र्ताओं को एकजुट होकर 7 से 14 नवंबर तक किए जाने वाले जिलावार रोष प्रदर्शनों में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का आह्वान किया।
पूर्व मुख्यमंत्री चौ. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने  कहा कि पार्टी के सभी नेताओं को विधायकों को लोगों की कठिनाईयों से अवगत कराना चाहिए ताकि वे विधान सभा में उचित तौर पर इन मामलों को उठा सकें।
बैठक में 7 से 14 नवंबर तक के रोष प्रदर्शन कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी जिलों के लिए संयोजक नियुक्त किए गए। अंबाला के लिए पूर्व मुख्य संसदीय सचिव श्री राम किशन, भिवानी के लिए पूर्व विधायक श्री सोमवीर सिंह, दादरी के लिए पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सिंह, फरीदाबाद के लिए पूर्व विधायक श्री रघुवीर सिंह तेवतिया को संयोजक नियुक्त किया गया है।
इसी प्रकार फतेहाबाद के लिए पूर्व विधायक  प्रलाह्द सिंह गिल्लांखेड़ा, गुरुग्राम के लिए पूर्व विधायक  सुखबीर कटारिया, झज्जर के लिए विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादियान, जींद के लिए विधायक  सुभाष देशवाल को कन्वीनर बनाया गया है। हिसार के लिए विधायक कुलदीप बिश्रोई, करनाल के लिए  त्रलोचन सिंह, कुरुक्षेत्र के लिए पूर्व विधायक  अशोक अरोड़ा, कैथल के लिए पूर्व विधायक  जय प्रकाश और महेन्द्रगढ़ के लिए विधायक राव दान सिंह संयोजक होंगे।
विधायक चौ. आफताब अहमद, पूर्व उप-मुख्यमंत्री श्री चंद्रमोहन, विधायक  धर्म सिंह छौक्कर, पूर्व विधायक करण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव, विधायक बी.बी. बत्रा, डॉ. के.वी. सिंह, पूर्व स्पीकर श्री कुलदीप शर्मा तथा विधायक बिशन लाल सैनी को क्रमश. नूंह, पंचकूला, पानीपत, पलवल, रेवाड़ी, रोहतक, सिरसा, सोनीपत तथा यमुनानगर के लिए कन्वीनर होंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षा कुमारी सैलजा ने इन सभी संयोजकों से कहा है कि वे अपने-अपने जिले के लिए यथाशीघ्र कमेटी गठित करें ताकि 7 से 14 नवंबर तक के कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से चलाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वे जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करके जिला उपायुक्तों को ज्ञापन भी सौंपे।







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