हवाओं में घुला जहर, खतरे में सेहत, बचाव के लिए रखे सावधानी, नही तो होगी बड़ी परेशानी
हवा हो रही जहरीली, पानीपत में निर्माण कार्य पर रोक, कई उद्योग किए बंद, सीएम सिटी पर एनजीटी मेहरबान
हवाओं में प्रदूषण का जहर घुल गया है। जो सांस से होता हुआ हमारे फेफड़ों में आ रहा है। हालात इतने खतरनाक हो गए कि सड़कों पर पानी छिड़कना पड़ रहा है। इसके बाद भी स्थिति में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। इससे बचने के लिए एनजीटी ने आदेश जारी कर पानीपत में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोयले से चलने वाले उद्योग भी पांच नवंबर तक बंद करने के आदेश जारी किए हैं। जिले की हवा जहरीली हो चुकी है, लोगों का घरों से बाहर निकलना बीमारी को निमंत्रण देने वाला हो गया है, पैदल चलने में दम चढ़ने लगा है, महिला-पुरुष, छोटे बच्चे, बुजर्ग हाफ रहे है। जिसकी तरफ सम्बधित विभागों का कोई ध्यान नहीं है। विभागीय अधिकारी सीधे तौर प्रदूषण का स्तर बढ़ने के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहरा देते है जो उचित नहीं होता। चूंकि प्रदूषण फैलाने में सड़कों पर चल रहा निर्माण कार्य, भवन निर्माण कार्य,शहर के पार्कों से निकला कचरा, दुकानों से निकलने वाले कचरे को आग के हवाले कर देते है। यही नहीं करनाल जिले में चल रहे कई उद्योग ऐसे है, जो अलग-अलग तरीकों से प्रदूषण फैलाने में लगे है।रही सही कसर शहरों में बढा़ती वाहनों भी भीड़ है, जिससे जहरीली धूंआ लगाातर निकलकर हवा में जहर घोल रहा हैं। जिससे शहर की हवा जहरीली हो रही हैं।
क्यों बने यह हालात

इसके लिए बहुत हद तक हम जिम्मेदार है। क्योंकि कट रहे पेड़ों पर हम एक बार भी विरोध नहीं जताते। करनाल में हालात यह है कि एक साल में बीस हजार से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं। यह पेड़ प्रदूषण से हमारी रक्षा करते। लेकिन जब पेड़ कट रहे थे तो हम चुप थे। दूसरी वजह यह है कि हर कोई प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है। इसी का नतीजा है कि स्थिति अब काबू से बाहर हो गयी है।
पानीपत में सख्ती करनाल में नर्मी
हरियाणा स्टेट पॉलूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा पानीपत में चल रहे भवन निर्माण, सड़क निर्माण व काेयले से चलने वाले उद्योगों को 5 नवंबर तक बंद करने के आदेश दे दिए, वहीं करनाल सीएम सिटी होने के चलते प्रदूषण फैलाने की एक प्रकार से आजादी दे दी। जिससे जहां एक ओर एक शहर पर एनजीटी के नियम गंभीरता के साथ लागू होंगे, वहीं दूसरे पास लगते शहर पर नियमों से अछूता रहेगा। जिससे प्रदूषण का स्तर किस कदर कम होगा, ये देखने वाली बात होगी।
सड़कों पर हो रहा पानी का छिड़काव

करनाल में अलग अलग सड़कों पर 12 टैंकर पानी छिड़का जा रहा है। कोशिश यहीं है कि हवा में धूलकण न जाने पाए। इधर जानकारों का कहना है कि यह सब दिखावा भर है। क्योंकि प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
जानिए किस प्रकार की हवा में सांस ले रहे आप
शहर में शनिवार को पीएम टैन का स्तर 254 माईक्रोग्राम रहा जबकि पीएम 2 फाइव 160 माइक्रोग्राम दर्ज किया गया।आकड़ों अनुसार पीएम टैन 100 माइक्रोग्राम तो पीएम टू फाइव 60 माइक्रोग्राम होना चाहिए। लेकिन यहां तो कुछ भी सही नहीं चल रहा। घर से बाहर निकलना ही जोखिमभरा हो गया है। डॉक्टरों की माने तो बहुत जरुरी हो तभी घरों से बाहर निकले, नहीं तो घर में ही बैठे रहे, क्योंकि बाहर शरीर को बीमार करने वाले कण फैले हुए है।
ये होना चाहिए
जब हरियाणा स्टेट पॉलूशन कंट्रोल बोर्ड पानीपत जैसे शहरों में 5 नवंबर तक चल रहे निर्माण कार्य व अन्य गतिविधियों पर रोक लगा सकता है तो करनाल पर क्यों नहीं। करनाल में भी तो 2 सौ से अधिक उद्योग चल रहे है, अनगनित सड़कों का निर्माण चल रहा है, कचरे को आग के हवाले किया जा रहा है। फिर भी करनाल के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की आजादी क्यों दी गई। करनाल की सड़कों पर जो निर्माण कार्य चल रहा है, वहां नियमों की अनदेखी की जा रही है, भवन निर्माण चाहे सरकारी हो या प्राइवेट सब जगह नियमों की अनदेखी की जा रही हैं।
खबर का ये हुआ असरदी न्यूज इंसाइडर द्वारा प्रमुखता से उठाए गए ज्वलशील मुददें को देखते हुए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के एसडीओ ने चल रहे निर्माण कार्य की निगरानी शुरू कर दी और साथ ही नियमों की पालना के आदेश जारी कर दिए। जिसके चलते पीडब्ल्यूडी द्वारा 12 पानी के टैंकरों को सड़कों पर उतार दिया। जो मिट्टी पर पानी डाल रहे है। वहीं नगर निगम द्वारा व कृषि विभाग द्वारा भी टीमों को फील्ड में उतार दिया हैं। जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है। जिसका पता तो आने वाले दिनों में चल पाएगा।




