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 शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं, सामान्य से 3 गुणा बढ़ गया प्रदूषण का स्तर




प्रदूषण की वजह से स्मॉग के हालात बन गए हैं। सांस लेने में भी भारी दिक्कत आ रही है। ऐसे कुछ उपाय है, जिसे अपना कर कुछ हद तक बचा जा सकता है। 



 (प्रदूषण और कोहरे) के कारण अन्य शहर फिर से गैस चैंबर की तरह हैं, आप फिट रहने और स्मॉग के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए क्या कर सकते हैं?




दी न्यूज इनसाइडर ब्यूरो करनाल

शहर की आबो हवा सांस लेने लायक नहीं रही, चूंकि प्रदूषण का स्तर कई गुणा तक बढ़ चुका है। जिसके चलते जिले में धुंध की छटाएं दस्तक देने लगी हैं। बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए किए गए सारे प्रयास लटक गए है। कोई भी विभाग खासकर नगर निगम बढ़ते प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए कोई खास कदम नहीं उठा पाया। जिसके चलते शहरवासियों को जहरीली हवा में सांस लेकर बीमारी को आमंत्रित कर रहे है। नगर निगम के सफाई कर्मचारी व पार्कों में लगे कर्मचारी कचरे को आग के हवाले करने में जुटे है, सड़कों पर सफाई करते वक्त धुल मिट्टी न उड़े, इसे रोकने के लिए पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा। जिससे धुंल मिट्टी उड़कर वातावरण को खतरनाक बना रही हैं। उधर भवन निर्माण व सड़क निर्माण में जुटी पीडब्ल्यूडी द्वारा भी एनजीटी के नियमों की सरेआम उल्घंना की जा रही है। धूल मिट्टी को उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा, न ही नियमों की पालना की जा रही हैं, जब जिम्मेवार विभाग ही नियमों की पालना न करे तो अन्य लोगों का क्या होगा।उधर काफी किसान फसल अवशेषों को आग के हवाले करने में जुटे है, कृषि विभाग के अधिकारी गहरी निद्रा में सोए है, एकाध चालान या केस करवाकर मामले से बचने में जुटे है। जो लोगों की सेहत के खिलवाड़ हैं।

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से मिली जानकारी अनुसार पीएम टू फाइव अपने सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम से बढ़कर 280 माइक्रोग्राम के स्तर तक पहुंच चुका हैं। इसी तरह पीएम टैन 100 माइक्रोग्राम से बढ़कर 280 का आकड़ा पार कर चुका है। जिससे आसानी से पता लगाया जा सकता है कि जिस हवा में शहरवासी सांस ले रहे है, वो कितनी खतरनाक बन चुकी हैं। सरकार ने जिन विभागों को प्रदूषण का स्तर रोकने का जिम्मा सौंपा था। उनके सामने ही शहर धूल मिट्टी, धूंए का चैंबर बन चुका हैं। जिसका असर न केवल अस्थमा के मरीजों पर बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चों पर भी पड़ रहा हैं।



मंड़ियों में उड़ रही धूल

जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ाने में कई कारण है, इनमें से एक कारण करनाल की विभिन्न मंड़ियों में धान की सफाई करते वक्त निकले धूल मिट्टी व गर्दा है। जो यहां वहां पर पड़ा है। हवा के चलते ये गर्दा उड़कर प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहा है। वहीं दूसरी और त्यौहारी सीजन में लोगों द्वारा करोड़ों रुपए के बम पटाखे आग के हवाले कर दिए। जिससे प्रदूषण का स्तर रिकार्ड उंचाई तक पहुंच गया।




अधिकारियों पर हो कार्रवाई

प्रदूषण का स्तर बढ़ना वाक्या में ही हैरानी वाला है, चूंकि अधिकारियों ने दावे किए थे कि वे इस बार प्रदूषण का स्तर नहीं बढ़ने देंगे। बावजूद इसके प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। जिसके लिए सीधे तौर पर सम्बधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी जिम्मेवार है। जिनके खिलाफ एनजीटी नियमों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए ताकि अगले सीजन में अधिकारी-कर्मचारी गंभीरता के साथ प्रदूषण के बढ़ने में जिम्मेवार कारणों को खोजकर उन पर समय रहते लगाम लगा सके। साथ ही सरकार द्वारा जिला प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि प्रदूषण का स्तर न बढ़ सके।



प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के एसडीओ शैलेंद्र अरोड़ा ने बताया कि प्रदूषण का स्तर कुछ बढ़ा हुआ है, लेकिन जल्द ही प्रदूषण का स्तर घटने लगेगा।







क्या कहते है कल्पना चावला राजकीय मैडीकल कॉलेज के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ अभिनव डागर


• जितना हो सके बाहरी गतिविधियों से बचें 



• सुबह और शाम के पीक स्मॉग के दौरान व्यायाम से बचें, यह हवा में उच्च PM2.5 के कारण आपको नुकसान पहुंचा सकता है
• यदि आप काम के लिए अपने घर से बाहर जाने की आवश्यकता है, तो उचित फिट के साथ N95 या बेहतर मास्क का उपयोग करें
• मास्क के साथ आउटडोर व्यायाम न करें, क्योंकि ये मास्क बाहरी व्यायाम के दौरान सहायक नहीं हैं
• प्रदूषित हवा आपकी आंखों, त्वचा, फेफड़े, हृदय, बालों और शरीर के सभी हिस्से को प्रभावित कर सकती है
• फुल स्लीव्स वाले कपड़े, गॉगल्स, फेसमास्क पहनकर जितना हो सके प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क से बचें।
• आप अपने चेहरे, आंखों, शरीर के हिस्सेi को नियमित रूप से साफ पानी से धोएं
• इनडोर पौधों को घर में रखें जो इनडोर हवा को साफ करने में सहायक हों
HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो ज्यादातर समय बच्चों और वृद्धों की तरह इनडोर रहते हैं

• अपने आप को अच्छी तरह से हाइड्रेट करें, अपनी प्यास के बावजूद नियमित अंतराल पर ढेर सारा पानी पिएं
• अपने बच्चों को इनडोर रखें और उन्हें इनडोर गतिविधियों में शामिल करें, उन्हें हाइड्रेटेड रखें और उन्हें अच्छे संतुलन आहार के साथ अच्छी तरह से खिलाएं।
• अपनी नाक से सांस लें क्योंकि सांस लेने के दौरान नाक के बालों से प्राकृतिक फिल्टर और आर्द्रीकरण होता है।
• क्षेत्र को धूल से मुक्त रखने के लिए अपने घर और आस-पास के क्षेत्र में अस्थायी रूप से निर्माण कार्य रोक दें
• पत्तियां, जीवाश्म, कचरा न जलाएं, इससे अधिक कोहरा, धुएं और धुंध पैदा होती है
• वाहन प्रदूषण को कम करके सभी के लिए बेहतर जीवन जीने के लिए परिवहन पूलिंग का उपयोग और प्रोत्साहित करें
• विटामाइन ई, एंटीऑक्सिडेंट और खनिजों में समृद्ध आहार लें
• यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं, तो अपनी दवाओं के साथ नियमित रहें
• अपने फेफड़ों के विशेषज्ञ से संपर्क करें यदि आपको अपने नियमित इनहेलर और दवा के साथ अपने लक्षणों में राहत नहीं मिल रही है
• इनडोर व्यायाम और योग गतिविधियों से खुद को सक्रिय रखें
• वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करें। ऊर्जा संरक्षण, वृक्षारोपण और सार्वजनिक परिवहन उपयोग जैसे पहलुओं को अपनाएं
The news insider

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