बहुत देर कर दी सांसद ने आते आते: पहुँचे तो खाली हाथ, न योजना न रोजगार
जीत के पांच माह बाद पहली बार अधिकारियों का परिचय लेने पहुंचे सांसद। मिलने की यदि यहीं रफ्तार रही तो कैसे होगा लोकसभा क्षेत्र का विकास
द न्यूज इंसाइडर ब्यूरो, करनाल
आखिरकार करनाल के सांसद लोकसभा चुनाव के बाद आज वीरवार को यहां पहुंचे। यहां उन्होंने अधिकारियों की बैठक की। कुछ प्लान बताए और जो विकास की योजनाएं चल रही थी इसका जायजा लिया। लोकसभा चुनाव से पहले सांसद जहां दावा करते थे कि वह यहां अपना कार्यालय बनाएंगे, लेकिन आज उन्होंने इससे स्पष्ट इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि कैंप कार्यालय में उनका प्रतिनिधि बैठता है। लोग अपनी समस्याओं को लेकर वहां उनसे मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पानीपत में उनका निवास है। वहां भी लोग किसी भी वक्त आ सकते हैं।
मतदाता हुए मायूस
सांसद के इस रवैये से यहां के मतदाताओं को खासी निराशा मिली है। क्योंकि भले ही यहां सांसद बाहर के लोग जीतते रहे हो, लेकिन वह अपना निवास यहीं रखते थे। वह चाहे अरविंद शर्मा हो या फिर अश्वनी चौपड़ा। लेकिन भाटिया ने इससे साफ इंकार कर दिया कि वह यहां बैठने जा रहे हैं। इससे लोग मायूस है। सांसद लंबे समय बाद पहली बार यहां आए हैं, इसलिए लोगों को उम्मीद थी कि वह कोई बड़ी योजना लेकर आएंगे। लेकिन एेसा कुछ भी उन्होंने बोला नहीं है।
योजनाओं की समीक्षा करने आए थे
सांसद संजय भाटिया ने बताया कि आज केंद्र द्वारा लागू की गई 30 योजनाओ के बारे प्रशासन से डिस्कस करने आया हूं। हर चीज बारे मंथन किया जाएगा कि क्या किया है।और क्या करना है और योजनाओं को पूरा करने के लिए जनता को साथ जोड़ा जाएगा ।आज जरूरत है तो केवल एमलॉयमैंट ,हेल्थ और शिक्षा की उसमे काम करने की जरूरत है ।आज हॉस्पिटल में गरीब को ईलाज नहीं मिलता इसके लिए मेरी मंशा है कि रिटारिर्ड डाक्टरों को भरती कर मोबाईल हॉस्पिटल चलाए जाएं मै सांसद फंड से मोबाईल हॉस्पिटल बनाने में मदद करूंगा ।
बोले, डीसी रेट पर नोकरी की होनी चाहिए समीक्षा
संजय भाटिया को करनाल लोकसभा सीट पर रिकार्ड6 लाख 54 हजार 269 मतों से जीत मिली थी। लेकिन जा सांसद इसके बाद मतदाता के प्रति उदासीन हो गए। नाराज मतदाता ने विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ मतदान कर गुस्से का इजहार भी कर दिया। इस बार पार्टी ने निलोखड़ी और असंध सीट गंवा दी, वहीं इंद्री सीट पर हारते हारते जीत मिली है।

