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धान घोटाला 9 : समीर यदि वाट्सअप डीपी के मुताबिक काम कर लेता तो शायद मिलर्स को न देता तय कोटे से ज्यादा धान 

           मंडियों में इंस्पेक्टर लगने के लिए खूब लगती है तिगड़म, दी जाती है मोटी रकम                   लाखों में होता है मंडी का सौदा, फर्जी खरीद दिखा की जाती है काली कमायी 
द इंसाइडर न्यूज रिसर्च टीम, चंडीगढ़ 

करनाल अनाज मंडी में धान खरीद सीजन में कार्यरत इंस्पेक्टर समीर की वाट्सअप डीपी लगी है, इसमें एक छोटी बच्ची सात फुट लंबी लाठी पर पेट के बल लटकी हुई है। लाठी का बैलेंस उसका पिता बना रहा है। डीपी पर अंग्रेजी में लिखा है The distance between this father & his daughter  is HUNGER.Think before you waste FOOD इसका हिंदी में मतलब है कि इस बच्ची और पिता के बीच का जो अंतर है, वह भूख है, खाना वेस्ट करने से पहले यह सोचिए। बहुत सही बात समीर ने अपनी डीली पर लिखी है, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि एक इंस्पेक्टर जो इस तरह की डीपी लगा रहा है, वह कैसे गरीबों का निवाला छीन सकता है। करनाल मंडी में ऐसा हुआ। फर्जी खरीद के पर्चे काटने कुछ रुपयों का भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि यह गरीबों के निवाले पर सीधा सीधा डाका है। क्योंकि फर्जी पर्चा कटवाने वाले ज्यादातर मिलर्स बिहार और यूपी से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बांटे जाने वाले चावल को सस्ते दाम पर खरीद कर दोबारा से एफसीआई के गोदाम में भेज देता है। यह सस्ता चावल मंदारी की इस बच्ची जैसे लाखों बच्चों का निवाला भी है। जिसे थोड़े से रुपयों के लालच में यूं लाठी पर उलटा लटकने पर भ्रष्ट सिस्टम मजबूर कर रहा है।



मंडियों में खरीद सीजन में इंस्पेक्टर लगने के लिए देने पड़ती है रकम 

द इंसाडर न्यूज रिसर्च टीम ने पाया कि इंस्पेक्टर मंडियों में लगने के लिए मोटी रकम देते हैं। यह रकम उन अधिकारियों तक जाती है जो नियुक्ति करने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। सीट लेने के लिए मोटी बोली लगती है, जो इंस्पेक्टर जितने ज्यादा रकम देता है, उसकी नियुक्ति मनचाही मंडी में कर दी जाती है। उसे वहां पूरी मनमानी करने की छूट होती है। यहीं वजह है कि ऐसे इंस्पेक्टरों की फसल खरीद प्रक्रिया की जांच भी नहीं होती। इस तथ्य को  इन्हें नियुक्त करने वाले अधिकारी भी जानते हैं कि यहीं वजह है कि उन्हें हर स्तर पर बचाया जाता है।



विधानसभा में आश्वासन के बाद भी पीवी से बच रही सरकार


यूथ फाॅर चेंज के अध्यक्ष राकेश ढुल ने बताया कि विधानसभा में उपमुख्य मंत्री ने आश्वासन दिया था कि मिलर्स की पीवी होगी, लेकिन अभी तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। आखिर क्यों? जबकि सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। एडवोकेट ढुल ने बताया कि मंडियां किसान और गरीब आदमी को लूटने का केंद्र बनती जा रही है, क्योंकि मंडी सिस्टम और खाद्य आपूर्ति विभाग के कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार में गहरे तक लिप्त हो गए हैं। यहीं वजह है कि इस बार किसानों को धान का वाजिब दाम तक नहीं मिला है। एडवोकेट ढुल ने बताया कि इस बाबत सीएम और उपमुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है। यदि इस पर भी कार्यवाही नहीं होती तो इस मामले को लेकर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में डाली जाएगी। क्योंकि इसके सिवाय अब कोई चारा नजर नहीं आ रहा है।





ए डिटर  नोट: धान घोटाला हरियाणा का सबसे बड़ा घोटाला है। क्योंकि यह सरकारी फंड में हेरोफरी कर किसानों के हक पर सीधा डाका डाला जा रहा है। द न्यूज इंसाइडर टीम इस घोटाले की तह में गयी है। इसी को लेकर लगातार एक सीरिज चलाई जा रही है।


धान घोटाला 1
https://thenewsinsider1.blogspot.com/2019/10/blog-post.html


धान घोटाला 2 



धान घोटाला 3 


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