गुमनाम वकील की चिट्ठी नेकिया “गैंग ऑफ ग्रेन” का पर्दाफास

 हरियाणा की अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद में अभी तक 200 करोड़ रूपए के घोटाला आया सामने

यह घोटाला सिर्फ करनाल और यमुनानगर की मंडियों में सामने आया है, प्रदेश की यदि सभी मंडियों की जांच हो तो बड़ा घोटाला सकता है सामने 

 







शायद किसी को भी पता भी नहीं चल पाता कि हरियाणा की मंडियों में एक गैंग आपरेट हो रहा है। जो धान की फर्जी सरकारी खरीद दिखा कर किसारों के हिस्से के एमएसपी पर डाका डाल रहा है। यमुनानगर और करनाल में  एक दो नहीं पूरे 200 करोड़ का घोटाला सामने भी आ चुका है। 


बस एक चिट्टी। और कई सफेदपोश बेनकाब हो गए। अगर यह चिट्ठी न होती तो शायद इस घोटाले का किसी को पता भी नहीं न चलता। ऐसा भी नहीं है कि चिट्ठी मिलते ही सब कार्यवाही हो गयी। 


वक्त लगा। लेकिन कुछ मिल संचालक व घोटाले में शामिल सरकारी कर्मचारियों को पुलिस ने पकड़ा। असंध में राधे राधे मिल के संचालक 

सुनील कुमार (गिरफ्तार)

शीशपाल (गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया)

तरसेम (फरार)

 करनाल मंडी में फर्जी गेट पास काटकर हुई अनियमितताओं के मामले में पुलिस ने दो प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर—अंकित और अंकुश—को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मंडी के पूर्व सुपरवाइजर पंकज तुली को भी सीआईए-2 की टीम पकड़ चुकी है। इस तरह मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।


लेकिन इस घोटाले की मास्टर माइंड करनाल मंडी सचिव आशा रानी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से आजाद है। वह जमानत के लिए हाथ पाव मार रही है। 


उसे अभी तक जमानत तो नहीं मिली। लेकिन उसके उंचे संपर्कों को अंदाजा इस बात से लग सकता है कि एफआईआर दर्ज होने के कई दिन बाद 15 नवंबर को उसे सस्पेंड किया गया। 


इससे पहले विभाग के कुछ आला अधिकारी व कुछ नेता उसे बचाने की लगातार कोशिश करते रहे। 

तो क्या यह मान लिया जाए कि करना में मंडी सचिव आशा रानी इस घोटाले की किंगपिन है। शायद यह मानना सही नहीं होगा। उसके पीछे कोई और ताकत भी है, क्योंकि यदि ऐसा न होता तो अाशा रानी को लेकर मंडी बोर्ड की इतनी फजीहत न होती। 


सरकारी विभागों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार करनाल व यमुनानगर में यह घोटाला ₹200 करोड़ से अधिक का हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो जांच निष्पक्ष और व्यापक हुई तो यह हरियाणा का अब तक का सबसे बड़ा खाद्यान्न घोटाला साबित हो सकता है। एक दो नहीं प्रदेश की ज्यादातर मंडियों में इस घोटाले को अंजाम दिया गया है। 

 घोटाले का पहला चेहरा 

 — करनाल का 125 करोड़ का फर्जी खेल

करनाल की अनाज मंडी में सरकारी खरीद के नाम पर फर्जीवाड़े का नेटवर्क और भी संगठित मिला।

मंडी सचिव आशा रानी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

सीआईए टू ने एक ऐसे आरोपी को पकड़ा जो मंडी से बाहर ही फर्जी गेट पास कटवा देता था

दो प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार—जो पोर्टल पर धान के एंट्री और गेट पास में हेराफेरी कर रहे थे

यह घोटाला अकेले करनाल में ₹125 करोड़ का बताया जा रहा है।

घोटाले का दूसरा सिरा

 — यमुनानगर में 75 करोड़ का फर्जीवाड़ा

यमुनानगर में जांच के दौरान पता चला कि 6 राइस मिलों को जो धान आवंटित दिखाया गया था, उसका 80% धान मौके पर मिला ही नहीं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दो मिलों में:

कागज़ों में 300 ट्रक धान दाखिल

मिल में स्टॉक—शून्य

यानी कागज़ पर धान चलता रहा, पोर्टल पर धान बढ़ता रहा, भुगतान निकलता रहा—लेकिन असलियत में एक दाना भी मौजूद नहीं था।

इस मामले में कई मिल मालिकों पर FIR, और कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई चल रही है।


सबसे बड़ा विरोधाभास — जब फसल न थी तो 4.68 लाख टन अतिरिक्त धान कहां से आया?

इस वर्ष किसानों ने कहा:

बीज खराब था

फसल बुरी तरह प्रभावित हुई

कई किसानों ने फसल खेत में ही बुहाई कर दी

बरसात ने कई इलाकों में धान को पूरी तरह नष्ट कर दिया

इसके बावजूद सरकारी आंकड़ा:

लक्ष्य: 54 लाख टन

असल खरीद: 58.70 लाख टन

यानि 4.68 लाख टन धान ज्यादा!

जमीन पर फसल नहीं थी…

लेकिन कागज़ों पर फसल लहलहा रही थी।

यही “गैंग ऑफ ग्रेन” का असली खेल है।


फर्जीवाड़े का पूरा मॉडल — “धान नहीं, डेटा चलता है” नेटवर्क

इस महाघोटाले को समझने के लिए इसके चरणों को समझना जरूरी है:


1️⃣ पोर्टल पर फर्जी रकबा बढ़ाया गया

अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से किसानों का रकबा बढ़ाया गया।

जमीन पर फसल चाहे न हो, कागज़ों में जितना चाहो उतना धान उगा दो—कोई रोक नहीं।


2️⃣ फर्जी किसान और फर्जी गेट पास

मंडी में गेट पास पहला सरकारी दस्तावेज होता है।

यही सबसे बड़ा हथियार बनाया गया:

फर्जी किसानों के नाम से गेट पास

फर्जी धान की एंट्री

मिलों को धान का आवंटन

जबकि मंडी में धान आया ही नहीं

सिस्टम बोलेगा—धान आया।

जमीन बोलेगी—कुछ नहीं आया।


3️⃣ आढ़ती की कमाई—“बोरी नहीं, बिल चलता है”

आढ़तियों ने भी इसमें पूरा हिस्सा लिया।

उतराई

भराई

मजदूरी

छंटाई

कमीशन

सब कुछ बिल में दिखाया गया,

मगर मंडी में हाथ लगाने को बोरी भी नहीं।


4️⃣ ट्रक और परिवहन की फर्जी कहानी

यह घोटाले का सबसे बड़ा अदृश्य हिस्सा है।

ट्रक नंबर फर्जी

किलोमीटर फर्जी

बिल फर्जी

यहां तक कि कई जगह

कार और बाइक के नंबरों को भी ट्रक बनाकर दिखा दिया गया।


5️⃣ आखिर में—मिल में धान गायब

मंडियां फर्जी, ट्रक फर्जी—तो मिल तक पहुंचने वाला धान भी फर्जी।

जांच में:

गोदाम खाली

बोरियां गायब

कागज़ों में स्टॉक पूरा

यमुनानगर की दो मिलों में यही स्थिति पाई गई।


घोटाले की जड़ें और गहरी—कैथल, कुरुक्षेत्र और चीका मंडी केंद्र में

कैथल और कुरुक्षेत्र में कई वर्षों से सरकारी खरीद में गड़बड़ी की शिकायतें आती रही हैं।

विशेषकर चीका मंडी को इस खेल का "पुराना केंद्र" माना जाता है।

परन्तु वहां अभी तक बड़े स्तर की जांच शुरू नहीं हुई।

विभागीय सूत्रों की मानें तो इन जिलों में घोटाले की राशि करनाल और यमुनानगर से भी अधिक हो सकती है।


समाज पर इस घोटाले के दुष्प्रभाव — केवल धन की लूट नहीं, यह व्यवस्था का विनाश है

1. किसानों का हक छिना

MSP किसानों के लिए है, लेकिन इस बार फर्जी किसानों, मिल मालिकों और आढ़तियों ने यह पैसा हड़प लिया।

असली किसान फिर उसी गरीबी और कर्ज में फंसा रहा।


2. सरकारी खजाने का नुकसान — जनता पर बोझ

जो पैसा किसानों की मदद, सिंचाई, विकास और ग्रामीण योजनाओं पर लगना चाहिए था, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

अंत में यह बोझ जनता पर ही टैक्स के रूप में वापस आता है।


3. सिस्टम पर अविश्वास बढ़ा

जब पोर्टल, मंडी, मिल और अधिकारी—सभी मिलकर फर्जीवाड़ा करें, तो जनता का सरकारी व्यवस्थाओं पर विश्वास खत्म हो जाता है।


4. ईमानदार अधिकारियों और किसानों को हानि

जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं, वे पीछे रह जाते हैं।

भ्रष्ट तंत्र उनका रास्ता रोक देता है।


5. खाद्यान्न सुरक्षा पर खतरा

कागज़ पर धान तो दिखा दिया,

लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में जब असल धान चाहिए होगा,

तो कमी पाई जाएगी।

यह सीधा असर गरीबों को मिलने वाले राशन पर पड़ेगा।


निष्कर्ष — “गैंग ऑफ ग्रेन” सिर्फ घोटाला नहीं, यह सिस्टम का एक्स-रे है

यह महाघोटाला हरियाणा की सरकारी खरीद प्रणाली की उन कमजोरियों को उजागर करता है, जहां:

डेटा असली धान से ज्यादा ताकतवर है

अधिकारी जवाबदेही से दूर

पोर्टल पारदर्शिता के बावजूद भ्रष्टाचार बरकरार

और “जमीन पर फसल नहीं—कागज़ पर फसल तैयार” है

यदि इस बार जांच ईमानदारी से आगे बढ़ी,

तो यह घोटाला हरियाणा की राजनीति, प्रशासन और मंडी प्रणाली में बड़े बदलाव का कारण बन सकता है। 


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