करनाल मंडी सचिव आशा रानी फिलहाल ‘सेफ जोन’ में नो एक्शन ऑनली प्रोटेक्शन

 करनाल मंडी गेट पास घोटाला: मंडी सचिव आशा रानी को बचाने वाली अदृश्य ताकत कौन?”

मनोज ठाकुर | करनाल से


करनाल की मंडी में धान खरीद को लेकर हड़कंप मचा है — 125 करोड़ रुपये के फर्जी गेट पास कांड ने पूरे खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को हिला दिया है। चार इंस्पेक्टर, एक मिलर और मंडी बोर्ड के तीन कर्मचारी एफआईआर की जद में आ चुके हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस गड़बड़ी की मुख्य जिम्मेदार मंडी सचिव आशा रानी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

सवाल वही उठ रहा है — आखिर वह कौन सी अदृश्य शक्ति है जो इस घोटाले की ‘किंगपिन’ को अब तक बचा रही है?


1️⃣ घोटाले का जाल: कैसे काटे गए फर्जी गेट पास

करनाल की सरकारी मंडियों में इस साल धान खरीद के दौरान धांधली की कहानी किसी स्क्रिप्ट से कम नहीं।

सिस्टम में दर्ज रिकॉर्ड बताता है कि मंडी से हजारों क्विंटल धान का फर्जी गेट पास काटा गया — यानी कागजों में धान मंडी से मिलों तक पहुंचा, लेकिन वास्तव में वह धान कहीं था ही नहीं।

भौतिक सत्यापन (PV) में खुलासा हुआ कि मिलों में 12,659 क्विंटल धान गायब है।

अनुमानित नुकसान: ₹3.54 करोड़ सिर्फ एक जांच में।

और सूत्र बताते हैं — यही तो सिरा है। पूरा घोटाला ₹125 करोड़ तक फैला हुआ है।

इस गड़बड़ी की जिम्मेदारी मंडी सचिव की होती है, क्योंकि गेट पास जारी करने की अंतिम अनुमति उन्हीं के अधीन है।

फिर भी अब तक कोई पूछताछ नहीं। कोई नोटिस नहीं। कोई सस्पेंशन नहीं।


सियासी संपर्कों का सहारा लेकर उन्होंने खुद को ‘सेफ जोन’ में रखने की कोशिश शुरू कर दी है।




खाद्य आपूर्ति विभाग की कार्यवाही

करनाल की चार मंडियों के इंस्पेक्टरों — समीर, रणबीर, रामफल और अन्य पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि ये अधिकारी फर्जी गेट पास बनने के बाद की प्रक्रिया में शामिल थे।
यानी गड़बड़ी का बीज कहीं और था — वहीं, जहां गेट पास की मंजूरी दी जाती है।


4️⃣ विवादों से पुराना नाता

यह पहला मौका नहीं जब आशा रानी का नाम विवाद में आया हो।

पानीपत में उनके कार्यकाल के दौरान आढ़तियों ने उन पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए थे।

वहां भी जांच शुरू हुई, लेकिन नतीजा वही — फाइल ठंडी पड़ गई।

करनाल में भी वह पहले एक बार सस्पेंड हो चुकी हैं, लेकिन कुछ महीनों में ही बहाल कर दी गईं।

अब वही अधिकारी फिर उसी पद पर हैं, और वही गड़बड़ी दोबारा सामने आ रही है।



यह ‘अदृश्य शक्ति’ कौन है — यह तो आने वाला वक्त बताएगा,

लेकिन इस बचाव की रणनीति ने पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


6️⃣ जनता के पैसे से खिलवाड़, किसानों का विश्वास टूटा

125 करोड़ रुपये का यह घोटाला सिर्फ सरकारी खजाने का नुकसान नहीं,
बल्कि किसानों के विश्वास पर सीधा वार है।
यहां तो धान “डेटा” में बेचा गया, जमीन पर नहीं।

एक किसान नेता ने कहा —

“अगर सचिव और उच्च अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार आगे भी चलता रहेगा। अब तो यह गेट पास नहीं, ‘करप्शन पास’ बन चुका है।”


7️⃣ चुप विभाग, जागता करनाल

विभाग की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है।
एक तरफ एफआईआर दर्ज करने की खबरें मीडिया में सुर्खियां बन रही हैं,
दूसरी तरफ सचिव स्तर पर ‘नो एक्शन, ओनली प्रोटेक्शन’ की नीति चल रही है।

करनाल में व्यापारी, किसान और कर्मचारी — सभी एक ही सवाल पूछ रहे हैं:

“अगर इंस्पेक्टर दोषी हैं, तो गेट पास साइन करने वाली अधिकारी निर्दोष कैसे?”


8️⃣ कब टूटेगा यह सियासी कवच?

यह पूरा मामला सिर्फ विभागीय भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सिस्टम में सियासत की गहराई को भी उजागर करता है।
आशा रानी जैसी अधिकारी पर लगातार आरोप लगते रहे, पर कार्रवाई कभी नहीं हुई।
यह बताता है कि सिस्टम के अंदर कितनी परतें हैं — जो सच्चाई को दबाने में लगी हैं।

अब जनता की निगाहें सरकार और विजिलेंस पर हैं।
क्या मंडी सचिव पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह केस भी “फाइलों के कब्रिस्तान” में दफन हो जाएगा?



The news insider

"ताज़ा ख़बरें, सही जानकारी और हर अपडेट सबसे पहले आपके पास। यहाँ पढ़ें देश-विदेश, राजनीति, खेल, मनोरंजन और टेक्नोलॉजी से जुड़ी हर बड़ी और छोटी खबर – आसान भाषा में, बिना किसी झंझट। हमारा लक्ष्य है – आपको हर पल से जोड़ना, बिल्कुल भरोसेमंद तरीक़े से।"

एक टिप्पणी भेजें

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

और नया पुराने