गुमनाम चिट्ठी से रामरहीम जेल जा सकता है, फिर धान घोटाले पर ऐसी चिट्ठी से मिलर्स की जांच पर एमएलए जगमोहनन को दिक्कत क्या


घोटाले पर कांग्रेस की रस्म अदायगी बयानबाजी, करनाल में कांग्रेस के पॉलिटिक्स पर्यटक दिवांशु बुद्धिराजा घोटाले पर आवाज उठाना तो दूर, दो शब्द तब बोलने के लिए यहां मौजूद नहीं है।

करनाल

क्या धान की सरकारी खरीद करने वाले मिलर्स को दिक्कत आ रही है। और यदि दिक्कत आ रही है तो क्या? क्या धान खरीद में करनाल में घोटाला नहीं हुआ।.. और क्या करनाल में भाजपा विधायक जगमोहन आनंद नहीं मानते कि फर्जी पर्चे काट कर फर्जी धान खरीद नहीं हुई।



वह भी तब जब खाद्य आपूर्ति विभाग के डीएफएससी अनिल कुमार ने अपने ही विभाग के इंस्पेक्टर समीर समेत चार पर एफआईआर दर्ज करा दी है। मंडी बोर्ड में सतबीर समेत तीन कर्मचारी सस्पेंशन झेल रहे हैं। तो इस कार्यवाही के मायने क्या? क्यों यह कार्यवाही हुई। विधायक जगमोहन यदि सही है तो फिर अनिल कुमार ने जो एफआईआर दर्ज करायी वह गलत मानी जानी चाहिए। मंडी बोर्ड के रिकार्डर सतबीर समेत तीन का सस्पेंशन भी गलत ही माना जाना चाहिए।


लेकिन अफसोस यह है कि विधायक को या तो सही जानकारी नहीं है, या फिर वह चूक कर बैठे हैं। ऐसी चुक, जिससे वह खुद विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं।

विधायक जगमोहन आनंद ने चूक यह कर दी कि वह मिलर्स के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ सीएम से मिलने गए। इतना ही नहीं उन्होंने उस पत्र को भी गलत ठहरा दिया, जिस पत्र में करनाल मंडी में फर्जी वाड़े की शिकायत दी थी।




विधायक का दावा है कि इस पत्र में शिकायतकर्ता का पता ही नहीं है। इसलिए यह फेक शिकायत है। हो , सकता है, विधायक सही बोल रहे हो। लेकिन विधायक यह भूल गए कि इसी तरह की एक गुमनाम शिकायत पर डेरा सच्चा सोदा के संचालक रामरहीम को भारत के कानून के इतिहास में अलग तरह की सजा मिली हुई है। जिस पर रामरहीम जेल में हैं।


अगर उस पत्र पर संज्ञान लेकर जांच हो सकती है तो फिर मंडी बोर्ड में भ्रष्टाचार पर जो पत्र लिखा गया इसमें दिक्कत क्या है? इसकी जांच से डर किसे हैं? लाख टके का सवाल यह है कि क्या विधायक को अपनी ही सरकार के जांच सिस्टम पर भरोसा नहीं है?


मिलर्स को क्या दिक्कत आयी कि विधायक उन्हें लेकर चंडीगढ़ पहुंच गए हैं। अभी तो 125 करोड़ के घोटाले पर जांच पहले ही चरण में हैं। कुछ ही मिलर्स की फिजिकल वैरिफिकेश हुई है।

जिसमें कई मिल में भारी गड़बड़ी मिली है। तारीफ करनी होगी, करनाल डीसी उत्तम कुमार और एडीसी की। जिन्होंने इतना बड़ा जोखिम उठा कर भ्रष्टाचार को उजागर तो किया।

हालांकि अभी भ्रष्टाचार की बहुत छोटी मछलियां ही कानून के जाल में फंसी है,मगरमच्छ तो बाकी है।


चंडीगढ़ में हुई मीटिंग – व्यापारियों को राहत, लेकिन भ्रष्टाचार पर सन्नाटा

शनिवार को चंडीगढ़ स्थित संत कबीर कुटीर में करनाल राइस मिलर्स एसोसिएशन और आढ़ती एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिला। व्यापारियों ने शिकायत की कि धान की चेकिंग के नाम पर विभाग उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा है। मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए अपने प्रधान सचिव अरुण गुप्ता (IAS) और अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. साकेत कुमार (IAS) को निर्देश दिए कि—

✅ किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
✅ व्यापारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
✅ चेकिंग के नाम पर किसी को परेशान न किया जाए।

यह निर्देश व्यापार जगत के लिए राहत भरे जरूर हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब व्यापारियों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी अब तक क्यों बचाए जा रहे हैं?


धान खरीद घोटाले पर आखिरकार स्थानीय कांग्रेस भी नींद से जागी है। पार्टी के जिला प्रधान पराग गाबा ने अपने साथियों के साथ एक पत्रकार वार्ता कर आरोप जड़े। लेकिन पता है, कांग्रेसी बोलेंगे करेंगे कुछ नहीं। इसलिए कांग्रेस के इस बयान को ज्यादा तवज्जो नहीं मिल रही है। यूं भी धान बिक्री के दौरान मंडियों में जब किसान मारे मारे घूम रहे थे तो कांग्रेसी मंडियों में जाने की बजाय ड्राइंगरूम राजनीति करने में व्यस्त थे।




कांग्रेस के टिकट पर करनाल लोकसभा से चुनाव लड़ने वाले पार्टी के पोल्टिकल पर्यटक दिवांशु बुद्धीराजा लंबे समय से अज्ञातवाश

है। पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं के इस रवैये से आम आदमी को अब कांग्रेस से ज्यादा उम्मीद भी नहीं है।

कांग्रेस की इस रस्मअदायगी के कार्यक्रम में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी करनाल पहुंच कर धान घोटाले पर बोल कर निकल गए। उनके आरोपों में नयापन नहीं बल्कि वहीं घिसेपीटे आरोप रहे।



कांग्रेस ने आवाज उठायी कि 6, 15, 16 और 18 अक्टूबर को काटे गए गेट पास की जांच की जाए तो घोटाला साफ हो सकताा है।



🏛 विपक्ष का वार: “सत्ता की शह पर चल रहा है गबन”

करनाल पहुंचे नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा —

“धान घोटाले की जांच करनाल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि यह भ्रष्टाचार पूरे हरियाणा में फैला हुआ है।”

हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार पिक एंड चूज नीति पर काम कर रही है। “छोटे कर्मचारियों पर एफआईआर, और असली दोषी — जिनकी राइस मिलों में नेताओं की साझेदारी है — आज भी खुले घूम रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल में फर्जी डेटा अपलोड करके रिकॉर्ड में उत्पादन ज्यादा दिखाया गया ताकि फर्जी गेट पासों को कवर किया जा सके।

हुड्डा ने तंज कसा —

“अगर सब कुछ पोर्टल ही करेगा तो मुख्यमंत्री और मंत्री किसलिए हैं? यहां तो भ्रष्टाचार पोर्टल के जरिए भी वैध बना दिया गया है।”



🚜 किसान बोले – “सरकार की शह पर चल रही थी लूट”

करनाल में दीनबंधू छोटूराम किसान भवन में आयोजित पंचायत में
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा —

“यह कोई साधारण घोटाला नहीं, बल्कि किसानों के नाम पर सरकारी तंत्र द्वारा की गई खुली लूट है। अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई मंत्रियों और अफसरों की कुर्सी हिल जाएगी।”

किसानों ने सरकार पर आरोप लगाया कि जांच केवल औपचारिकता है, ताकि असली दोषी — यानी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त राइस मिल मालिक — बच सकें। उन्होंने 48 घंटे में गिरफ्तारी की चेतावनी दी है।



⚖️ विधायक जगमोहन आनंद की सफाई, पर कांग्रेस का पलटवार

स्थानीय विधायक जगमोहन आनंद ने सफाई दी कि “उनकी कोई राइस मिल नहीं, कोई आढ़त की दुकान नहीं।”
उन्होंने कहा — “बेनामी चिट्ठियों से कुछ नहीं होता। अगर कोई दोषी है, तो कानून अपना काम करेगा।”

लेकिन कांग्रेस का पलटवार है कि जब शिकायत में नाम आने लगे, तो सत्ता पक्ष सफाई देने लगा। कांग्रेस जिला अध्यक्ष पराग गाबा ने कहा —

“अगर सरकार निर्दोष है तो वह हाईकोर्ट से जांच करवाने से क्यों डर रही है?”



🔎 क्या कार्रवाई होगी या फाइलों में दफन होगा सच?

कांग्रेस इस मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में ले जाने का दावा कर रही है। हालांकि पार्टी की ओर से ऐसे मामलों में इस तरह के दावे पहले भी होते रहे हैं। लेकिन इन्हें अमली जामा नहीं पहनाया गया है। देखना होगा कि क्या इस बार कांग्रेस के बयानवीर की छवि से बाहर निकल कर हकीकत में कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।




द न्यूज इनसाइटर से इस मसले को प्रमुखता से उठाया है। इस वजह से खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर समीर समेत तीन पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। मंडी बोर्ड का आक्शर्नर सतबीर समेत तीन सस्पेड भी हो गए। लेकिन यह बड़ी कार्यवाही नहीं है। मामले के मुख्य सुत्रधारों को बचाने की कोशिश हो रही है। पीवी के दौरान जिन मिल में धान कम मिली है, उनके खिलाफ ठोस कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी।

अब जिस तरह से विधायक मिलर्स के साथ सीएम से मिल रहे हैं तो क्या यह प्रशासन की सख्त कार्यवाही को कम करने की एक कोशिश तो नहीं है। यह सवाल भी करनाल में उठ रहा है। क्योंकि यदि ऐसा नहीं है तो फिर आखिर ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी थी कि विधायक मिलर्स को सीएम से मिलवाने पहुंच जाए। बहरहाल इस पूरे प्रकरण में विधायक ने जिस तरह से भूमिका निभाई,इससे वह विवादों में आ गए हैं। ऐसे विवाद जिसका भूत उनके कंधे पर काफी समय तक चिपका रह सकता है। वह भी तब जब बार बार मंडी सचिव आशा रानी की जिम्मेदारी तय करने की बात हो रही है। लेकिन वह किसी भी तरह की कार्यवारी से पूरी तरह से बची हुई है। अब इसके पीछे वजह क्या? जनता सब जानती है।

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