करनाल धान घोटाला, मिल संचालक- 4 इंस्पेक्टरों पर FIR:3.54 करोड़ का गबन, 12,659 क्विंटल धान कम पाया गया
करनाल धान घोटाला: सिस्टम की साजिश या मिलर-इंस्पेक्टर गठजोड़? 3.54 करोड़ का सरकारी धान गायब, 12,659 क्विंटल का कोई पता नहीं
भौतिक जांच में खुला बड़ा खेल – मिलिंग रिकॉर्ड और स्टॉक में भारी अंतर, फर्जी शपथ पत्र से विभाग को गुमराह करने का आरोप; चार मंडियों के इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से हुआ सरकारी धान का गबन
करनाल जिले में धान मिलिंग सीजन के बीच एक ऐसा घोटाला सामने आया है जिसने पूरे मंडी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सलारू रोड स्थित “मैसर्ज बटान फूड्स राइस मिल” को सरकार की तरफ से धान अलॉट हुई, लेकिन भौतिक जांच में पाया गया कि 12,659 क्विंटल धान यानी करीब 3.54 करोड़ रुपये का सरकारी स्टॉक गायब है।
अब सवाल यह नहीं है कि धान कहां गया — बल्कि यह कि इतने बड़े स्तर पर सिस्टम की निगरानी के बावजूद इतना बड़ा घोटाला कैसे हो गया?
यह है मामला
खरीफ सीजन 2025-26 में बटान फूड्स सलारू को 25,129.87 क्विंटल धान आवंटित की गई थी।
जिला प्रशासन ने जब 25 अक्टूबर को एसडीएम करनाल की टीम से भौतिक जांच कराई, तो स्टॉक में 33,759 बैग का अंतर मिला।
मिल परिसर और भाटिया ओपन प्लेटी जुंडला दोनों जगह जांच हुई — लेकिन पाया गया कि जिस प्लेटी को बटान फूड्स ने किराए पर दिखाया था, वह फर्जी थी।
मुख्य आरोप
33,759 बैग धान का कोई रिकॉर्ड नहीं।
- फर्जी शपथ पत्र: 10 अक्टूबर को मिलर सतीश कुमार ने भाटिया प्लेटी के नाम से नकली एग्रीमेंट दिखाया।
- भाटिया प्लेटी रिपोर्ट में खुलासा: वहां तीन दूसरी राइस मिलों का स्टॉक था, बटान फूड्स का नहीं।
- जांच रिपोर्ट: 12,659.62 क्विंटल धान का हेराफेरी कर सरकारी खजाने को ₹3,54,46,936 का नुकसान।
इन पर लगे आरोप
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मंडी |
निरीक्षक का नाम |
ट्रांसफर धान (क्विंटल) |
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घरौंडा |
यशवीर सिंह |
1,905.75 |
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जुंडला |
संदीप शर्मा |
21,668.25 |
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करनाल |
समीर वशिष्ठ |
3,621.375 |
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निसिंग |
लोकेश |
1,229.25 |
➡️ कुल: 28,424.625 क्विंटल धान ट्रांसफर हुआ, लेकिन स्टॉक नहीं मिला।
धान की सरकारी खरीद का पूरा सिस्टम ही सवालों के घेरे में
इस घोटाले ने सिर्फ एक मिलर या चार इंस्पेक्टरों की लापरवाही को नहीं, बल्कि पूरे मंडी-मिलिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसान का धान सरकारी एजेंसी को बेचने के बाद मंडी से मिल तक हर स्तर पर “कागज़ी पारदर्शिता” दिखाई जाती है। लेकिन असलियत यह है कि रजिस्टर में दर्ज एंट्री, गेट पास और वेयरहाउस रिकॉर्ड – तीनों जगह अलग-अलग आंकड़े पाए गए।
कई स्थानीय सूत्रों का कहना है कि “फर्जी गेट पास और पेपर एंट्री के जरिए धान पहले ही बाहर कर दिया गया था।” यानी यह भौतिक कमी नहीं, बल्कि सुनियोजित हेराफेरी थी।
प्रशासन की कार्रवाई और अगला कदम:
उपायुक्त उत्तम सिंह ने एफआईआर दर्ज कराते हुए कहा —
“धान मिलिंग और भंडारण में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच चल रही है, और जिनकी मिलीभगत पाई जाएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्टर, आढ़ती और कुछ मंडी सचिवों के नाम भी इस जांच में शामिल हो सकते हैं।
एक्सपर्ट व्यू
पूर्व खाद्य आपूर्ति अधिकारी (नाम न छापने की शर्त पर) ने कहा —
“यह सिर्फ एक मिल का मामला नहीं है। सिस्टम में लंबे समय से loopholes हैं — वजन रिकॉर्ड, प्लेटी की वेरिफिकेशन और ट्रांसपोर्ट रसीदें कोई क्रॉस-चेक नहीं करता। जब तक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम नहीं लाया जाएगा, ऐसे घोटाले रुकना मुश्किल है।”
- घोटाले को यूं समझं
- कुल गायब धान: 12,659 क्विंटल
- अनुमानित कीमत: ₹3.54 करोड़
- धान आवंटन सीजन: खरीफ 2025-26
- FIR दर्ज: थाना सदर, करनाल
- मुख्य आरोपी: मिल संचालक सतीश कुमार + 4 इंस्पेक्टर
सरकारी धान में भ्रष्टाचार की एक झलक भर है
करनाल का यह धान घोटाला सिर्फ एक वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर तक फैली मिलीभगत की तस्वीर है।
किसानों की मेहनत से खरीदा गया सरकारी धान अगर इस तरह से गायब होता रहेगा, तो सरकार की खरीद नीति पर आमजन का भरोसा डगमगाना तय है।
अब देखना यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद क्या यह केस सिर्फ कागजों में ही सीमित रह जाएगा या वाकई जिम्मेदारों को सजा मिलेगी।