वेदांता विरोधी आंदोलन


कार्तिक नायक के जेल से बाहर आने पर वेदांता विरोधी आंदोलन को कितनी ताकत मिलेगी 


कालाहांडी से मनोज ठाकुर की रिपोर्ट 



 ओडिशा में खनन विरोधी संगठन मां माटी माली सुरक्षा मंच (रायगडा-कालाहांडी) के प्रमुख दलित कार्यकर्ताओं में से एक कार्तिक नाइक छह माह बाद जेल से बाहर आ गए। उनके बाहर आने पर आदिवासिसयों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। वह क्षेत्र में वेदांता व अन्य कंपनियों के खनन का विरोध लंबे समय से कर रहे हैं। क्षेत्र में उनकी काफी प्रतिष्ठा है।


दक्षिण ओडिशा के रायगडा और कालाहांडी जिलों में सिजिमाली/तिजमाली पहाड़ियों में वेदांता लिमिटेड बॉक्साइट खदान में माइनिंग करना चाहता है। यह संगठन वेदांता का विरोध कर रहा है। 

कार्तिक जेल से उस वक्त बाहर आया,जब वेदांता क्षेत्र में माइनिंग के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। हालांकि कंपनी की दो ग्राम सभा विफल हो चुकी है। 

क्षेत्र के आदिवासी कार्यकर्ता प्रफूल सुनानी ने आरोप लगाया कि वेदांता मैनेजमेंट  बाहर से कुछ लोगों को लाकर अपने समर्थन में प्रदर्शन भी करा रहे हैं। इसमें मांग की जा रही है कि क्षेत्र में खनन होना चाहिए। इससे रोजगार बढ़ेगा। 


उन्होंने बताया कि कार्तिक की गिरफ्तारी वेदांता के खिलाफ चल रहे आंदोलन को तोड़ने की एक कोशिश थी। लेकिन इसमें वह सफल नहीं हुए। कार्तिक की गिरफ्तारी के बाद आंदोलन ने और गति पकड़ी है। 


तीस वर्षीय कार्तिक को काशीपुर पुलिस ने 19 सितंबर, 2024 को सुबह करीब 11.30 बजे हिरासत में लिया। तिजिमाली क्षेत्र के हज़ारों ग्रामीणों ने झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के तहत उनकी रिहाई की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन तक मार्च निकाला था। आदिवासी कार्तिक की रिहाई की मांग हर मंच से उठाई। 

ओडिशा से बड़ी संख्या में ट्रेड यूनियन, किसान यूनियन, मानवाधिकार संगठन, खनन विरोधी संघर्ष समूह, जन संगठन और कार्यकर्ता भी  कार्तिक नाइक की रिहाई के लिए लगातार कोशिश करते रहे। 


इन संगठनों ने एक बयानजारी कर ओडिसा सरकार पर मानव अधिकार हनन व अनुसूची  V  की अनदेखी पर भी चिंता व्यक्त की थी। संगठनों का आरोप है कि  क्षेत्रों में आदिवासियों और दलितों को उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने में लोकतांत्रिक मानदंडों और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय, ओडिशा सरकार अवैध रूप से और खनन कंपनियों के इशारे पर काम कर रही है।कार्तिक को बैंक से निकलते वक्त गिरफ्तार किया था

स वर्षीय कार्तिक को काशीपुर पुलिस ने 19 सितंबर, 2024 को सुबह करीब 11.30 बजे बैंक से निकलते समय उठा लिया। काशीपुर पुलिस स्टेशन में कुछ देर रुकने के बाद उन्हें काशीपुर जेएमएफसी कोर्ट ले जाया गया। कुछ घंटों के बाद उन्हें रायगढ़ा उप-जेल में रखा गया।

कार्तिक के बेटे ने जेल से बाहर आए अपने पिता का यूं स्वागत किया

कार्तिक के बेटे ने जेल से बाहर आए अपने पिता का यूं स्वागत किया 

उसी दिन, तिजिमाली क्षेत्र के एक हजार से अधिक ग्रामीणों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन तक मार्च निकाला। उन्होंने देर शाम तक विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन और पुलिस को उनके गुस्से और अन्याय की भावना को शांत करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वे अंततः कार्तिक नाइक को रिहा करने के लिए सहमत हो गए, और यह भी वादा किया कि तिजिमाली के लोगों पर कोई और झूठा और मनगढ़ंत आरोप नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, यह बात सामने आई कि उसी रात पुलिस और प्रशासन ने 200 ग्रामीणों के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कर ली थी। 

इन आरोपों में हुई थी कार्तिक की गिरफ्तारी 

12 जनवरी, 2024 को कथित तौर पर हुई एक विवादास्पद घटना के संबंध में मैत्री कंपनी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मैत्री कंपनी के कर्मियों का दावा है कि एक गांव में लगभग 40 लोगों ने उन पर हमला किया था। उन्होंने जो नाम बताए हैं, उनमें से लगभग सभी स्थानीय नेताओं या खनन विरोधी प्रदर्शनों को संचालित करने वाले संगठन मां माटी माली सुरक्षा मंच के सदस्यों के हैं। इनमें से एक नाम कार्तिक का है।पुलिस 9 महीने बाद एफआईआर पर कार्रवाई की थी। 

जेल से बाहर  क्या बोले नायक 

जेल से बाहर आने के बाद  कार्तिक नाइक ने अपने लोगों के लिए चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि वें पहाड़ों और जंगलों को खनन से बचाने के लिए जेल जाने या अपनी जान तक देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने लोगों से अहिंसा और शांतिपूर्ण तरीकों से क्षेत्र में खनन विरोधी संघर्ष जारी रखने का आग्रह किया है। कार्तिक ने कहा है कि चूंकि लोग संविधान में निहित अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए जब तक संविधान रहेगा, संघर्ष जारी रहेगा।

इसलिए कर रहे आदिवासी खनन का विरोध 

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तिजिमाली, कुत्रुमाली और माझिंगमाली का क्षेत्र, जिसमें मुख्य रूप से आदिवासी और दलित रहते हैं, रायगढ़ जिले के काशीपुर और कालाहांडी जिले के थुमाल रामपुर में फैला हुआ है। यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है। हालांकि, तिजिमाली और कुटुरूमाली के बॉक्साइट भंडार को क्रमशः वेदांता और अडानी समूह को पट्टे पर दिए जाने के समय लोगों की राय नहीं ली गई, न ही उनकी सहमति ली गई। यह संविधान-निर्देशित प्रक्रिया का घोर उल्लंघन है।

बल्कि, पिछले साल की शुरुआत में वेदांता की एक अनुबंध कंपनी माइथ्री ने तिजिमालाई के गांवों का चक्कर लगाना शुरू कर दिया, ताकि ग्रामीणों के बारे में  जानकारी जुटाई जा सके।

वेदांता की ग्राम सुनवाई हो चुकी विफल 

सितंबर 2023 में, क्षेत्र के लोगों ने प्रस्तावित खनन योजनाओं की निंदा की और प्रस्तावित खनन के लिए पर्यावरण मंजूरी के लिए दो सार्वजनिक सुनवाई में धमकाने की रणनीति का पर्दाफाश किया। ग्रामीणों ने बताया कि खनन से उनके जीवन, आजीविका, नदियों और पूरे आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साइट का स्थान पवित्र देवता तिजिराजा का निवास स्थान है।

लोगों ने अपने संवैधानिक अधिकारों के कार्यान्वयन के लिए गणतंत्र दिवस 2024 पर भारत के राष्ट्रपति को एक अपील भी भेजी।


हाल ही में काशीपुर ब्लॉक के आठ गांवों और थुआमाल रामपुर ब्लॉक के दो गांवों में लोगों ने 30 अगस्त से 4 सितंबर 2024 तक अपनी ग्राम सभाएं कीं। यह वन अधिकार अधिनियम और पेसा अधिनियम के तहत उनके अधिकारों के अनुसार था। उन्होंने प्रशासन द्वारा 8 दिसंबर 2023 को आयोजित की गई फर्जी ग्राम सभाओं को खारिज कर दिया, जिसमें भारी पुलिस बल था और जो कंपनी के कर्मियों की मौजूदगी में आयोजित की गई थी। फर्जी ग्राम सभाओं के खिलाफ लोगों ने दो पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई थी।

डेढ़ साल से अधिक समय से लोगों की मजबूत एकता ने निश्चित रूप से प्रशासन को चिंतित कर दिया है, इसलिए अब दमन का एक और दौर शुरू हो गया है।



मनोज ठाकुर 22 साल से हिंदी पत्रकार के तौर पर काम कर रहे हैं। फिलहाल फ्रीलांस पत्रकार के तौर पर ओडिसा में खनन, पर्यावरण व आदिवासी आधिकार पर रिपोर्ट कर रहे हैं।
मनोज ठाकुर ने डोकालाम में भारत चीन की रिपोर्टिंग के अलावा पाकिस्तान, कश्मीर व लेह, पंजाब में किसानों की आत्महत्या जैसे मुद्​दों पर भी रिपोर्टिग की है।
जनसरोकर,जलजंगल जमीन पर्यावरण की रिपोर्टिंग के साथ साथ महिला अधिकारों पर रिपोर्ट करते रहे हैं। 

The news insider

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