वेदांता ने धवस्त किया एल्मूनियन रिफाइनी प्लांट, विरोध में एकजुट हुए लोग
कोरबा छत्तीसगढ़
कोरबा में 1976 में स्थापित किए गए एल्मूनियन रिफाइनी प्लांट को वेदांता ने बंद कर दिया है। यहां कार्यरत एक हजार के करीब कर्मचारियों को कंपनी ने अलग अलग यूनिट में समायोजित कर दिया है।
बताया गया कि यहा रिफाइनरी पुराने तरीके का थी। इस तरह की एल्मूनियन प्लांट पूरे विश्व में बंद हो गए हैं। इसलिए इसे भी बंद कर दिया गया।
इसलिए किया गया बंद
पुरानी रिफाइनरी की जगह अब नया सेल हाउस बनाया गया। इसमें लिक्विड एल्मूनियम बनना था। सेल उस जगह को बोला जाता है, जहां
एल्मूना बनता है। जिसे सेल हाउस में गलाया जाता है। इससे लक्विड सोलडर बेस बनता है।
पुराने प्लांट में जो एल्मूना बनता था, वह नए सेल हाउस में प्रयोग नहीं हो पाता था। इसलिए रिफाइनरी बंद करनी पडी।
वेदांता ने इस रिफाइनरी को बंद करने के लिए सभी युनियन से बातचीत की। इसके आश्वासन के बाद ही रिफाइनरी को खत्म किया गया।
तो फिर विवाद क्या है
होना यह चाहिए था कि कोरबा में कंपनी एल्मूनियम रिफाइनरी प्लांट लगाती। लेकिन रिफाइनरी लगायी गयी लांजीगढ़ में । अब
बाल्को माइनस से निकले के बाक्साइड को पहले लांजीगढ़ में भेजा जाता है। वहां से जो एल्मूना बनता है, उसे कोरबा व झारसुगड़ा में एल्मूनियम बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
आरोप है कि इस तरह से कंपनी रेवेन्यू की चोरी कर रही है। क्योंकि यदि कोरबा में रिफाइनरी होती तो बाल्को से निकलने वाले बाक्साइड का लाभ बाल्को को मिलता। अब
बाक्साइड की खरीद दिखा दी जाती है, इस तरह से जो
प्राफिट है, वह लांजीगढ़ रिफाइनरी को जाता है। क्योंकि लांजीगढ़ बाक्साइट खरीद कर इसका एल्मूना बना कर कोरबा व झारसुगड़ा में बिक्री दिखायी जा रही है।
