निसिंग अनाज मंडी में गेहूं के स्टॉक पर पानी डाल कर वजन बढ़ाने की कोशिश, आरोपी को बचाने में जुटे अधिकारी
फूड सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर अनूप कुमार और कुछ कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने मई माह में निसिंग अनाज मंडी में रखी गेहूं की बोरियों में पानी डाल दिया। इंस्पेक्टर ने यह कारनामा इसलिए किया ताकि गेहूं में नमी आ जाए। जिससे गेहूं का वजन बढ़ जाए। फूड माफिया की मिलीभगत से इस गड़बड़ी को इस तरह से अंजाम दिया कि किसी को इसकी भनक न लगे। लेकिन इनकी करतूत उस वक्त सार्वजनिक हो गई,जब कुछ लोगों को पता चल गया। उन्होंने मीडिया में इसकी जानकारी दी।
मामला उछला तो आनन फानन में जांच की औपचारिकता पूरी की गई। इसके बाद आरोपी को क्लीन चिट भी दे।
यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि जिस तेजी से जांच हुई उससे पता चल रहा है कि करनाल के फूड सप्लाई विभाग में फूड माफिया की जड़ कितनी गहरी है।
यह पानी उस वक्त डाला गया,जब एफसीआई गेहूं की डिलीवरी ले रहा था।
पानी क्यों डाला गया
गर्मियों में गेहूं के स्टॉक में पानी इसलिए डाल दिया जाता है,ताकि नमी बनी रहे। इससे गेहूं का वजन बढ़ जाता है। यह करतूत इसलिए अंजाम दी जाती है, ताकि गेहूं की खरीद के वक्त जो गड़बड़ी की,उसे छुपा लिया जाए। फूड माफिया एमएसपी के नाम पर भ्रष्टाचार को अंजाम देता है। खरीद के वक्त ही फर्जी पर्चे काटने काम किया जाता है। इसमें अनाज तो मंडी में आता नहीं,लेकिन कागजों में इसकी खरीद दिखा दी जाती है। अब इस खरीद को पूरा करने के लिए गेहूं में पानी डाल दिया जाता है।
नमी से हो जाता है गेहूं खराब
पानी डालने के पीछे फूड माफिया की सोच होती है कि वजन बढ़ जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो गेहूं में फफूंदी लग जाएगी। जिससे गेहूं खराब होना शुरू हो जाएगा। लंबे समय तक नमी बनी रहने के बाद इस तरह के अनाज को रिजेक्ट कर दिया जाता है। बाद में यह खराब अनाज खुली बोली से बेच दिया जाता है।
गरीब के निवाले और सरकार की कल्याणकारी योजना पर डाका
सरकारी खरीद का 90 प्रतिशत गेहूं गरीबों को सस्ते दाम पर दिया उपलब्ध कराया जाता है। फूड माफिया फर्जी खरीद कर गरीबों के निवाले पर डाका डालने का काम करता है। इसके साथ ही सरकार की कल्याणकारी योजना में भी भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जाता है। इस खेल में अनूप जैसे अकेले इंस्पेक्टर शामिल नहीं है। एक पूरा गिरोह इसमें काम करता है।
यूं बचाया जा रहा है आरोपियों को
जांच टीम ने आरोपी को बचाने की पूरी पटकथा लिखी। क्योंकि एफसीआई अनाज की डिलीवरी ले रहा था,इसलिए आनन फानन में जांच की औपचारिकता पूरी कर आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई।
जांच टीम के इंचार्ज एफएसओ राजीव लांगयान ने बताया कि मौके पर गेहूं में नमी की मात्र तय मानकों के अनुसार मिली है। उन्होंने बताया कि न तो मौके से पानी की पाइप मिली न ही पानी डालने के सुबूत मिले हैं।
उधर जानकारों का कहना है कि जांच इस तरह की गई कि आरोपियों को बचाया जा सके। पानी डाले गेहूं को आनन फानन में एफसीआई को उठवा दिया गया। यह गेहूं दिल्ली, यूपी और बिहार राज्यों में गरीबों के बंटने के लिए चला गया। होना तो यह चाहिए था कि जब इस गेहूं में पानी डालने के आरोप लगे,इस स्टॉक को रोक कर इसकी गहनता से जांच की जाती। दूसरा एफसीआई को भी गेहूं में पानी डालने की जानकारी नहीं दी गई।
इस तरह से भ्रष्टाचार के इस पूरे चैप्टर को क्लोज करने की जांच टीम ने भी पूरी कोशिश की। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने सीएम और विभाग के निदेशालय को पत्र लिख कर जांच टीम और आरोपी की शिकायत की है।