चिंताजनक: भारतीय पक्षियों की संख्या तेजी से हो रही है कम
हमारी जीवन शैली का खामियाजा भुगत रहे पक्षी: पर्यावरण प्रदूषण और बढ़ते कीटनाशकों से बने यह हालातद न्यूज इनसाइडर नेटवर्क, दिल्ली
हमें भी चिंता करनी होगी: क्योंकि पक्षियों के बाद यह दिक्कत हमें भी घेर सकती है
हमारी जीवन शैली का खामियाजा पक्षियों को भुगतना पड़ रह है। क्योंकि भारत में में 52 प्रतिशत पक्षियों की प्रजातियां तेजी से कम हो रही है। इसकी बड़ी वजह कम होते जंगल, बढ़ता शहरीकरण और वायु व धवनी प्रदूषण बड़ी वजह माना जा रहा है। प्रवासी जीवो पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भारतीय पक्षियों पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के लिए 867 तरह के भारतीय पक्षियों को अध्ययन में शामिल किया गया था। इसमें से लंबे समय तक काम करने के बाद भी 261 पक्षियों को आंकड़ा जुटाना संभव हुआ। रिपोर्ट में 12 को बेहद असुरक्षित, 15 को असुरक्षित और 52 को संभावित खतरे की श्रेणी में रखा गया है।
मात्र 19 साल में 52 प्रतिशत पक्षियों की संख्या कम हुई
रिसर्च में सामने आया है कि 19 साल में पक्षियों की संख्या में कमी तेजी से आयी है। इसमें भी 22 प्रजाजियां तो खतरे के निशान तक पहुंच चुकी है। इन सालों में ही विकास के नाम पर जो काम हुए हैं, यह उसी का परिणाम माना जा रहा है। इसके साथ ही तेजी से शहरीकरण हुआ है। वाहनों की संख्या बढ़ी है। पर्यावरण के लिए काम कर रही संस्था आकृति के अध्यक्ष अनुज ने बताया कि शहरों में तो अब पक्षी दिखना ही बंद हो गए हैं। कबूतर को यदि छोड़ दिया जाए तो बाकी पक्षी गायब हो गए हैं। उन्होंने बताया कि शहरों के आस पास सड़कों को चौड़ा करने के लिए जिस तरह से पेड़ काट दिए गए। इससे पक्षियों का प्राकृतिक आवास ही छीन गया है।खतनारक प्रदूषण में जी रहे हैं हम
विशेषज्ञों का कहना है कि इस वक्त हम खतरनाक स्तर के वायु प्रदूषण में जी रहे हैं। देश में प्रदूषण को लेकर अभी तक दिल्ली की ही चिंता हो रही है, हकीकत यह है कि हरियाणा, पंजाब, यूपी समेत आधा देश वायु प्रदूषण के खतरे को झेल रहा है। इसके बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। हरियाणा में पानीपत, करनाल, यमुनानगर हिसार प्रदूषण के लिहजा से संवेदनशील माने जाते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि इसकी चर्चा ही नहीं होती।हमें क्यों चिंता करनी चाहिए
यह संकट सिर्फ पक्षियों का नहीं है। यह हमारे लिए एक तरह से चेतावनी है। प्राकृति ने हमें चेन सिस्टम दिया है। चेन की यदि एक कड़ी टूटती है तो पूरी चेन ही कमजोर पड़ती है। पक्षी कम होने का सीधा मतलब है कि हम भी खतरे में आ रहे हैं। करोना वायरस हो या फिर दूसरी बीमारी, इसकी एक बड़ी वजह कहीं न कहीं हम ही हैं। जो पर्यावरण को ताक पर रखे हुए हैं।
दस साल में हरियाणा में पांच लाख पेड़ काट दिए गए
आकृति के अध्यक्ष अनुज ने बताया कि हमने एक सर्व किया, इसमें निकल कर आया कि हरियाणा के शहरी सीमा में दस साल में पांच लाख पेड़ काट दिए गए। इनकी जगह नया पौधा रोपण किया ही नहीं गया। पेड़ काटने के बाद पौधा रोपण को जो पैसा मिलता है इससे दूसरे कामों में लगा दिया गया है। लेकिन कोई इस बारे में बोल ही नहीं रहा है। अनुज ने बताया कि हालात यह है कि हरियाणा के पर्यावरण विभाग को इसकी चिंता ही नहीं है। नेताओं के एजेंडे में पर्यावरण है नहीं। ऐसे में हालात कितने खतरनाक हो गए हैं? इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है।सिर्फ दिखावा भर हो रहा है
उन्होंने बताया कि संस्था ने खेतों में पुराल जलाने पर जो सर्वे किया था। सरकार ने किसानों को जागरूक करने के लिए जो अभियान चलाया, इसमें भारी गड़बड़ी हुई। कृषि विभाग को अभियान की जिम्मेदारी दी गयी थी, लेकिन कार्यक्रम के नाम पर सिर्फ छोटे आयोजन कर कृषि विभाग के अधिकारियों ने अपने कर्तव्य को इतिश्री कर लिया। यह बताने का मकसद सिर्फ इतना है कि पर्यावरण न तो अधिकारियों के एजेंडे में हैं, न सरकार के और न हमारे। ऐसे में आज संकट में पक्षी है, कम हम भी आएंगे। शायद हम यह बात भूल रहे हैं।राहत की बात मोर बढ़े हैं
राहत की बात तो यह है कि मोरों की संख्या में बढ़ोतरी भी दर्ज की गयी है। गिद्ध के बारे में बताया गया कि पहले तो इनकी संख्या तेजी से कम हुई,लेकिन अब स्थिर है। इसी तरह से पीले पेट वाला कठपोड़वा, कामन बुडश्रीक , छोटे पंजों वाली स्नेक ईगल, कपास जैती, बड़ी कोयलऔर ग्रीनशैक की संख्या तेजी से कम हो रही है। पक्षी विशेषज्ञों ने माना कि पक्षियों की कम होती संख्या के लिए हम सभी जिम्मेदार है। शहरों में तेजी से कंकरीट के जंगल उग रहे हैं। सड़के चौड़ी करने के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं। छतरी वाले पेड़ों की जगह हम सजावाटी पौधे लगाने लगे हैं। छतरी वाले पेड़ पक्षियों का प्राकृतिक आवास है। इस तरह से किसान कीटनाशकों का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। इसका असर भी पर्यावरण और पक्षियों पर पड़ रहा है।आओ हम मिल कर पर्यावरण के लिए सोचे
माह में एक दिन आप पर्यावरण के लिए कोई एक काम करें। आकृति के अध्यक्ष अनुज सैनी ने बताया कि यदि कुछ नहीं कर सकते, एक दिन वाहन ही न चलाए। घर की बिजली कुछ घंटे के लिए बंद कर दें। कोई एक पौधा गोद लें, इस पौधे की देखभाल तक तक करें जब तक की यह पेड़ न बन जाए। यदि हर व्यक्ति इस तरह के छोटे छोटे उपाय करेगा तो निश्चित ही हम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा काम करेंगे। हम बाकी काम भी तो करते ही हैं? फिर क्यों न पर्यावरण के लिए यह छोटे छोटे काम करें। क्योंकि याद रखना होगा, जिस हवा में हम सांस लेते हैं, वह प्राकृति से ही मिलेगी।और वह तब मिलेगी जब हम भी बदले में कुछ देंगे इसलिए मर्जी आपकी है। पक्षियों की तरह अब खुद भी संकट में आना है, या फिर खुद को बचाने के लिए पक्षियों को और पर्यावरण को बचाना है। तय किजिए... आज ही.. कल तो देर हो जाएगी।
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पक्षियों पर मंडराया खतरा






