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द न्यूज इनसाइडर के स्टिंग का असर: केंद्र सरकार  ने लिया करनाल राइस मिलों की स्पेशल पीवी का निर्णय 


दिल्ली में हुई बैठक में बनी सहमति, करनाल के 70 प्रतिशत मिलों में  हुई धान की फर्जी खरीदद न्यूज इनसाइडर ने उठाया था मामला, इसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने लिया निर्णय 

द न्यूज इनसाइडर , चंडीगढ़ 

सरकारी धान खरीद में हुई भारी गड़बड़ी को देखते हुए एक बार फिर से फिजिकल वैरिफिकेशन पीवी कराने का निर्णय सरकार ने लिया है। इस मामले को लेकर दिल्ली में एक बैठक आयोजित हुई। इसमें तय किया गया कि इस बार पीवी का काम विशेष टीम करेगी। कहां कहां पीवी होनी है, , इसके लिए मिलों की लिस्ट तैयार की जाएगी। द न्यूज इनसाइडर टीम ने पिछली पीवी के बाद एक स्टिंग किया था, इसमें सामने आया था कि टीम में शामिल अधिकारियों ने पचास हजार रुपए से लेकर पांच लाख रुपए लेकर मिलों में स्टॉक पूरा कर दिया। पोर्टल ने इस मामले को उठाया है। बकायदा से एक टीम बना कर धान खरीद प्रक्रिया पर नजर रखी है। इसके बाद लगातार मामले का फालोअप किया जा रहा है। फिर भी बार बार मामला उठाने के बाद भी इस मामले को दबाया जा रहा है। मामले पर प्रदेश सरकार की ढीली कार्यवाही को देखते हुए टीम ने केंद्रीय मंत्रालय से इस मसले पर बातचीत की। ध्यान रहे सरकारी धान की फर्जी खरीद मामला जब हमारी टीम ने उठाया था तो यह मामला विधानसभा में भी उठा था। विधानसभा में मंत्री दुष्यंत चौटाला ने इस पर जांच की बात सदन में बोली थी। जांच हुई, लेकिन कुछ अधिकारियों ने इस स्कैम की जांच की आड़ में मोटी उगाही कर रिपोर्ट मिल संचालकों के पक्ष में बना दी। हालांकि सरकार बार बार मामले की सही जांच कराने का दावा कर रही है। लेकिन विपक्ष के नेता व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी के बाद भी सभी को बचाने की कोशिश हो रही है। इससे साफ पता चल रहा है कि सरकार की मंशा सही नहीं है। हुड्डा ने यह भी बताया कि यदि सरकार इमानदारी से जांच कराना चाहती है तो इसकी सीबीआई से जांच होनी चाहिए। तभी यह स्कैम खुल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा लग रहा है कि सरकार की पूरी कोशिश गड़बड़ करने वालों को बचाने की है। यहीं वजह है कि जांच जांच खेल कर मामला दबाया जा रहा है। 



पीवी टीम पर पहले ही दिन से उठ रहे सवाल 

इस टीम पर पहले दिन से ही सवाल उठ रहे हैं। टीम में शामिल ज्यादातर अधिकारियों का ध्यान वैरिफिकेशन करने में कम और किस तरह से उन्हें रिश्वत मिल सकती है, इस ओर ज्यादा रहा। यहां तक की गड़बड़ी करने वाले मिल संचालकों से रिश्वत लेकर फर्जी कागजात तैयार कर लिए गए। इस मामले को जब उठाया गया तो दोबारा से पीवी हुई। लेकिन इसमें भी स्थिति साफ नहीं हुई। यहीं वजह रही कि द न्यूज इनसाइडर की टीम ने मामले को उपभोक्ता मामले और फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन मंत्रालय के सामने उठाया गया। तब अधिकारियों ने साफ किया कि करनाल समेत कुछ संदिग्ध मिलर्स की स्पेशल पीवी की जाएगी। मंत्रालय ने अपने वायदे के अनुसार  अब स्पेशल पीवी करने का निर्णय लिया है। 

पीवी करने वाले अधिकारियों की भी होनी चाहिए जांच 

क्योंकि उन्होंने सीधे सीधे भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए काम किया है। इसलिए  पीवी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आखिर कैसे गड़बड़ी करने वाले मिल संचालकों को बचाने की कोशिश की है। यूथ फॉर चेंज के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि यह अपने आप में बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है। जिन अधिकारियों को भ्रष्टाचार को पकड़ना था,वह भी रिश्वत लेकर भ्रष्टाचारियों को बचाने में लग गए। यह अपने आप में बहुत बड़ा स्कैम है। एडवोकेट राकेश ढुल की मांग है कि पीवी में शामिल सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। यह भी जांच होनी चाहिए कि उन्होंने किस किस मिलर्स को कैसेकैसे बचाया है। 




गरीब का निवाला और किसान की मेहतन की हो रही लूट 

सरकारी धन खरीद स्कैम की आड़ में गरीब के निवाले पर सीधा डाका डाला जा रहा है। क्योंकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जो चावल गरीबों के राशन के लिए जाता है, वह उन तक नहीं पहुंचता। फूड माफिया इस चावल को रास्ते से गायब कर देता है। यहीं चावल करनाल के राइस मिलर्स के पास पहुंच जाता है। जिसे वह दोबारा से फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया को सप्लाई कर देते हैं। चावल का यह चक्र कई सालों से चल रहा है। दूसरी ओर परमल धान खरीद के समर्थन मूल्य का जो पैसा किसानों की जेब में जाना चाहिए था, वह पैसा धान की फर्जी खरीद दिखा कर आढ़ती, मिलर्स, अधिकारी इस पैसे को अपनी जेब में डाल रहे हैं। 



सीनियर अधिकारियों की भूमिका की भी होनी चाहिए जांच 

इस मामले में उन सीनियर अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए, जिन्होंने स्पेशल सिफारिश कर खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टरों को मंडी अलॉट की थी। आखिर उन्होंने ऐसा कैसे किया? इसके पीछे क्या नियम थे।  इस गड़बड़ी का   अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि करनाल मंडी के इंस्पेक्टर समीर ने ऐसे राइस मिल संचालकों को तय कोटे से ज्यादा धान दे दी, जो डी श्रेणी के थे। पहली नजर में यह अपने आप में बड़ा घोटाला है। लेकिन जिला स्तर के अधिकारी इसे उजगार करने की बजाय विवादित इंस्पेक्टरों को बचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसकी भी जांच होनी चाहिए।



अब क्या होगा

केंद्रीय मंत्रालय की टीम की देखरेख में अब स्पेशल पीवी होगी। इसमें उन मिल संचालकों पर भी नजर रखी जाएगी जिन्होंने चावल एफसीआई को दे दिया है। क्योंकि इतनी जल्दी चावल कैसे तैयार हो गया? टीम यह भी सवाल उठाने जा रही है। इसके लिए मिल की क्षमता, कितनी बिजली खर्च हुई, इसकी भी जांच करेगी। जिससे सच का पता चल सके। इसके साथ ही टीम में इस बार धान विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। क्योंकि पहले जो जांच हुई थी, इसमें टीम ने ऐसे अधिकारी शामिल कर दिए थे, जिन्हें परमल व बासमती धान का अंतर नहीं पता था। इस वजह से अधिकारियों ने बोरिया में भरी धान को सरकारी धान मानते हुए स्टॉक पूरा होने की रिपार्ट दे दी। जबकि यह बासमती धान थी, जो कि अपने आप में बड़ी गड़बड़ी थी। 37 किलोग्राम की बोरी को 50 किलो में मानते हुए स्टॉक पूरा किया गया। यह सीधे सीधे गड़बड़ी थी। लेकिन पीवी में शामिल अधिकारियों ने इसे पकड़ने की बजाय रिश्वत लेकर अपने कागज पूरे कर दिए। इसके साथ ही इस बार की स्पेशल पीवी की वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी। जानकारों का कहना है कि धान की फर्ज खरीद का सबसे बड़ा स्कैम खाद्य आपूर्ति विभाग की खरीद में हुए है। ध्यान रहे धान की खरीद हैफेड, कांफेड समेत कई एजेंसियां करती है। पर क्योंकि सबसे ज्यादा खरीददारी खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से होती है, इसलिए इसी विभाग को ज्यादा जिम्मेदार बताया जा रहा है। 

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