द न्यूज इंसाइडर इंपेक्ट: किसानों की परेशानी को देखते हुए, सरकार ने शुरू की धान की खरीददारी
चार दिन से मंडियों में पड़े थे किसान, द न्यूज इंसाइडर टीम ने उठाया था मामला
25 अक्टूबर से धान की बंद पड़ी सरकारी खरीद दो नंबवर को सरकार ने खोल दी। मंडियों में धान बिक्री की बाट देख रहे किसानों को सरकार के इस निर्णय से कुछ राहत मिलती नजर आ रही है। शनिवार को करनाल समेत सभी अनाज मंडियों में धान के गेट पास काटे गए। इस बार धान खरीद में खाद्य आपूर्ति विभाग, मंडी कमेटी और राइस मिलर्स के कुछ भ्रष्ट लोगों ने बड़ा घोटाला कर दिया। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। द न्यूज इंसाइडर की टीम ने परत दर परत इस घोटाले को खोल रही है। दूसरी ओर इन खबरों पर संज्ञान लेकर सरकार ने धान की बिक्री खोल दी। जिससे किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद बंधी है। कई आढ़तियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि अगर फर्जी धान न लिखा जाए , यूपी के व्यापारी करनाल की मंड़ियों में धान न बेच पाए तो लोकल किसानों को अपने धान का समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव मिल सकता है।
क्यों बने मंडियों में यह हालात
हर बार की तरह इस बार भी धान खरीद के नाम पर मंंडियों में घोटाला हुआ है। धान की फर्जी खरीद दिखा कर पर्चे मिलर्स के नाम काट दिए गए। जो रकम धान खरीदने के लिए केंद्र से आयी थी, यह पैसा मिलर्स के पास पहुंच गया। अब जब किसान धान लेकर मंडी में पहुंचे तो सरकारी एजेंसियों ने इसे खरीदने से इंकार कर दिया। क्योंकि धान का खरीद कोटा पूरा हो गया था। यहीं वजह थी कि धान की बिक्री बंद हो गयी थी।
इसलिए आढ़ती मेरी फसल मेरा ब्यौरा का करते हैं विरोध
सरकार ने योजना बनाई थी कि धान का रकबा पहले ही दर्ज कर लिया जाए। जिससे यह पता चल सके कि इस बार मंडियों में कितना धान आएगा। इसी को लेकर मेरी फसल मेरा ब्याैरा नाम से एक पोर्टल तैयार कराया गया था। इसका आढ़ती व मिलर्स विरोध कर रहे हैं। क्योंकि यदि पोर्टल पर धान का विवरण आ जाता है तो फर्जी धान खरीद पर रोक लग सकती है। घोटाला चलता रहे, इसी सोच के चलते पोर्टल को फेल करने की हर संभव कोशिश हो रही है।
सरकार पर था दवाब
हालांकि निर्धारित कोटे के ज्यादा धान खरीदी जाने की जब समीक्षा करवाई गई तो रिपोर्ट चौकाने वाली आई। लेकिन फिर भी सरकार ने मामला शांत करने में ही भलाई समझी अर्थात जो धान लोकल किसानों का रह चुका है, उसे किसी तरह से खरीदकर धान खरीद को बंद कर दिया जाए। गड़बड़ी कहा हुई, कौन जिम्मेवार है। इसकी जांच तो बाद में की जा सकेंगी। लेकिन इस समय सरकार कोई विवाद खड़ा नहीं होने देना चाहती, वो भी जब किसान पहले ही सरकार से नाराज चल रहा हो।
कोई आरोप न लगे, पहले आढ़तियों की दुकानों पर जाकर लिखी धान
सरकार की सख्त हिदायत के चलते खरीए एजेंसी व मंडी अधिकारी नहीं चाहते थे कि खरीद को लेकर कोई विवाद उत्पन्न हो। इसलिए सरकार की हिदायत अनुसार अधिकारियों ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर खरीद काे शुरू किया। इसे पहले उन्होंने आढ़तियों की दुकानों पर पड़े उस धान को लिखा जो लोकल किसानों का है। जो केवल दिखावा मात्र रहा।



