प्रदूषण पर मनोहर चिट्ठी: हमारी सांसों से सिसासत भर है

प्रदूषण पर मनोहर  चिट्ठी:  हमारी सांसों से सिसासत भर 

पांच साल के शासन में मनोहर सरकार ने पेड़ काटे, मोरनी हिल बाबा रामदेव को हर्बल पार्क के लिए दे दी, शिवालिक की पहाड़ियां बिल्डर के हवाले करने की योजना, 


द न्यूज इंसाइडर ब्यूरो. चंडीगढ़ 

हरियाणा सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे प्रदेश में प्रदूषण कम हो। इसकी वजह यह थी कि चुनाव के दिन थे। पार्टी किसानों को नाराज नहीं कर सकती थी। इसलिए पुराली जलाने पर रोक लगाने की दिशा में ज्यादा काम नहीं हुआ। अब धुआं तो होना ही था। दिल्ली में प्रदूषण रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। खूब हो हल्ला हो रहा है। मीडिया भी दिल्ली की दिक्कत को खूब उछाल रहा है। लेकिन यह प्रदूषण सिर्फ दिल्ली तक नहीं है। इसकी जद में मेरठ मंडल, एनसीआर एरिया भी है। पानीपत और करनाल भी चपेट में हैं। लेकिन यहां की कोई बात नहीं कर रहा है। संजीदगी दिखाने के लिए मनोहर लाल की ओर से एक चिट्ठी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडर को लिखा है। इसमें समस्या से निपटने के लिए सभी सीएम की एक मीटिंग बुलाने की मांग की है। चिट्ठी पर श्रेय लेने की सरकार में खूब होड़ मची। आकृति संस्था के अध्यक्ष अनुज सैनी ने बताया कि ऐसा लगता है कि यहां किसी को चिंता ही नहीं है कि हमारे फेफड़े प्रदूषित हवा अंदर ले रहे हैं। इससे हम बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। अनुज सैनी ने सीएम मनोहर लाल को एक पत्र लिख कर मांग की कि शहर के बिगड़ते प्रदूषण को लेकर कोई एक्शन प्लान बनना चाहिए। यदि जल्दी ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो करनाल भी गैस चैंबर में तब्दील हो जाएगा। आकृति संस्था ने द न्यूज इंसाइडर के साथ मिल कर पर्यावरण को बचाने के लिए और लोगों को जागरूक करने के लिए एक अभियान चलाया है।

तो चिट्ठी पर आब्जेक्शन क्यों होना चाहिए 


1जब पेड़ कट रहे थे तो सीएम चुप रहे 


सीएम मनोहर लाल के पांच साल की सरकार में पर्यावरण के लिए कुछ नहीं किया। उलटा वह सब किया जो नहीं होना चाहिए था। मसलन करनाल में पांच साल में बीस हजार से ज्यादा पेड़ काट दिए गए। मॉल रोड जिस पर तीन सौ साल पुराने पेड़ थे, यह पेड़ एक झटके में काटे गए। सरकार ने पेड़ के कटान को रोकने की दिशा में कुछ नहीं किया। तर्क दिया सड़क चौड़ी करनी है। यातायात बढ़ गया। जबकि दूसरी ओर वेस्ट यमुना कैनाल से बाइपास निकाला है, फिर उसका क्या काम है। वाहन वहां से क्यों नहीं गुजारे जाते। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।


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नए पौधे कहां लगेंगे? 

नियम है एक पेड़ कटता है तो इसकी जगह इतने पौधे लगाए जाते हैं कि इस पेड़ की भरपाई हो जाए। करनाल में वन विभाग का दावा है कि उनके पास पेड़ लगाने के लिए जमीन ही नहीं है। यानी अब नए पौधे नहीं लगेंगे। करनाल सीएम का विधानसभा क्षेत्र है, लेकिन यहां के लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा कहां से मिलेंगी, यह सरकार का एजेंडा नहीं है। क्योंकि पता है, इससे वोट नहीं मिलेगा। 


3कंकरीट में तब्दील हो रहा शहर 


रातों रात शहर के फुटपाथ पक्के किए जा रहे हैं। यह कौन कर रहा है, क्यों कर रहा है,इ सका जवाब निगम के पास नहीं है। वह निगम जो आज तक अपना भवन तैयार नहीं करा पाया, लेकिन फुटपाथ पर सीमेंट की टाइल लगाने में इतनी मुस्तैदी दिखा रहा है। इसके पीछे राज क्या है? यह कंकरीट सड़क के साइड में लगे पेड़ों को खासा नुकसान पहुंचाती है। इससे जहां पेड़ सूख रहे हैं, वहीं बरसात का पानी भी जमीन के नीचे नहीं जाएगा। परिणाम स्वरूप एक ओर तो सरकार रेनी वाटर हाॅरर्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की बात करती है, दूसरी ओर शहर को ही पक्का किया जा रहा है।

प्रदेश में क्या हुआ


पांच साल में पर्यावरण को लेकर कोई योजना नहीं है। इस दौरान जम कर पेड़ कटे हैं। नए पेड़ कहां लगे? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। क्यों? बड़ी बात तो यह है कि मनोहर सरकार में मोरनी हिल जो कि प्राकृति जंगल है,इ से रामदेव को हर्बल पार्क विकसित करने के लिए दिया गया है। शिवालिक पहाड़ियों को सरकार ने बिल्डर को सौंपने की योजना बना रखी है। तो इस तरह की सोच रखने वाली सरकार से पर्यावरण संरक्षण की उम्मीद क्या करेंगे, अनुज सैनी ने सीएम से सवाल किया है। अनुज ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि इस सरकार को पता ही नहीं कि पर्यावरण संरक्षण होना चाहिए। उन्होंने बताया कि संस्था ने जो सर्वे किया, इसमें हालात बहुत चिंताजनक है। इस बारे में यदि जल्दी ही उचित कदम नहीं उठाए गए तो हरियाणा के लोग साफ हवा के लिए तरस जाएंगे। 
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