ऑपरेशन गेट पास” : करनाल की मंडी में 125 करोड़ की फर्जी खरीद सिस्टम में बैठा ‘धान माफिया’ कौन?
मनोज ठाकुर करनाल
मामले करनाल अनाज मंडी में फर्जी गेट पास काट कर 125 करोड़ रूपए के धान घोटाले को अब जांच के नाम पर दबाने की कोशिश हो रही है। अब जिम्मेदार , जांच अधिकारियों को गेट पास की जो लिस्ट दे रहे हैं, वह डेट वाइज नहीं दी जा रही है। जो लिस्ट दी जा रही है,इसमें यह बताया जा रहा है कि किस फर्म को कितने गेट पास अलॉट किए गए। जबकि हुआ यह है कि एक ही फर्म के एक साथ एक ही समय में बीस बीस से अधिक गेट पास काट दिए गए।
अब यह जांच का विषय है कि क्या यह सभी बीस किसान एक ही फर्म में एक ही समय में धान लेकर आए। जाहिर है ऐसा नहीं होता। यह अपने आप में हेराफेरी है। अब यदि इन गेट पास का यदि सीरियल नंबर जांच लिया जाए तो गड़बड़ी का पता जल्द लग सकता है।
जानकारों का कहना है कि मंडी सचिव आशा रानी को बचाने की पूरी कोशिश हो रही है। जाे जांच हो रही है, वह महज खानापूर्ति है। तभी तो जांच अधिकारी भी गेट पास को सीरियल वाइज नहीं चैक कर रहे हैं। उन्हें मंडी सचिव व जिम्मेदारों की ओर यह बताया गया कि अमूक फर्म में इतने गेट पास काटे गए हैं। जांच अधिकारी इससे आगे कुछ पूछ ही नहीं रहे है।
इधर मामले में अभी तक जांच ही जांच खेली जा रही है। यदि वास्तव में सही जांच करनी है तो दूसरा तरीका है सतबीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी का। क्योंकि जब मामला दर्ज होने के बाद उसका रिमांड लिया जाएगा तो वह खुद ब खुद अपने आकाअों की पोल पट्टी खोल देगा।
🎯 पहली परत: फर्जी गेट पास, असली रकम
करनाल मंडी में धान के नाम पर जो खेल हुआ, वो किसी थ्रिलर से कम नहीं।
कागज़ों पर सब कुछ “सिस्टम से” हुआ — किसान आए, गेट पास कटे, धान बिका।
लेकिन जब रजिस्टर पलटा गया, तो सच्चाई धान के बोरे नहीं, फर्जीवाड़े के ढेरों में मिली।
एक ही फर्म के लिए एक साथ बीस-बीस गेट पास!
अब सवाल — क्या बीसों किसान एक साथ एक ही जगह पहुंचे थे?
साफ़ है, यह “किसान” नहीं, बल्कि डेटा के पर्दे पर लिखे गए फर्जी नाम थे।
और रकम?
करीब 125 करोड़ रुपये की सरकारी खरीद इस जालसाज़ी में समा गई।
⚖️ दूसरी परत: सतबीर – मोहरा या मास्टरमाइंड?
इस घोटाले का नाम सामने आते ही ऑक्शन रिकॉर्डर सतबीर को सस्पेंड कर दिया गया।
सरकारी प्रेस नोट में इसे “सख्त कार्रवाई” बताया गया।
पर असली सवाल है —
👉 एफआईआर कहां है?
👉 गिरफ्तारी क्यों नहीं?
अगर फर्जी गेट पास बनाना अपराध है (जैसा कि मुख्यमंत्री की कार्यवाही भी साबित करती है),
तो फिर सतबीर के खिलाफ केस दर्ज क्यों नहीं हुआ?
क्या यह “संयोग” है या किसी बड़े अधिकारी तक आग पहुंचने से पहले फाइल दबा दी गई?
🧩 तीसरी परत: मंडी सचिव की ढाल, जांच की चाल
इस घोटाले की जांच में एक नया खेल शुरू हुआ है।
गेट पास की लिस्ट मांगी गई, लेकिन डेट वाइज नहीं।
फाइल में बस इतना लिखा है — “फलां फर्म को इतने गेट पास जारी।”
यानी गड़बड़ी के सबूतों को सिस्टमेटिकली धुंधला किया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि मंडी सचिव आशा रानी के इर्द-गिर्द सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है।
जांच अधिकारी सीरियल नंबर तक नहीं मांग रहे —
क्योंकि हर सीरियल नंबर, किसी “ऊपर वाले” का नाम उजागर कर सकता है।
💼 चौथी परत: दो और खिलाड़ी — यशपाल और राकेश
सूत्र बताते हैं, करनाल मंडी के दो कर्मचारी — यशपाल और राकेश — इस खेल की अहम कड़ियां हैं।
यशपाल पहले तरावड़ी मंडी में तैनात था।
अब यह जांच का विषय है कि वहां भी क्या “धान से ज्यादा डेटा बेचा गया”?
🔥 पाँचवी परत: भाकियू की बगावत
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने सीधे आरोप लगाए —
“यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों का खेल नहीं, पूरा सिस्टम इसमें शामिल है।
प्रशासक, आढ़ती, और फर्जी किसान — सबने अपनी-अपनी हिस्सेदारी ली है।
सरकार चाहे तो 24 घंटे में CBI जांच से सब सामने आ जाएगा,
लेकिन वो नहीं चाहेगी — क्योंकि सुई ऊपर की तरफ घूम जाएगी।”
भाकियू ने साफ कहा —
“यह जांच मज़ाक है, लीपापोती है, और असली आरोपी खुले घूम रहे हैं।”
🧨 छठी परत: अंदर की फुसफुसाहट
मंडी के अंदर के सूत्रों का दावा है —
“अगर सतबीर की गिरफ्तारी हुई और उसका रिमांड लिया गया,
तो वह सिर्फ अपने नहीं, ऊपर वालों के नाम भी उगल देगा।
इसलिए केस ही दर्ज नहीं होने दिया जा रहा।”
यानी, सस्पेंशन बस “न्याय का नाटक”,
जबकि असली साजिश ऑफिस फाइलों और अफसरों के फोन कॉल्स में जिंदा है।
⚔️ आख़िरी परत: “गुनाह धान का नहीं, सिस्टम का है”
यह मामला सिर्फ करनाल मंडी का नहीं।
यह एक चेतावनी है कि भ्रष्टाचार अब कागज़ों पर नहीं, डिजिटल गेट पास में भी पनप गया है।
यह धान नहीं, जनता के भरोसे की लूट है।
अगर यह मामला सीबीआई तक नहीं पहुंचा,
तो “गेट पास घोटाला” हर जिले में एक नया चेहरा लेकर दोहराया जाएगा।


