मंडी सिस्टम का महत्वपूर्ण किरदार सतबीर,पद छोटा, कारनामे बड़े
किस खैरख्वाह के दम पर हर बार विवादों में फंस कर भी साफ बच जाती है मंडी सचिव आशा रानी
मनोज ठाकुर, करनाल
करनाल मंडी में फर्जी गेट पास काट कर 125 करोड़ के घोटाले में सवालों के घेरे में आयी मंडी सचिव आशा रानी एक बार फिर से विवादों के घेरे में तो हैं। लेकिन जिस तरह से सरकार ने कार्यवाही करते हुए केवल तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। अब सरकार की यह कार्यवाही क्या आशा रानी के लिए एक बार फिर से सेफ एक्सेस बनेगी?
सीएम नायब सिंह सैनी ने करनाल अनाज मंडी में अलग-अलग आईपी एड्रेस का इस्तेमाल करके फर्जी गेट पास काटने की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तीन को सस्पेंड किया,इसमें सुपरवाइजर हरदीप और अश्वनी सहित ऑक्शन रिकॉर्डर सतबीर शामिल है।
पर क्योंकि पोर्टल के पासवर्ड को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी मंडी सचिव की होती है। इस तरह से देखा जाए तो यदि फर्जी गेट पास कटे हैं तो इसके लिए मंडी सचिव आशा रानी की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट के एडवोकेट राजेंद्र चौहान ने एक पत्र चीफ सेक्रेटरी को लिख कर करनाल अनाज मंडी में 125 करोड़ के घोटाले के आरोप लगाते हुए मंडी सचिव अाशा रानी, डीसी, एसडीएम, डीएफएससी विभाग के अधिकारी समीर व कुछ नेताओं समेत कई अधिकारियों व आफिसर पर इस घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाए हैं।
हालांकि हम स्वतंत्र तौर पर इन आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं। यह जांच का विषय हैं, एडवोकेट ने जो आरोप लगाए, इसमें कितना सच है।
इधर पत्र के जारी होते ही सरकार ने सतबीर समेत तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन की वजह बतायी गई कि करनाल में फर्जी गेट पास कटे हैं। अब यदि सस्पेंशन की वजह को सही मान लिया तो यह तय हो जाता है कि मंडी में किसी ने किसी स्तर पर अनियमितता हुई है।
सरकार की कार्यवाही से सस्पेंड हुए ऑक्शन रिकॉर्डर सतबीर की करनाल मंडी में बड़ा रूतबा बताया जा रहा है। इसके लिए उन्हें किस का आशीर्वाद प्राप्त है, यह तो जांच का विषय है। लेकिन गेट पास के पोर्टल तक उनकी पहुंच होना ही साबित करता है कि वह इस खेल के किंगपिन जरूर है। सतबीर का पद तो आक्शन रिकॉर्डर का है,फिर वह पोर्टल तक कैसे पहुंच गया? कह सकते हैं, उसके कारनामे खासे बडे़ हैं।
इतना ही नहीं मंडी सचिव आशा रानी के लिए भी सतबीर खासा महत्वपूर्ण रहा है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि जहां जहां आशा रानी नियुक्त रही, अधिकतर जगह सतबीर भी उनके साथ वहां वहां नियुक्त रहा। अब यह महज संयोग है, या सोचा समझा तरीका। वजह कुछ भी हो ,लेकिन सतबीर के आरोपों के घेरे में आने के बाद अब उन्हें पुष्पित पल्लवित" करने वालों पर भी उंगली उठना लाजमी हो जाता है।
इसकी यदि गहनता से जांच हो तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। इधर सतबीर भी अपने आका के लिए सस्पेंशन सह गया है। लेकिन उसने अपने आकाओं के प्रति वफादारी निभाते हुए अभी तक मुंह नहीं खोला है।
वह चुप है। उसकी चुपी में कई राज है। और इन राज में छुपे हैं कई ऐसे कारनामे जो इस फर्जी कांड की परतो के रहस्य को और ज्यादा उलझा रहे हैं।
मजे की बात तो यह है कि सीएम नायब सिंह सैनी भी मंडी सिस्टम में पनप चुके इस भ्रष्टाचार को बारिकी से समझने में फिलहाल चूकते नजर आ रहे हैं। तभी तो तीन कर्मचारियों को सस्पेंड करके मामले को खत्म सा ही कर दिया है।
कायदे से होना तो यह चाहिए था कि तीनों कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के तहत मामला दर्ज किया जाता। इसके साथ कौन कौन अधिकारी मिला हुआ है, उसकी भूमिका भी जांच होनी चाहिए थी।
गेट पास के पोर्टल का पासवर्ड हालांकि मंडी सचिव आशा कुमार के पास रहता है। उनकी मर्जी के बिना कोई दूसरी गेट पास पोर्टल तक पहुंच ही नहीं सकता है। एडवोकेट राजेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि पोर्टल मंडी से बाहर भी खोला गया। यदि ऐसा है,तो आशा रानी की मर्जी के बिना यह संभव ही नहीं है। तो फिर अभी तक सरकार आशा रानी के प्रति नजरे इनायत क्यों कर रही है? यह बड़ा सवाल है।
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आशा रानी की मंडी प्रशासन और सरकार में जबरदस्त पकड़ है। ,इस बात का अंदाजा इससे लग सकता है। धान की सरकारी खरीद को सुचारू तरीके से कराने के सीएम नायब सिंह सैनी लगातार प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आशा कुमारी सरकार के विजन को करनाल अनाज मंडी में जमीन पर उतराने में विफल रही है। बावजूद इसके वह फिलहाल किसी भी तरह की कार्यवाही से परे दिख रही है।
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कुछ जिम्मेदार अधिकारी सरकार के अच्छे प्रयास को कैसे बाधित करते हैं, करनाल मंडी सचिव इसका सर्वोच्च उदाहरण साबित हो रही है। यह पहला मौका भी नहीं है, जब आशा रानी विवादो में धिर कर साफ बच निकली है।
नवंबर 2015 में भी उन पर गंभीर आरोप लगे थे। तब बापौली अनाज मंडी और सनौली खरीद केंद्र के आढ़ती पसीना खुर्द गांव के पास भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अनिल जैन, तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला से मिले। आढ़तियों ने बताया कि एक तरफ तो सरकार प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों ने जनता की नाक में दम कर रखा है। वे हर कार्य के लिए रिश्वत मांगते हैं। आढ़तियों ने आशा रानी पर गंभीर आरोप जड़े थे।
लेकिन इन आरोपों के बाद भी वह अच्छी जगह पोस्टिंग पाने में कामयाब रही है।
चौंकाने वाली बात तो यह रही कि भाजपा के सीनियर लीडर के सामने आढ़तियों ने आशा रानी पर गंभीर आरोप जड़े,लेकिन इसी सरकार में वह करनाल जैसी मंडी का चार्ज लेने में कामयाब रहती है। यह उनकी चतुराई है या जुगाड़ यह तो जांच का विषय है,लेकिन सरकार को भी देखना होगा कि आखिर एक अधिकारी जिसकी भूमिका संदेह के घेरे में रहती है,कैसे इतनी अच्छी पोस्टिंग ले पाता है? यह सरकार के लिए भी मंथन का विषय हो सकता है।
फर्जी गेट पास कांड की दूसरी बड़ी कड़ी डीएफएससी विभाग के अधिकारी समीर है। वह भी कई बार आरोपों के घेरे में रहे हैं। लेकिन हर बार वह साफ बच निकलते हैं। इस बार भी एडवोकेट राजेंद्र चौहान ने उन पर गंभीर आरोप जड़े हैं। लेकिन आशा रानी की तरह वह भी अभी तक किसी कार्यवाही से बाहर नजर आ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर इस मामले को हल्का कर दिया है। जिससे कोई बड़ा सवाल न उठ सके। अब भले ही सरकार या मंडी प्रशासन यह सोच कर निश्चित हो जाए कि मामला हल्का पड़ गया।
लेकिन 125 करोड़ का घोटाला कोई छोटी रकम नहीं है। वह भी जब तक सरकार बार बार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का दावा कर रही है। ऐसे दावों के बीच मात्र तीन लोगों पर कार्यवाही से समझा जा सकता है कि कोई अद्श्य ताकत है, वह प्रशासनिक और राजनीतिक जो भी है,लेकिन वह सरकार और सिस्टम को कठपुतली की तरह नचा रहा है।
वह कौन है? उसकी पहचान हुए बिना इस भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार संभव नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल क्या ऐसा संभव है।





