नई अनाजमंडी फर्जी गेट मामला:-
किसानों के बाद आढ़तियों की बारी, पूछेंगे कैसे कटवाए GATE
पास
एसडीएम की जांच में 294 फर्जी गेट पास का मामला आया था सामने
द न्यूज इनसाइडर करनाल
हालांकि जांच में उन आढ़तियों को शामिल किया जाएगा, जिनका संबंध 3 नवम्बर को काटे गए करीब 294 गेट पास से है। अल सुबह में जिन आढ़तियों द्वारा गेटपास कटवाए है, उनमें से करीब 16 आढ़तियों के लाईसेंस मंडी प्रशासन ने सस्पेंड कर दिए है। लेकिन सवाल उठ रहा है कि बाकी जो आढ़ती 232 गेट पास कटवाने वाले है, उनके लाइसेंस को अब तक क्यों नहीं सस्पेंड किया गया। उन पर क्यों मेहरबानी की जा रही है। जबकि पूरा मामला लगभग साफ दिखाई दे रहा है कि मंडी में बिना धान आए ही फर्मा द्वारा मंडी अधिकारियों-कर्मचारियों की आवभगत करके गेट पास कटवाएं हैं। जो किसी भी तरीके से सही नहीं ठहराया जा सकता।
उन किसानों के नाम कटवाएं गए गेट पास, जिनकी पैमेंट आढ़ती के खातों से होनी थी
नई अनाजमंडी के एक आढ़ती न नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि गेट पास उन किसानों के नाम पर कटवाने को तवोज्जों दी गई। जिन किसानों ने आढ़ती के माध्यम से पैमेंट का कॉलम भरा था। अगर ऐसा नहीं होता तो आढ़ती क्यों इतनी बड़ी मुसीबत मोल लेते साथ ही उनकी पैमेंट भी डूब जाने का डर था। इसलिए योजना के तहत ही गेट पास कटवाएं है। अब फर्जी गेटपास को कितना ही सही बताने का जोर लगाया जाए, सही नहीं हो सकते।
अधिकारियों ने लगाया सरकार की योजना का पलीता
सरकार ने धान खरीद में पूरी पारदर्शिता के साथ खरीद कार्य आगे बढ़ाया। लेकिन करनाल मंडी में कार्यरत सैकड़ों आढ़तियों, मंडी कर्मचारियों, अधिकािरियों व खरीद एजेंसी के कर्मचारियों ने अापस में साठंगांठ करके प्रभावशाली योजना का पलीता लगा दिया। इन लोगों की वजह से किसानों को अपनी फसल को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्योंकि उन्हें समय पर गेट पास उपलब्ध नहीं कराए गए। उनकी धान प्राइवेट तौर पर राइस मिलरों ने खरीदा अोर बाद में इसी धान को सरकारी खातों में दर्ज करवाने के लिए फर्जी गेट पास का बड़ा खेल खेला गया।
ये है मामला
3 नवम्बर को मंडी कर्मचारियों ने मंडी में बिना धान आए ही करीब 294 गेट पास काट डाले, जो करीब 28 हजार क्विटल के थे। जब मामले की जांच एसडीएम आयूष सिन्हा ने की ओर सीसीटीवी फूटेज चेक किए तो पाया कि जो गेट पास काटे गए है। वे तो फर्जी लग रहे है, क्योंकि जिस टाइम गेट पास कटे है। उस समय तो कोई भी किसान धान लेकर मंडी में आया ही नहीं। मामला खुलते ही आढ़तियों-मंडी कर्मचारियों व अधिकारियों में हड़कंप मच गया।जिसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग के इंसपेक्टर समीर विशिष्ट की शिकायत पर पुलिस थाने में शिकायत देकर केस दर्ज करवाया गया था।
राइस मिलर-आढ़ती एसोसिएशन मिलकर कर चुकी है प्रदर्शन
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राइस मिलर्स-आढ़ती प्रशासन पर दवाब बनाने की नियम से प्रदर्शन कर डीसी को सीएम के नाम ज्ञापन भी सौंप चुके है। प्रदर्शन कर डीसी से मांग की गई थी कि मामले की निष्पक्ष व सही प्रकार से जांच की जाए। लेकिन सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एसडीएम ने जांच में लापरवाही बरती, जांच रिपोर्ट देखकर ऐसा तो नहीं लगता। लेकिन इतना जरुर लगता है कि आढ़ती व राइस मिलर जांच को प्रभावित करने का प्रयास जरुर कर रहे हैं। क्योंकि वे जानते है कि बिना धान आए गेट पास कटना कोई छोटा मोटा मामला नहीं है।
किसानों से कहा जा रहा कि पुलिस को बताओं वे धान लेकर आए थे
एक आढ़ती ने आरोप लगाते हुए बताया कि आढ़ती किसानों से आग्रह कर रहे है कि पुलिस जांच में जाकर बताओं की वे पहले धान लेकर आए थे। वे धान बेचकर जा चुके थे। इतने दिनों तक मंडी में कैसे पड़े रहते। लेकिन दूसरी ओर सरकार की नीति स्पष्ट थी कि ई-खरीद पोर्टल गेट पास उस समय उपलब्ध होगा। जब किसान मंडी में धान लेकर आएगा। लेकिन यहां पर गेट पास बिना धान आए ही गेट पास जारी कर दिए गए। इसका जवाब किसानों के पास शायद नहीं है।


