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इंसपेक्टर द्वारा आढ़तियों पर दवाब बनाकर रुपए वसूलने का  मामला , जोनल अधिकारी 7 दिन में सौपेंगे रिपोर्ट




फाइल फोटो

काफी गंभीर आरोप है। सीएम के विधानसभा क्षेत्र में खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर की गेहूं खरीद में गड़बड़ी पर अधिकारी सख्त।डीसी स्वयं देख रहे मामले को। 

द न्यूज इनसाइडर करनाल
नई अनाजमंडी में खाद्य आपूर्ति विभाग के इंसपेक्टर द्वारा आढ़तियों से प्रति बैग तीन-तीन रुपए वसूलने के गंभीर आरोप लगे है। आरोप संज्ञान में आते ही डीसी डॉक्टर निशांत यादव ने मामले की जांच मार्केटिंग बोर्ड के जोनल इंचार्ज सुशील मलिक को आगामी सात दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए है।


मामला उजागर होते ही खाद्य आपूर्ति विभाग के विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। इंसपेक्टर के अलावा अन्य अधिकारियों को डर बना हुआ है कि जांच का दायरा उन तक जरुर पहुंचेगा। प्रश्न उठ रहा है कि जब मामला डीसी के संज्ञान में है तो क्या मामला डीएफएसी के नॉलेज में नहीं था।विभाग के आला अधिकारी के मामला संज्ञान में आने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद आढ़तियों ने अपनी बात को मौखिक रूप से प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखा।





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जिसके बाद डीसी ने मामले की जांच शुरु करवाई। लेकिन वसूली के मामले में डीएफएससी की भूमिका सवालों के घेरे में बनी हुई है। चूंकि करनाल में डीएफएससी अनिल कुमार के सेवाकाल में ही कई बड़े मामले उजागर हुए है। जैसे डीएफएससी के कार्यकाल में ही हरियाणा के इतिहास में पहली बार 3 बार धान की पीवी हुई, पुरानी जनता मंडी में डिपो होल्डर्स द्वारा बेची कई आटे की खेप पकड़ी गई।


वहीं 60 से अधिक डिपो होल्डर्स द्वारा बड़े पैमाने पर सरकारी आटे का गबन डाला गया। डिपो को सस्पेंड कर दिया गया। जिसकी जांच अब भी चल रही हैं। लेकिन पद पर बैठे जिम्मेवार अधिकारी डीएफएससी द्वारा मामले की मौखिक जानकारी मिलने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाए गए, जो डीएफएससी की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह तो खड़ा ही करता हैं। वहीं दूसरी ओर विभाग के इंसपेक्टर अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं।


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आढ़तियों ने कहा कि उन्हें डीसी द्वारा करवाई जा रही जांच पर पूरा भरोसा है, लेकिन जब भी आढ़तियों को जांच में शामिल किया जाए तो उन्हें गुप्त तरीके से बुलाया जाए। उनके ब्यानों को सार्वजनिक नहीं किया जाए, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो विभाग के अधिकारी आने वाले सीजन में उन्हें कई तरह से परेशान करने से बाज नहीं आएगे। इस मामले की भड़ास आगे जाकर निकालेंगे। जो मानसिक पीढ़ा आढ़तियों ने झेली है, उसे वे शब्दों में ब्या नहीं कर सकते। आढ़तियों ने कहा कि दूसरी खरीद एजेंसी हैफेड द्वारा बिल्कुल सही तरीके से कार्य किया गया।

डीसी डॉक्टर निशांत यादव ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच जोनल अधिकारी सुशील मलिक को सौंपी है। सोमवार की सुबह जोनल अधिकारी से इस बात को लेकर बातचीत हो चुकी है। आगामी 7 दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए है। जांच में दोनों पक्षों के ब्यान लिए जाएगे। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता के साथ जांच की जा रही है।

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