क्या सरकार अपने ही गृह मंत्री अनिल विज का फोन टैप करा रही है?
क्य गृह मंत्री अनिल विज का फोन टैप हो रहा है। विज ने इस तरह की आशंका व्यक्त की है। उन्होंने एक रिपोर्ट भी मांगी है कि प्रदेश में किस किस के फोन टैप हो रहे हैं।
यह विवाद उस वक्त सामने आया, जब सीएम और विज के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर यूथ फॉर चेंज के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने कहा कि जिस प्रदेश का गृह मंत्री का ही फोन टैप हो रहा है तो आम आदमी का क्या होगा? ढुल ने बताया कि यह बहुत ही चिंता की बात है। सरकार को इस पर स्प्ष्टीकरण देना चाहिए।
फोन टैपिंग करने से पहले एक प्रपोजल तैयार होगा। इसमें स्पष्ट करना होगा कि क्यों और किस कारण से यह कदम उठाना प़ रहा है। वह व्यक्ति कौन है? उसके फोन को टेप करने की जरूरत क्यों है? इससे कानून को क्या मदद मिल सकती है। यह प्रस्ताव गृह विभाग के पास जाएगा। वहां इसकी समीक्षा होगी। अब गृह विभाग तय करेगा कि फोन टेप की इजाजत दी जाए या नहीं। यदि गृह विभाग को लगता है कि फोन टेप जरूरी है तो वह इसकी इजाजत दे सकता है। यदि लगता है कि यह सही नहीं है तो वह इससे इंकार भी कर सकता है। गृह विभाग की इजाजत के बाद भी एक कमेटी इसकी समीक्षा करेगी। इस कमेटी में एक कैबिनेट सचिव, विधि सचिव और टेलीकम्यूनिकेशन सचिव होगा। प्रदेश स्तर पर बनी कमेटी में मुख्य सचिव, विधि सचिव और सचिव स्तर का एक अधिकारी होगा। इन तीनों का काम टैपिंग पर दिए गए निर्णय की समीक्षा करना होता है। फोन टैपिंग के मामले में यह भी नियम है कि किसी भी व्यक्तिका फोन एक बार अनुमति मिलने के बाद दो महीने तक टैप किया जाएगा। इसके बाद समयावधि बढ़ाने के लिए फिर से अनुमति लेनी होगी। किसी भी व्यक्ति का फोन अधिकतम 6 महीने ही टैप किया जा सकता है।
इस तरह की आशंका व्यक्त की जा रही है, सीएम और मंत्री के बीच नया विवाददा न्यूज इनसाइडर ब्यूरो, चंडीगढ़
सीआईडी को गृह विभाग से अलग करने पर बढ़ी तकरार, विज पीछे हटने को तैयार नहीं
क्य गृह मंत्री अनिल विज का फोन टैप हो रहा है। विज ने इस तरह की आशंका व्यक्त की है। उन्होंने एक रिपोर्ट भी मांगी है कि प्रदेश में किस किस के फोन टैप हो रहे हैं।
यह विवाद उस वक्त सामने आया, जब सीएम और विज के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर यूथ फॉर चेंज के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने कहा कि जिस प्रदेश का गृह मंत्री का ही फोन टैप हो रहा है तो आम आदमी का क्या होगा? ढुल ने बताया कि यह बहुत ही चिंता की बात है। सरकार को इस पर स्प्ष्टीकरण देना चाहिए।
फोन टैपिंग का क्या है नियम
फोन टैपिंग करने से पहले एक प्रपोजल तैयार होगा। इसमें स्पष्ट करना होगा कि क्यों और किस कारण से यह कदम उठाना प़ रहा है। वह व्यक्ति कौन है? उसके फोन को टेप करने की जरूरत क्यों है? इससे कानून को क्या मदद मिल सकती है। यह प्रस्ताव गृह विभाग के पास जाएगा। वहां इसकी समीक्षा होगी। अब गृह विभाग तय करेगा कि फोन टेप की इजाजत दी जाए या नहीं। यदि गृह विभाग को लगता है कि फोन टेप जरूरी है तो वह इसकी इजाजत दे सकता है। यदि लगता है कि यह सही नहीं है तो वह इससे इंकार भी कर सकता है। गृह विभाग की इजाजत के बाद भी एक कमेटी इसकी समीक्षा करेगी। इस कमेटी में एक कैबिनेट सचिव, विधि सचिव और टेलीकम्यूनिकेशन सचिव होगा। प्रदेश स्तर पर बनी कमेटी में मुख्य सचिव, विधि सचिव और सचिव स्तर का एक अधिकारी होगा। इन तीनों का काम टैपिंग पर दिए गए निर्णय की समीक्षा करना होता है। फोन टैपिंग के मामले में यह भी नियम है कि किसी भी व्यक्तिका फोन एक बार अनुमति मिलने के बाद दो महीने तक टैप किया जाएगा। इसके बाद समयावधि बढ़ाने के लिए फिर से अनुमति लेनी होगी। किसी भी व्यक्ति का फोन अधिकतम 6 महीने ही टैप किया जा सकता है।
भले ही यह नियम हो, लेकिन पुलिस के लिए फोन टैप करना बेहद आसान है। मनोहर सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान करनाल के कई पत्रकारों के फोन टैप होते रहे हैं। उनकी बातचीत को सरकार के लिए काम करने वाले एक विशेष अधिकारी ने सार्वजनिक भी कर दिया था। यह रिकार्डिंग करनाल में सरकार के लिए तब काम करने वाले लोगों ने एक पुलिसकर्मी के साथ मिल कर की थी। इन्होंने लगातार लंबे समय तक काल टैप की, इस बातचीत का इस्तेमाल तब तब किया जब जब उन्हें लगा कि पत्रकार पर खबर रोकने का दबाव बनाना है। करनाल के बहुत से लोगों के पास इस फोन टैप की जानकारी थी। फोन टैप करने वालों ने भी अपना प्रभाव दिखाने के लिए कई बार सार्वजनिक तौर पर यह दावा किया था कि वह इस काम को अंजाम दे रहे हैं।
क्या इस तरह से फोन टैप हो सकता है
सीएम और विज में बढ़ रहा है टकरावदूसरी ओर सीएम और विज के बीच अब टकराव बढ़ने लगा है। मुद्दा सीआईडी विभाग गृह विभाग से अलग करने का हो, लेकिन पीछे वजह दूसरी भी है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी विज जहां विवाद पर संभल कर बयानबाजी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सीएम चुप है। लेकिन दूसरी ओर सीआईडी को गृह विभाग से अलग करने की तैयारी जोरो पर चल रही है। सीएम चुप रह कर यह काम बहुत ही शांत ढंग से कर रहे हैं। विज की अभी तक की टिप्पणी पर उन्होंने कोई ठोस प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी है। हालांकि विज ने अब इस विवाद को पार्टी आलाकमान तक पहुंचा दिया है। इसके बाद भी वह शांत बैठते नजर नहीं आ रहे हैं। वह यह भी बोल रहे हैं कि सीएम को अधिकार है कि वह किसी भी मंत्री के विभाग कम कर सकता है या बढ़ा सकता है।
तकरार की वजह क्या है?दरअसल अनिल विज सीएम की कार्यप्रणाली से ज्यादा सहमत नहीं है। यहीं वजह है कि जब भी मौका मिलता है वह सीएम को घेर लेते हैं। पिछले कार्यकाल में भी और इस बार भी सीएम की कार्यप्रणाली में खास बदलाव नहीं आया है। विज क्योंकि पार्टी के सीनियर नेता है। उनका मानना है कि सीएम की जो अभी तक की कार्यप्रणाली है, इससे न तो जनता को लाभ हो रहा है न पार्टी को। यहीं वजह है कि वह कुछ मुद्दों को लेकर मुखर है।
सीएम और मंत्री में दूरी की एक वजह तालमेल की कमी हैहरियाणा की राजनीति पर शोध कर रहे दीपक शर्मा ने बताया कि ऐसा लगता है कि दूसरे कार्यकाल में भी मनोहर लाल वहीं गलती कर रहे हैं, जो पहले कार्यकाल में करते रहे हैं। उनका अपने मंत्रियों के साथ तालमेल नहीं है। सीएमओ में ऐसे लोगों को मुख्य पदों पर लगा दिया है जो मंत्रियों को खास तवज्जो नहीं देते। हालांकि कई दूसरे मंत्री भी इस व्यवस्था से नाराज है, लेकिन वह खुल कर बोलने से बचते हैं।
तो इस विवाद का हल क्या है?फिलहाल सीएम और विज के बीच चल रहे विवाद का हल होता दिखायी नहीं दे रहा है। इसके पीछे बढ़ वजह यह है कि मनोहर लाल का इस बार पार्टी आलाकमान में कद कुछ हद तक कम हुआ है। इसकी वजह यह रही कि पार्टी बहुमत के आंकड़े से दूर रही। इसके लिए सीधे तौर पर मनोहर लाल की नीतियों को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। सीएम का विरोध करने वालों का तर्क है कि यदि इस बार भी सरकार के कामकाज में बदलाव नहीं हुआ तो प्रदेश का मतदाता भाजपा से दूर जा सकता है। यहीं वजह प्वाइंट है जिसका मनोहर लाल के पास फिलहाल तोड़ नहीं है।
बहरहाल विज और मनोहर विवाद ने एक बात तो साफ कर दी कि जब प्रदेश के गृह मंत्री के साथ फोन टैप जैसी घटना हो सकती है तो फिर आम आदमी का तो खैर कहना ही क्या? उसका तो फोन जब चाहे टैप करा लिया जाए। फिर भी गृह मंत्री ने अपनी ओर से पहल करते हुए पुलिस को एक पत्र लिखा हैं, जिसमें उन्होंने फोन टैप करने को लेकर हिदायत जारी की है। अब देखना यह है कि इस हिदायत का कितना पालन होता है। हालांकि जिस तरह से सीआईडी को गृह विभाग से अलग किया जाने की कोशिश हो रही है, इसके पीछे भी कहीं न कहीं फोन टैपिंग विवाद भी एक वजह हो सकता है। क्योंकि विज इस मामले की तह में जाना चाहते हैं, वहीं कुछ सरकार के कुछ लोग चाहते हैं कि इस तरह की जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए। अब देखना यह है कि फोन टैपिंग पर नियमों की पालना होती है या नहीं।
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