NCERT के नक्शे पर हरियाणा-भरतपुर विवाद: इतिहास या षड्यंत्र?

        NCERT के नक्शे पर हरियाणा-भरतपुर विवाद: इतिहास या षड्यंत्र?



रेवाड़ी

कक्षा 8 की NCERT सामाजिक विज्ञान की किताब के एक नक्शे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यूनिट-3 के पृष्ठ 71 पर दर्शाए गए मानचित्र में भरतपुर रियासत और हरियाणा को सन 1759 में मराठा साम्राज्य का हिस्सा बताया गया है। रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इसे "गलत और भ्रामक" बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

हुड्डा का कहना है कि ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार न तो हरियाणा और न ही भरतपुर कभी मराठा साम्राज्य का हिस्सा रहे। उनके मुताबिक 1755-1763 के बीच महाराजा सूरजमल भरतपुर के शासक थे और उस समय यह एक स्वतंत्र जाट रियासत थी। उन्होंने आरोप लगाया कि किताब में भरतपुर का नाम मिटाकर उसे मराठा साम्राज्य में दिखाना "इतिहास के साथ अन्याय" और "संभवतः एक सुनियोजित षड्यंत्र" है।



ऐतिहासिक संदर्भ और बहस

पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761) में महाराजा सूरजमल मराठाओं के सहयोगी जरूर थे, लेकिन हार के बाद भी हरियाणा की भूमि ने मराठों को शरण दी। सांघी गांव में मराठा सेनापति सदाशिवराव भाऊ का अज्ञातवास और भरतपुर दरबार द्वारा मराठा महिलाओं की सुरक्षा—दोनों घटनाएं सहयोग के उदाहरण हैं, न कि राजनीतिक अधीनता के।


इतिहासकार प्रो. जयवीर धनखड़ का विश्लेषण इस विवाद को और गहरा करता है। उनके अनुसार, मराठा साम्राज्य के पेशवा युग (1761 तक) में मराठाओं ने भरतपुर पर कभी स्थायी अधिकार नहीं किया। उनकी विजय सीमित और अस्थायी थीं, और हरियाणा में उन्होंने कोई सीधी लड़ाई भी नहीं लड़ी।

राजनीतिक पुट
दीपेंद्र हुड्डा ने इसे केवल ऐतिहासिक गलती नहीं, बल्कि "राजनीतिक सोच के तहत किया गया बदलाव" बताया है। उनका तर्क है कि 1948 में भरतपुर का भारत में विलय एक स्पष्ट शर्त के साथ हुआ था, जिसे नकारना न सिर्फ इतिहास से छेड़छाड़ है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान के साथ खिलवाड़ भी है।





NCERT पर सवाल
यह विवाद इस बड़े सवाल को जन्म देता है कि स्कूली इतिहास की किताबों में मानचित्र और तथ्यों का सत्यापन किस प्रक्रिया से होता है, और क्या अकादमिक निष्पक्षता पर राजनीतिक प्रभाव हावी हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह त्रुटि है तो इसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए, लेकिन अगर यह सोच-समझकर किया गया बदलाव है, तो यह एक गंभीर शैक्षिक और सांस्कृतिक संकट है।


यह मामला अब सिर्फ एक पन्ने के नक्शे का नहीं, बल्कि उस विश्वास का है जिसके आधार पर नई पीढ़ी अपना इतिहास समझती है। ऐसे में NCERT से जवाब और सुधार दोनों की मांग जोर पकड़ रही है।


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