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किसानों का दर्द.. फसल बेचने के बाद नहीं मिली पैमेंट, 750 करोड़ अटके
मंडी में हर कदम में किसान बदहाल, नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य

द न्यूज इनसाइडर, करनाल




करनाल। मंडियों में सरकार के दावों की पोल खुल रही है, किसान फसल बेचने के बाद भी पैमेंट का इंतजार कर रहे है। मंडियों के करीब 750 करोड़ रुपए की राशि अटक चुकी है। आढ़तियों का कहना है कि जब आई-फार्म पोर्टल पर एंट्री होगी, तभी तो पैमेंट आएगी। अगर आज भी पोर्टल पर आई-फार्म की एंट्री करे तो करीब 10 दिन का समय पैमेंट आने में लगेगा। डीएफएससी के इंसपेक्टर अलग ही राग अलाप रहे है कि आढ़तियों ने जे-फार्म अपलोड नहीं किए है। जब फार्म अपलोड होकर आएगा, तभी तो आगे की कार्रवाई होगी। लेकिन आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रजनीश चौधरी ने उनके दावों की पोल खोल दी। किसानों को करोड़ों रुपए की राशि देने के लिए अधिकारी गंभीर नजर नहीं आते। किसान पैमेंट के लिए आढ़तियों के पास चक्कर लगाने में जुटा है, आढ़ती किसानों को सिर्फ आश्वासन ही दे रहा है। क्योंकि आढ़तियों को भी नहीं पता कि पैमेंट आने का तरीका क्या होगा।

वहीं मंडियों में किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही। कुछ किसानों को समर्थन मूल्य मिल पा रहा है जबकि अधिकाशं किसानों को समर्थन मूल्य के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। गेट पास से लेकर फसल बेचने के लिए राइस मिलरों-विभाग के इंसपेक्टरों से गुहार लगानी पड़ रही है। किसानों की माने तो धान कागजों में तो पूरा का पूरा समर्थन मूल्य पर बिक रहा है, लेकिन पीआर की बी-ग्रेड समर्थन मूल्य पर बिकने का इंतजार करने में जुटा हैं। जबकि समर्थन मूल्य 1850 रुपए हैं। मंडी के एक प्रधान ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि ग्रेड बी की वैरायटी का समर्थन मूल्य 1850 रुपए प्रति क्विंटल है। लेकिन बेची 1780 रुपए प्रति क्विंटल। हमारे सामने ही समर्थन मूल्य दम तोड़ रहा है, बाकी मंडी में क्या हो रहा होगा, बताने की जरुरत नहीं।

2 लाख कट्टे धान बिना लिखे पड़ा मंडी में
मंडी में इस समय करीब 2 लाख कट्टों से अधिक बिना लिखे ही पड़ा है। जो अब तक पोर्टल पर नहीं चढ़ा है। जब तक धान पोर्टल पर नहीं चढ़ाया जाएगा तब तक धान की खरीद नहीं हो सकती। किसान कई-कई दिनों से पड़े हुए है। आढ़ती-किसान धान को पोर्टल पर चढ़ाने के लिए चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं। जो मुसीबत बना हुआ हैं।






मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल बंद
मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल बंद पड़ा हैं। मंडी में किसान फसल लेेकर आ रहे है, लेकिन पोर्टल पर धान की एंट्री नहीं करवा पा रहे। जिसके चलते धान की फसल बिना बिके की मंडी में पड़ी है। किसान परेशान है, कोई उसकी सुनने वाला नहीं। एसोसिएशन प्रधान ने सरकार से मांग की है कि जल्द ही पोर्टल को चालू करवाया जाए।
समर्थन मूल्य के लिए राइस मिलर सहित एजेंसी अधिकारियों तक फोन पर फोन
नरूखेड़ी के एक किसान ने बताया वह 9 एकड़ की फसल लेकर आया था। लेकिन यहां पर धान का रेट समर्थन मूल्य से कम लगाया गया। काफी मशक्कत की, लेकिन बात नहीं बनी। उसके बाद खरीद एजेंसियों के इंसपेक्टर तक बात पहुंचाई गई तब जाकर समर्थन मूल्य पर धान लेने की बात हुई। मंडी में आने के बाद ही किसानों की परेशानियां पहले की अपेक्षा काफी बढ़ चुकी है। इस ओर कोई ध्यान नहीं।

वर्जन
पंचायत नई अनाजमंडी आढ़ती एसोसिएशन प्रधान रजनीश चौधरी ने बताया कि जिले की मंडियों में किसानों को फसल बेचे हुए 10 से 12 दिन हो चुके है, लेकिन अब तक पैमेंट नहीं आई। किसान पैमेंट के लिए इंतजार कर रहे है। करीब 750 करोड़ की पैमेंट अटकी पड़ी हैं। आई-फार्म ही सम्बधित खरीद एजेंसियां नहीं एंट्री कर रही है। पता चला है कि पोर्टल में ही दिक्कत चल रही है। वहीं मेरा फसल मेरा ब्यौरा अब तक बंद पड़ा हैं।

The news insider

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