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जांच अधिकारी की मंशा पर सवाल: आढ़तियों ने लिखित में दिया, फिर भी मांग रहे सुबूत 
द न्यूज इनसाइडर करनाल

क्या मार्केट बोर्ड के जोनल अधिकारी सुशील मलिक खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर को बचा रहे हैं? अभी तक की जांच प्रक्रिया जिस तरह से चल रही है, वह जांच अधिकारी की मंशा पर सवाल खड़ा करता नजर आ रही है। परेशान आढ़ती मंगलवार को खुल कर सामने आ गए। उन्होंने जोनल अधिकारी के कार्यालय में लिखित में दिया। इसके बाद भी जोनल अधिकारी उनसे गड़बड़ी के सुबूत मांग रहे हैं।

यानी की आढ़तियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह अपने व्यक्तिगत बयान दर्ज कराए। क्योंकि जोनल अधिकारी को पता है कि व्यक्तिगत तौर पर आढ़ती बयान दर्ज कराने से पीछे हट सकते हैं। इस तरह से आरोपी इंस्पेक्टर के बचने का रास्ता साफ हो जाएगा। जोनल अधिकारी के पास अब जब आढ़तियों ने एसोसिएशन के पत्र पर लिख कर इंस्पेक्टर की शिकायत कर दी है। इसके बाद भी जोनल अधिकारी बोल रहे हैं कि सात दिन के बाद ही जांच रिपोर्ट डीसी को सौंपेंगे। 

इतना समय क्यों? यह अपने आप में बड़ा सवाल है। वह भी तब जब आढ़ती बार बार यह आरोप लगा रहे हैं कि आरोपी इंस्पेक्टर उन पर पक्ष में बयान देने का दबाव बना रहे हैं। 


मंगलवार को  नई अनाजमंडी की दोनों पंचायतों द्वारा एकजुट होकर इंसपेक्टर के खिलाफ लिखित में शिकायत जांच अधिकारी को सौंपकर कार्रवाई की मांग की। लेकिन जांच अधिकारी ने पंचायत के प्रधान से उन आढ़तियों के नाम देने को कहा, जिन्होंने आरोपी इंसपेक्टर को पैसे दिए थे या पैसे देने के लिए दवाब बनाया था। 


वहीं आढ़तियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जब तक इंसपेक्टर करनाल में कार्यरत रहेगा, तब तक जांच सही प्रकार से नहीं हो सकती। तो ऐसे में आरोपी इंस्पेक्टर को क्यों नहीं बदल दिया जाता। यदि बदलना भी संभव नहीं है तो कम से कम उन्हें जांच होने तक लंबी छूट्टी पर तो भेजा ही जा सकता है। लेकिन इस दिशा में अभी तक कुछ नहीं हो रहा है। 


पंचायत नई अनाजमंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रजनीश चौधरी व विनोद गोयल ने बताया कि आरोपी इंसपेक्टर का भय  आढ़तियों में इस कदर है कि अकेले आढ़ती दंबग इंसपेक्टर के खिलाफ नहीं खड़ा हो सकता। लेकिन जब इंसपेक्टर के आंतक से सभी आढ़ती परेशान है तो मजबूर होकर आढ़तियों को एकत्रित हुए है। उन्हें जांच अधिकारी द्वारा अलग से आढ़ती के नाम मांगना सही है, जब पंचायतों ने प्रस्ताव पर लिखित शिकायत दे दी है। इससे ज्यादा क्या लिखकर दे। उन्होंने कहा कि अब जबकि दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात जैडए के समक्ष रख दी है तो जांच रिपोर्ट जल्द ही डीसी के पास पहुंच जानी चाहिए ताकि आरोपी इंसपेक्टर के खिलाफ कार्रवाई हो सके।


इंसपेकटर सस्पेंड हो, तभी मिलेंगी राहत
आढ़तियों ने आरोपी लगाया कि इंसपेक्टर ने अकूत संपदा बना ली है, जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसपेक्टर को जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक सस्पेंड किया जाए या यहां से अन्य जगह पर तबदला कर दिया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आढ़तियों को काफी परेशानियां उठानी पड़ेगी। उन्होंने डीसी से मांग की कि इंसपेक्टर को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया जाए, जिससे आढ़तियों को राहत मिल सके।


जांच अधिकारी बोले, पहले क्यों नहीं दी शिकायत
जांच अधिकारी ने आढ़तियों से सवाल किया कि जब पैसे लिए जा रहे थे तब शिकायत क्यों नहीं दी। इस पर आढ़तियों ने कहा कि उन्हें डर था कि अगर उस समय शिकायत दी जाती तो उनका गेहूं नहीं उठाया जाता और गेहूं मंडी में पड़ा रहता, लगातार खराब होता रहता। जिसका व्यय आढ़तियों को करना पड़ता। इस पर आढ़ती राजेंद्र रहेजा ने आरोप लगाया कि उसकी 28 अप्रैल की अंतिम परेचज की थी, 29 जून को उसका गेहूं उठाया है। इसके पीछे एक ही कारण है कि उसने इंसपेक्टर की डिमांड को पूरा नहीं किया। इसलिए उसे जानबूझ कर परेशान किया। अगर वे इंसपेक्टर की पैसों की डिमांड पूरी कर देता तो उसे कोई परेशानी नहीं होती। उसके गेहूं का उठान सही समय पर हो जाता। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसी डर के मारे आढ़तियों ने इंसपेक्टर की नाजायज डिमांड पूरी करनी पड़ी।

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