कोरोना का कहर: सेनिटाइजर के दाम तीन गुणा तक बढ़े, मास्क भी 150 रुपए में मिल रहा है


द न्यूज इनसाइडर ब्यूरो करनाल
जैसे जैसे कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उसी रफ्तार से सेनिटाइजर और मास्क के दाम भी दुकानदार बढ़ रहे हैं। 50 रुपए में मिलने वाली सेनिटाइजर की शीशी अब 150 रुपए में मिल रही है। वहीं मास्क के 150 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। कंपनियों ने मौका को कैश करने के लिए प्रिंट रेट में भी इजाफा कर दिया है। यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह सेनिटाइजर और मास्क के दाम तय करें। क्योंकि ऐसा नहीं हो सकता है कि अचानक से दवा कंपनियां प्रिंट रेट बढ़ा रहे। उन्होंने बताया कि अंबाला, करनाल, कुरूक्षेत्र और कई जगह उन्होंने सर्वे किया। यहां तक की ऑन लाइन मिलने वाले सेनिटाइजर के दाम भी अब बढ़ा दिए गए हैं।


कोरोना स्पेशल मास्क भी मार्केट में
राकेश ढुल ने बताया कि मार्केट में कोरोना स्पेशल मास्क भी उपलब्ध है। इनका प्रिंट रेट 280 रुपए रखा गया है। दुकानदार इसे 160 रुपए से लेकर 200 रुपए में बेच रहा है। अब क्योंकि प्रिंट रेट ही इतना ज्यादा है। इसलिए कोई विरोध भी नहीं कर सकता। इधर लोगों में सेनिटाइजर और मास्क को लेकर ऐसा हौव्वा बना दिया कि हर कोई इसे खरीद रहा है। यदि कोई खरीददार थोड़ा बहुत आब्जेक्श उठाता है तो दुकानदार उसे बोल देता है कि लेना हो तो लो, अन्यथा रहने दो। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सेनिटाइजर और मास्क को लेकर दुकानदारों की मनमर्जी कितनी ज्यादा हो गयी है।

ब्रांडेड के नाम पर बिक रहा नकली माल
करनाल में ब्रांडेड के नाम पर नकली माल की भी भरमार है। यहां स्थानीय दवा कंपनी इन दिनों सिर्फ सेनिटाइजर ही बना रही है। बताया जा रहा है कि कंपनी के माल पर साेमवार को छापामारी भी हुई। लेकिन बाद में मामला रफादफा कर दिया गया। इस कंपनी के संचालक की पुलिस के सीनियर अधिकारियों से अच्छी खासी जान पहचान बतायी जा रही है।

करनाल में सेनिटाइजर बनाने की 50 इकाई है

अकेले करनाल में सेनिटाइजर बनाने की 50 इकाई काम कर रही है। इन इकाईयों में दिन रात सेनिटाइजर बनाया जा रहा है। अभी तक हेल्थ विभाग की ओर से एक भी कंपनी की जांच नहीं की गयी कि यहां बनने वाले उत्पाद की गुणवत्ता क्या है? इसके अतिरिक्त दवा बनाने की 10 से ज्यादा कंपनियों ने भी सारे उत्पाद रोक कर सेनिटाइजर बनाने पर ही जोर दे रखा है।


नामी कंपनियों ने भी बढ़ाए दाम
दूसरी ओर नामी कंपनियों ने भी सेनिटाइजर के प्रिंट रेट बढ़ा दिए हैं। यहां तक की श्रीश्री स्वच्छ हेंड सेनिटाइजर की 100 एमएल की बोतल के ऑन लाइन दाम 140 रुपए बताए जा रहे हैं। यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष राकेश ढुल ने बताया कि होना तो यह चाहिए कि इस वक्त कंपनियां लोगों की मदद के लिए आगे आए। सस्ते सेनिटाइजर बाजार में उपलब्ध कराने चाहिए। लेकिन यहां तो उलटा हो रहा है।
हेल्थ विभाग के अधिकारी निष्क्रिय क्यों?
यह भी सवाल उठ रहा है कि जब इतने बड़े स्तर पर सेनिटाइजर की मांग बढ़ रही है। बाजार में नकली उत्पाद आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी हेल्थ विभाग के अधिकारी कोई कार्यवाही करते नजर नहीं आ रहे हैं। अभी तक सेनिटाइजर बनाने वाली इकाईयों की स्पेशल जांच तक नहीं हुई। जबकि यहां से दिन रात माल तैयार होकर बाजार में पहुंच रहा है। जानकारों का आरोप है कि ऐसा लगता है कि हेल्थ विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी चुप है। अब उनकी यह चुप्पी क्यों है? यह जांच का विषय है।
विज का मंत्रालय और यह हाल
इधर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हेल्थ विभाग को अनिल विज के पास है। वह तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार काम करते हैं। इसके बाद भी सेनिटाइज और मास्क की कालाबजारी तो यहीं साबित कर रही है कि उनकी करनी और कथनी में अंतर है। उन्होंने कहा कि अनिल विज को इस ओर ध्यान देना चाहिए। जिससे गरीब लोगों को वाजिब दाम पर सेनिटाइजर और मास्क उपलब्ध हो सके।



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