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भाजपा के चेहते मिलर्स करा रहे सरकार की फजीहत, नहीं झूकी सरकार, पीवी 20 से शुरू

द न्यूज इनसाइडर की स्टोरी से सरकार की सीख, मिलर्स को दो टूक, पीवी होगी, मंजूर नहीं तो कर दो धान वापस
हमारा मत मत: विरोध करने वाले मिलर्स की पीवी सही से तो घोटाला खुद ब खुद उजागर होगा



द न्यूज इनसाइडर ब्यूरो, चंडीगढ़

फिजिकल वैरिफिकेशन (पीवी ) का विरोध करने वालों में ज्यादातर वह मिलर्स शामिल है, जो एक समय भाजपा के काफी नजदीक रहे हैं। यहीं मिलर्स बाकी मिलर्स पर दबाव बना कर सरकार की फजीहत करा रहे हैं। पीवी के विरोध में सरकारी धान से चावल न बनाने का निर्णय लेने के पीछे भी इनकी अपनी सोच है। न्यूज वैबसाइट के पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि यदि पीवी का विरोध करने वाले मिल संचालक नेताओं के धान के स्टॉक का सही से निरीक्षण हो जाए तो पता चल जाएगा कि इस बार धान खरीद में कितना बड़ा घोटाला हुआ है। यहीं वह चंद लोग है जो बाकी मिलर्स पर दबाव बनाए हुए हैं कि वह भी पीवी का विरोध करे। यूथ फॉर चेंज के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राकेश ढुल ने बताया कि सरकार को चाहिए कि उन राइस मिलर्स की पीवी विशेष तौर पर कराए, जिन्हें जिला मिलिंग कमेटी द्वारा तय की धान की मात्रा से ज्यादा धान दिया गया है। क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ वहीं से शुरू हुई है।

सरकार नहीं झूकी, पीवी 20 से शुरू
दूसरी ओर मिलर्स के विरोध को दरकिनार करते हुए सरकार ने स्पेशल पीवी कराने के अपने निर्णय को अमली जामा पहनाते हुए 20 दिसंबर से से काम शुरू करने का निर्णय ले लिया है। इसी को लेकर निदेशालय खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से अंबाला फतेहाबाद, जींद, हिसार, कैथल,करनाल, कुरुक्षेत्र,पलवल, सिरसा और यमुनानगर के डीसी से वीरवार को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पीके दास वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे। इसक सब्जेक्ट भी पीवी होगा। निदेशालय के प्रवक्ता ने द न्यूज इनसाइडर को बताया कि इस बार पीवी कराने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछली बार जो गड़बड़ी रह गयी थी, वह इस बार नहीं होगी। उन्होंने यह भी बताया कि टीम पारदर्शी तरीके से पीवी के काम को करेगी।

सांसद ने बैरंग लौटाया मिलर्स को
दूसरी ओर पीवी के विरोध करने वाले मिलर्स बुधवार को सांसद संजय भाटिया से मिलने गए। लेकिन वहां सांसद ने उनकी एक नहीं सुनी। सांसद इस बात से भी खफा है कि क्यों मिलर्स ने सरकार विरोध नारे लगाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मिलर्स को कोई दिक्कत थी तो उन्हें सही तरीके से व उचित माध्यम से अपनी बात सरकार के सामने रखनी चाहिए थी। लेकिन उनका तरीका गलत है। दूसरी ओर मिलर्स सरकार का विरोध तो कर रहे हैं, लेकिन वह विभाग के मंत्री डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के पास जाने से भी बच रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि मिलर्स को कोई दिक्कत है तो उन्हें विभाग के मंत्री के सामने उठानी चाहिए। तभी तो वह उनकी समस्या का समाधान करेंगे। बताया जा रहा है कि पीवी का विरोध करने वाले कुछ नेता क्योंकि खुद को भाजपा के नजदीक मान कर चल रहे थे,इसलिए वह काफी समय से विभाग के मंत्री की अनदेखी कर रहे थे।

पीवी से डर कैसा?

इधर जानकारों का कहना है कि पीवी से आखिर मिल संचालक डर क्यों रहे हैं। इसके पीछे दो वजह साफ तौर पर सामने आ रही है। मिलर्स के मुताबिक एक तो पीवी टीम में शामिल कुछ जांच अधिकारी रिश्वत की मांग करते हैं। यदि मिल संचालक उन्हें यह रिश्वत नहीं देते तो उन्हें तंग किया जाता है। पिछली बार पीवी के दौरान द न्यूज इनसाइडर की टीम ने भी एक मिल का स्टिंग किया था,इसमें सामने आया था कि टीम के सदस्यों का व्यवहार बहुत ही खराब रहा। उन्होंने चैकिंग के नाम पर मिल संचालक को खासा परेशान किया। इसलिए सही काम करने वाले मिलर्स को इस बार भी डर सता रहा है कि कहीं टीम अब फिर से रिश्वत की मांग न कर लें।
दूसरा वह मिलर्स डर रहे हैं जिन्होंने सरकारी धान की फर्जी खरीद दिखायी है। जबकि उन्होंने पिछली पीवी में अपना स्टॉक पूरा दिखा दिया था। अब यदि पीवी सही तरह से होती है तो उनके घोटाले का पता चल सकता है। जिससे उन पर कार्यवाही हो सकती है। विरोध के पीछे उनका यहीं डर काम कर रहा है।

डरे नहीं सहयोग करें, कोई रिश्वत मांगे तो करें शिकायत

मिलर्स के इस डर पर द न्यूज इनसाइडर की टीम ने एसीएस से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पीवी से मिलर्स को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि मिलर्स सहयोग करें, यदि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया तो डरने की जरूरत ही नहीं है। टीम अपना काम इमानदारी से करेगी। यदि इसके बाद भी किसी मिलर्स को शिकायत है तो वह इसकी जानकारी दें, गलत करने वालों से भी सख्ती से निपटा जाएगा। पीवी कराने के पीछे किसी को तंग करने की मंशा सरकार की नहीं है, बल्कि बार बार जो आरोप लग रहे हैं, उसकी तह में जाने की कोशिश है। जिससे घोटाला करने वालों की पहचान कर उन्हें उचित सजा दी जा सके।




द न्यूज इनसाइडर विचार       यदि मिलर्स इमानदार है, उन्होंने कोई घोटाला नहीं किया तो एक बार क्या यदि दस बार भी पीवी हो जाती है तेा उन्हें डरना नहीं चाहिए। टीम अपना काम करेगी, मिलिंग से स्टॉक निरीक्षण का कोई सीधा कनेक्शन नहीं है। इसलिए यह तर्क गलत है कि यदि पीवी होती है तो इस दौरान काम रोकना पड़ेगा। टीम स्टॉक चैक करेगी, न की काम बंद कराएगी। जहां तक रिश्वत की मांग है, एक तो ज्यादातर मिल परिसर में कैमरे लगे हैं, इसलिए कैमरों के सामने कोई भी इतनी हिम्मत नहीं जुटाएगा कि रिश्वत की मांग करेगा। यदि कोई करता है तो उसकी सीधी शिकायत सरकार से की जानी चाहिए। द न्यूज इनसाइडर भी मिल संचालकों का यह भरोसा दिलाता है कि यदि पीवी के दौरान कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो हमारी टीम मिलर्स के साथ कदम से कदम मिला कर खड़ी होगी, जिससे भ्रष्ट अधिकारियों को बेनकाब किया जा सके। अंत द न्यूज इनसाइडर की पूरी टीम भी मिलर्स से अपील करती है कि वह पीवी का विरोध करने की बजाय , सरकार का सहयोग करें। क्योंकि सरकारी धान में घोटाले को लेकर न सिर्फ मिलर्स बल्कि सरकार की साख भी दांव पर है। विपक्ष ने सदन में सरकार से जवाब मांगा था। सरकार पर लगातार विपक्ष घोटाला करने वाले मिलर्स को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। अंत यदि मिलर्स विरोध करते हैं तो यहीं संदेश जाएगा कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है। यूं भी सरकारी धान की खरीद का कनेक्शन सीधे सीधे किसान से हैं। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देती है। यह इसलिए कि खेती में नुकसान का जो जोखिम किसान उठाता है, उसे सामाजिक सुरक्षा मिल सके। यदि कोई फसल के समर्थन मूल्य में भ्रष्टाचार करता है तो यह एक तरह से देशद्रोह है, ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी ही चाहिए। दूसरी ओर पीडीसी का चावल गरीब की थाली में जाता है। सरकार इसके लिए भी भारी अनुदान देती है। सरकार के इस कदम से गरीबों को भी सामाजिक सुरक्षा मिलती है। इसमें भ्रष्टाचार का सीधा मतलब है गरीब के निवाले पर डाका, क्या सभ्य समाज में हम ऐसे भ्रष्टाचारियों को बर्दाश्त करेंगे? इस सवाल का जवाब आप खुद से तय कर लिजिए... संपादक




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